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तन, मन और आत्मा की ताकत: स्तन कैंसर से उबरने के लिए जरूरी कदम

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 18 Oct, 2025 02:18 PM
तन, मन और आत्मा की ताकत: स्तन कैंसर से उबरने के लिए जरूरी कदम

नारी डेस्क:  जब कोई आपको बताता है कि आपको ब्रेस्ट कैंसर है, तो ऐसा लगता है जैसे आपकी दुनिया ही थम गई हो। डरना, उलझन में होना या गुस्सा महसूस करना पूरी तरह से सामान्य है। लेकिन गहरी सांस लें और याद रखें कि आप अकेले नहीं हैं। भारत में हर साल लगभग 1,92,000 महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर होता है, जैसा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने बताया है। अच्छी खबर यह है कि अगर समय पर पता चल जाए तो ब्रेस्ट कैंसर सबसे ज्यादा इलाज होने वाली बीमारी है।

पहला कदम: बीमारी को समझना

डायग्नोसिस के बाद सबसे जरूरी होता है कि आप अपने कैंसर की स्थिति को समझें। डॉक्टर से ये सवाल जरूर पूछें: कैंसर किस स्टेज में है? सबसे अच्छा इलाज कौन सा होगा? इलाज के दौरान किन दुष्प्रभावों का सामना करना पड़ सकता है? अपने डॉक्टर से भरोसेमंद जानकारी लेना आपकी चिंता को कम करेगा और आपको नियंत्रण में महसूस कराएगा। इंटरनेट पर अनियंत्रित जानकारी न लें क्योंकि हर केस अलग होता है, और डॉक्टर ही सबसे भरोसेमंद मार्गदर्शक होते हैं।

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दूसरा कदम: इलाज की योजना पर चर्चा करें

आपके इलाज की योजना पूरी तरह से आपकी स्थिति के अनुसार तय की जाएगी। इसमें सर्जरी, केमोथेरेपी, रेडिएशन या हार्मोन थेरेपी शामिल हो सकती है, या इनका मिश्रण भी हो सकता है। यह जानना जरूरी है कि इलाज कैसे काम करता है और इससे आपको शारीरिक और मानसिक रूप से कैसा महसूस हो सकता है। कुछ दिन कठिन हो सकते हैं, इसलिए अपने मानसिक स्वास्थ्य का भी ध्यान रखें। डर, उदासी या निराशा महसूस होना स्वाभाविक है, लेकिन इन्हें महसूस करने की भी अनुमति दें। काउंसलर से बात करें, सपोर्ट ग्रुप से जुड़ें या अपने परिवार और दोस्तों से अपनी भावनाएं साझा करें। याद रखें, आप एक बहादुर ब्रेस्ट कैंसर योद्धा हैं।

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तीसरा कदम: अपने शरीर का ख्याल रखें

इलाज और रिकवरी के दौरान स्वस्थ भोजन करें  फल, सब्जियां और प्रोटीन से भरपूर आहार लें। जब भी संभव हो हल्की-फुल्की एक्टिविटी करें और पर्याप्त आराम भी करें। मेडिटेशन या सांस लेने के व्यायाम आपकी मानसिक शांति के लिए मददगार हो सकते हैं। छोटे-छोटे कदम आपकी रोज़मर्रा की जिंदगी में बड़ा फर्क ला सकते हैं।

चौथा कदम: मदद मांगने से हिचकिचाएं नहीं

अपने प्रियजनों से मदद लेने में कोई हिचक न करें। वे आपके लिए खाना बना सकते हैं, डॉक्टर के अपॉइंटमेंट पर साथ जा सकते हैं या बस आपके साथ बैठकर आपकी भावनात्मक भार को साझा कर सकते हैं। मुश्किल समय में सहारा सबसे बड़ी दवा होती है।

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 यह अंत नहीं, एक नई शुरुआत है

ब्रेस्ट कैंसर का पता लगना कहानी का अंत नहीं, बल्कि बहादुरी, ठीक होने और आशा की शुरुआत है। सही देखभाल, समर्थन और सकारात्मक सोच से आपका रिकवरी का सफर सफल हो सकता है।

डॉ. हकीम अंसार (कंसल्टेंट मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट), फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, अमृतसर
 

  

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