नारी डेस्क: पीठ दर्द अब केवल उम्र से जुड़ी समस्या नहीं रह गई है। डेस्क पर लंबे समय तक बैठना, बहुत ज़्यादा कसरत करना और शारीरिक रूप से निष्क्रिय जीवनशैली रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है, यहां तक कि युवाओं में भी। हालांकि पीठ दर्द का हर मामला 'स्लिप्ड डिस्क' का संकेत नहीं होता, लेकिन लगातार होने वाली परेशानी को नजरअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए। आज के आर्टिकल में जानते हैं युवाओं में डिस्क से जुड़ी समस्याएं क्यों बढ़ रही है, किन चेतावनी संकेतों पर ध्यान देना चाहिए।
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पीठ दर्द के मामले बढ़ने के कारण
डॉक्टर समझाते हैं- "फिटनेस को प्राथमिकता दिए जाने के कारण, टेनिस, पिकलबॉल, दौड़ने और भारी वजन उठाने (वेट ट्रेनिंग) जैसी गतिविधियां काफी लोकप्रिय हो रही हैं। हालांकि समग्र स्वास्थ्य के लिए नियमित व्यायाम जरूरी है, लेकिन बहुत ज्यादा ट्रेनिंग, बार-बार एक ही तरह का दबाव पड़ना और शरीर को पर्याप्त रिकवरी न मिलने से रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त तनाव पड़ सकता है। स्लिप्ड डिस्क की समस्या केवल उम्र से जुड़ी नहीं है। कम उम्र के लोगों में भी डिस्क डिजनरेशन (डिस्क का खराब होना) और उससे जुड़ा पीठ दर्द हो सकता है। व्यायाम की आदतों में बदलाव, लंबे समय तक बैठे रहना, गलत तरीके से बैठना या खड़े होना (खराब पोस्चर) और पर्याप्त रिकवरी न मिल पाना - ये सभी रीढ़ की हड्डी पर तनाव का कारण बन सकते हैं।
पीठ दर्द से बचने का उपाय
डॉक्टर समझाते हैं- अपनी शारीरिक सीमाओं से आगे बढ़ना, अत्यधिक वजन उठाना या गलत तकनीक का प्रयोग करना चोट के जोखिम को बढ़ा सकता है। तीव्रता में धीरे-धीरे वृद्धि, सही मुद्रा और पर्याप्त विश्राम रीढ़ की हड्डी के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। लंबे समय तक बैठे रहना और शारीरिक निष्क्रियता पीठ दर्द का कारण बन सकती है, विशेष रूप से उन लोगों में जिन्हें पहले से ही रीढ़ की हड्डी से संबंधित समस्याएं हैं। आरामदायक कार्यस्थल बनाए रखना, नियमित रूप से स्थिति बदलना और दिन भर में छोटे-छोटे विश्राम करना असुविधा को कम करने में मदद कर सकता है। संतुलित आहार सामान्य स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है, हालांकि डिस्क का क्षरण उम्र, आनुवंशिकी और यांत्रिक तनाव से भी प्रभावित होता है।
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सर्जरी की कब पड़ती है जरूरत?
स्लिप डिस्क का मतलब यह नहीं है कि सर्जरी जरूरी है। कई मरीज़ उचित दवा, फिजियोथेरेपी और लक्षणों को बढ़ाने वाली गतिविधियों में बदलाव जैसे गैर-सर्जिकल उपचार से ठीक हो जाते हैं। सर्जरी पर तब विचार किया जा सकता है जब पर्याप्त अवधि (आमतौर पर लगभग छह से बारह सप्ताह) तक गैर-सर्जिकल देखभाल के बावजूद महत्वपूर्ण लक्षण बने रहें और नैदानिक निष्कर्ष और इमेजिंग निर्णय का समर्थन करें। हालांकि, मूत्राशय या आंत्र की नई शिथिलता, कमर या कूल्हे के आसपास सुन्नता, या तेजी से बढ़ती पैरों की कमजोरी के लिए तत्काल चिकित्सा मूल्यांकन की आवश्यकता होती है।
नोट: यह लेख सिर्फ़ जानकारी देने के मकसद से है । किसी भी बीमारी का खुद से इलाज करने से बेहतर पेशेवर मेडिकल सलाह का विकल्प लें।