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Sugar बढ़ने के कारण भी अकड़ जाते हें कंधे, ठीक से हाथ ना उठना भी है Tension की बात

  • Edited By vasudha,
  • Updated: 23 Oct, 2026 11:50 AM
Sugar बढ़ने के कारण भी अकड़ जाते हें कंधे, ठीक से हाथ ना उठना भी है Tension की बात

नारी डेस्क: कंधों का अकड़ना (फ्रोजन शोल्डर) एक दर्दनाक स्थिति है, जिसस उसमें सूजन आ जाती है और धीरे-धीरे उसकी सामान्य गतिशीलता (मूवमेंट) कम हो जाती है। मधुमेह (डायबिटीज) से पीड़ित लोगों में, मधुमेह न होने वाले लोगों की तुलना में, यह स्थिति होने की संभावना दो से चार गुना अधिक होती है।  ब्लड शुगर के स्तर में बदलाव कंधे के जोड़ के आसपास के ऊतकों को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे सूजन, अकड़न और कंधे की गति में कमी आ सकती है। डायबिटीज का सही प्रबंधन, समय पर पहचान और फ्रोज़न शोल्डर का उचित इलाज, रिकवरी में सुधार करने और कंधे की कार्यक्षमता को बहाल करने में मदद कर सकते हैं।

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फ्रोजन शोल्डर और मधुमेह का क्या है कनेक्शन

संयोजी ऊतकों और जोड़ों के स्वास्थ्य में बदलाव के कारण मधुमेह से पीड़ित लोगों में फ्रोजन शोल्डर होने की संभावना अधिक होती है। उच्च रक्त शर्करा का स्तर कंधे के कैप्सूल के आसपास सूजन और अकड़न का कारण बन सकता है। इसके लक्षणों में कंधे में दर्द, अकड़न और दैनिक गतिविधियों को करने में कठिनाई शामिल हो सकती है। रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने से बेहतर रिकवरी में मदद मिल सकती है और जटिलताओं को कम किया जा सकता है। उपचार विकल्पों में फिजियोथेरेपी, व्यायाम, दवाएं और कुछ मामलों में उन्नत प्रक्रियाएं शामिल हैं। प्रारंभिक चिकित्सा जांच से लंबे समय तक कंधे की अकड़न को रोकने और गतिशीलता में सुधार करने में मदद मिल सकती है।

फ्रोजन शोल्डर को लेकर अनजान हैं लोग

मधुमेह एक दीर्घकालिक स्थिति है जो शरीर के विभिन्न तंत्रों को प्रभावित करती है, जिनमें हृदय, तंत्रिकाएं, गुर्दे, आंखें और जोड़ शामिल हैं। हालांकि कई लोग मधुमेह से संबंधित सामान्य जटिलताओं से अवगत हैं, लेकिन कम ही लोग फ्रोजन शोल्डर जैसी जोड़ों की समस्याओं के साथ इसके संबंध के बारे में जानते हैं। एडहेसिव कैप्सुलिटिस के रूप में भी जाना जाने वाला फ्रोजन शोल्डर तब होता है जब कंधे के जोड़ के आसपास का कैप्सूल सूज जाता है और कस जाता है। इससे दर्द, अकड़न और बांह को हिलाने में कठिनाई होती है।  शोध और नैदानिक अवलोकन मधुमेह और फ्रोजन शोल्डर के बीच एक मजबूत संबंध दर्शाते हैं, जिसमें मधुमेह रोगियों को इस स्थिति के विकसित होने की अधिक संभावना होती है। 


डायबिटीज वाले लोगों में 'फ्रोजन शोल्डर'कितना आम है?

जिन लोगों को डायबिटीज होती है, उनमें डायबिटीज न होने वाले लोगों की तुलना में 'एडहेसिव कैप्सुलिटिस' (फ्रोजन शोल्डर) होने का खतरा काफी अधिक होता है। जिन लोगों को लंबे समय से डायबिटीज है, जिन लोगों का ब्लड शुगर लेवल ठीक से कंट्रोल में नहीं रहता है, 40 से 60 साल की उम्र के वयस्कों में यह समस्या अधिक देखी जाती है।  टाइप 1 और टाइप 2, दोनों तरह की डायबिटीज में फ्रोजन शोल्डर होने का खतरा बढ़ सकता है।
 

