02 OCTFRIDAY2026 11:48:48 PM
Nari

नहीं रहीं मशहूर एक्ट्रेस, 71 की उम्र में कैंसर से लंबी जंग के बाद हुआ निधन

  • Edited By Monika,
  • Updated: 21 Sep, 2026 03:13 PM
नहीं रहीं मशहूर एक्ट्रेस, 71 की उम्र में कैंसर से लंबी जंग के बाद हुआ निधन

नारी डेस्क : बंगाली सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री मिथु मुखर्जी का 71 साल की उम्र में निधन हो गया। अभिनेत्री ने 21 सितंबर 2026 को मुंबई के एक निजी अस्पताल में आखिरी सांस ली। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह करीब एक साल से कैंसर से जूझ रही थीं। 1970 और 1980 के दशक में बंगाली सिनेमा की चर्चित अभिनेत्रियों में शामिल रहीं मिथु ने बंगाली के साथ हिंदी फिल्मों में भी काम किया था। अपने दौर में उन्हें उनकी खूबसूरती और स्क्रीन प्रेजेंस के चलते ‘टॉलीवुड की रेखा’ भी कहा जाता था।

लंबे समय से लाइमलाइट से दूर थीं मिथु

मिथु मुखर्जी अपने करियर के बाद के वर्षों में फिल्मी दुनिया और सार्वजनिक जीवन से काफी दूर हो गई थीं। वह बेहद निजी जिंदगी जीती थीं और लंबे समय से सार्वजनिक कार्यक्रमों में नजर नहीं आई थीं। बीमारी के दौरान भी उनकी निजी जिंदगी को लेकर ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई। उनके निधन की खबर सामने आते ही बंगाली फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर है। अभिनेत्री ने अपने करियर में उस दौर के कई बड़े कलाकारों के साथ काम किया था और बंगाली सिनेमा में अपनी खास पहचान बनाई थी।

‘शेष पर्व’ से शुरू हुआ था फिल्मी सफर

मिथु मुखर्जी ने साल 1972 में चित्त बोस की फिल्म ‘शेष पर्व’ से अभिनय की दुनिया में कदम रखा था। इसके बाद दिनेन गुप्ता की फिल्म ‘मरजीना अब्दुल्ला’ में मुख्य भूमिका निभाकर उन्हें बड़ी पहचान मिली। इसके बाद उन्होंने ‘निशिकन्या’, ‘मौचाक’, ‘स्वयंसिद्धा’, ‘होटल स्नो फॉक्स’, ‘भाग्यचक्र’ और ‘संधि’ जैसी फिल्मों में काम किया। उनकी अदाकारी और अलग स्क्रीन प्रेजेंस ने उन्हें बंगाली सिनेमा की चर्चित अभिनेत्रियों में शामिल कर दिया।

यें भी पढ़ें : सोते समय अचानक शरीर में लगते हैं झटके, जानिए क्यों होता है Hypnic Jerk

हिंदी फिल्मों में भी किया काम

मिथु मुखर्जी ने बंगाली फिल्मों के अलावा हिंदी सिनेमा में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। उन्होंने ‘खान दोस्त’ में काम किया और इसके बाद बासु चटर्जी की ‘सफेद झूठ’ में भी नजर आईं। उनकी हिंदी फिल्मों में ‘दिललगी’ और ‘दो लड़के दोनों कड़के’ भी शामिल हैं। हालांकि उनके करियर का बड़ा हिस्सा बंगाली सिनेमा में रहा, लेकिन हिंदी फिल्मों में काम करने के कारण उन्हें दूसरे हिस्सों के दर्शकों के बीच भी पहचान मिली।

1990 में आखिरी बार पर्दे पर आई थीं

मिथु मुखर्जी ने कुछ समय फिल्मों से दूरी बनाने के बाद 1990 में चंद्र बरोट की ‘आश्रिता’ से पर्दे पर वापसी की थी। यह उनकी आखिरी फिल्मों में रही। इसके बाद उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री से दूरी बना ली और अपनी निजी जिंदगी को प्राथमिकता दी।

यें भी पढ़ें : अर्चना पूरन सिंह को हुई लाइलाज बीमारी, रोते हुए बेटे ने बयां किया मां का दर्द

प्रोसेनजीत चटर्जी ने दी श्रद्धांजलि

मिथु मुखर्जी के निधन की खबर के बाद अभिनेता प्रोसेनजीत चटर्जी ने भी सोशल मीडिया पर दुख जताया और अभिनेत्री को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने मिथु की यादों और उनके काम को याद करते हुए शोक व्यक्त किया। मिथु मुखर्जी ने भले ही अपने करियर के बाद के दौर में फिल्मों से दूरी बना ली थी, लेकिन 1970 और 1980 के दशक में उनका काम बंगाली सिनेमा के एक खास दौर की याद दिलाता है। उनके निधन के साथ उस दौर की एक चर्चित अभिनेत्री का सफर हमेशा के लिए थम गया।

Related News