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फ्रोजन शोल्डर के लक्षण 

डायबिटीज से जुड़े कंधे के दर्द के लक्षण, उन लोगों के लक्षणों जैसे ही होते हैं जिन्हें डायबिटीज नहीं है। हालांकि, डायबिटीज के कारण ऊतकों (tissues) के ठीक होने की प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है, जिससे रिकवरी में अधिक समय लग सकता है। फ्रोजन शोल्डर के सामान्य लक्षणों में शामिल हैं: कंधे में दर्द, दर्द अक्सर सबसे शुरुआती लक्षणों में से एक होता है। यह शुरुआत में हल्का हो सकता है और धीरे-धीरे तेज हो सकता है, खासकर कंधे को हिलाते-डुलाते समय। कई मरीजों को अपना हाथ ऊपर उठाने या सिर के ऊपर कोई काम करने में काफी परेशानी होती है। कंधे में धीरे-धीरे बढ़ती जकड़न, फ्रोजन शोल्डर की मुख्य पहचान है। मरीज महसूस कर सकते हैं कि समय के साथ उनके कंधे की हलचल सीमित होती जा रही है। कपड़े पहनना, पीठ के पीछे हाथ ले जाना या बाल संवारने जैसे आसान काम भी मुश्किल हो सकते हैं। जैसे-जैसे समस्या बढ़ती है, कंधे की हलचल सीमित हो जाती है। मरीजों को हाथ घुमाने में दिक्कत हो सकती है और उन्हें ऐसा लग सकता है कि उनका कंधा 'लॉक' (जाम) हो गया है।


फ्रोजन शोल्डर और डायबिटीज के लिए इलाज के विकल्प

डायबिटीज और फ्रोजन शोल्डर के इलाज का मुख्य उद्देश्य दर्द कम करना, शरीर की गतिशीलता (mobility) को बेहतर बनाना और कंधे की कार्यक्षमता को बहाल करना है। डायबिटीज के मरीजों में फ्रोज़न शोल्डर के लिए फिजियोथेरेपी सबसे महत्वपूर्ण उपचारों में से एक है। नियमित व्यायाम से जकड़न कम होती है और धीरे-धीरे कंधे की हलचल में सुधार आता है। हालांकि, ये व्यायाम सही मार्गदर्शन में ही किए जाने चाहिए, क्योंकि ज्यादा जोर लगाने से दर्द और सूजन बढ़ सकती है। डायबिटीज को सही ढंग से नियंत्रित करना रिकवरी का एक अहम हिस्सा है। फ्रोज़न शोल्डर का इलाज कराते समय भी मरीजों को अपने डायबिटीज मैनेजमेंट प्लान का पालन करते रहना चाहिए।

 

डायबिटीज के मरीजों में फ्रोज़न शोल्डर के लिए सर्जरी

डायबिटीज के ज्यादातर मरीजों में बिना सर्जरी के ही सुधार आ जाता है। हालांकि, अगर सही इलाज के बावजूद जकड़न और दर्द बना रहता है, तो सर्जरी पर विचार किया जा सकता है। आर्थ्रोस्कोपिक कैप्सुलर रिलीज (arthroscopic capsular release) जैसी प्रक्रियाओं से जोड़ के आसपास के सख्त ऊतकों को ढीला करके कंधे की गतिशीलता में सुधार लाया जा सकता है।सर्जरी के बाद भी फिजियोथेरेपी बहुत जरूरी है, ताकि कंधे की गतिशीलता बनी रहे और जकड़न वापस न आए। हालांकि डायबिटीज होने से हमेशा फ्रोज़न शोल्डर नहीं होता, लेकिन ब्लड शुगर को अच्छे से नियंत्रित रखने से इसका खतरा कम हो सकता है।


डायबिटीज के मरीजों को डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?

अगर डायबिटीज के मरीजों को नीचे दी गई समस्याएं महसूस हों, तो उन्हें ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ (हड्डी रोग विशेषज्ञ) से सलाह लेनी चाहिए:

-लगातार कंधे में दर्द रहना
-जकड़न का बढ़ना
-हाथ हिलाने में कठिनाई होना
-रोजमर्रा के काम करने में परेशानी होना
-कंधे में ऐसी तकलीफ होना जिससे नींद प्रभावित हो
 

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