नारी डेस्क: गर्मी की छुट्टियां खत्म होते-होते अक्सर लोग एक नई परेशानी लेकर घर लौटते हैं और वह है जिद्दी टैनिंग। लंबे समय तक धूप में रहने के कारण चेहरे, गर्दन, हाथ और पैरों की त्वचा का रंग गहरा पड़ जाता है। ऐसे में ज्यादातर लोग इंटरनेट या सोशल मीडिया पर बताए जाने वाले घरेलू नुस्खे आजमाने लगते हैं, लेकिन त्वचा विशेषज्ञों की मानें तो ऐसा करना कई बार फायदे की बजाय नुकसान पहुंचा सकता है। डर्मेटोलॉजिस्ट के अनुसार टैनिंग हटाने के लिए हमेशा वैज्ञानिक और सुरक्षित तरीकों का ही सहारा लेना चाहिए, क्योंकि गलत उपाय त्वचा में जलन, एलर्जी और इंफ्लेमेशन जैसी समस्याएं पैदा कर सकते हैं।
आखिर धूप में त्वचा टैन क्यों हो जाती है
टैनिंग कोई बीमारी नहीं बल्कि त्वचा का प्राकृतिक सुरक्षा तंत्र है। जब सूरज की अल्ट्रावायलेट (यूवी) किरणें त्वचा पर पड़ती हैं, तो त्वचा में मौजूद मेलानोसाइट्स नामक कोशिकाएं अधिक मात्रा में मेलानिन बनाने लगती हैं। यही मेलानिन त्वचा को रंग देता है और यूवी किरणों से त्वचा की अंदरूनी परतों को नुकसान से बचाने का काम करता है। यानी टैनिंग इस बात का संकेत है कि आपकी त्वचा ने खुद को धूप से बचाने की कोशिश की है।

टैनिंग और पिग्मेंटेशन एक जैसी नहीं होती
अक्सर लोग टैनिंग और पिग्मेंटेशन को एक ही समस्या समझ लेते हैं, जबकि दोनों अलग-अलग स्थितियां हैं। टैनिंग केवल धूप के संपर्क में आने से त्वचा की ऊपरी परत पर होती है और समय के साथ धीरे-धीरे कम भी हो सकती है। वहीं पिग्मेंटेशन त्वचा की गहरी परतों से जुड़ी समस्या होती है, जिसके पीछे हार्मोनल बदलाव, सूजन, दवाइयां या अन्य चिकित्सीय कारण हो सकते हैं। इसका इलाज लंबा चलता है और डॉक्टर की निगरानी में ही किया जाना चाहिए।
क्या टैनिंग पूरी तरह हटाई जा सकती है
विशेषज्ञों के अनुसार टैनिंग हटाई जा सकती है, लेकिन इसके लिए धैर्य जरूरी है। यह उम्मीद करना सही नहीं कि एक ही दिन या एक ही ट्रीटमेंट में त्वचा पहले जैसी हो जाएगी। टैनिंग कितनी जल्दी कम होगी, यह इस बात पर निर्भर करता है कि धूप में कितना समय बिताया गया, त्वचा का प्रकार क्या है, टैनिंग कितनी गहरी है और आगे धूप से बचाव कितना किया जा रहा है।
अच्छी बात यह है कि हमारी त्वचा लगातार नई कोशिकाएं बनाती रहती है। यदि कुछ समय तक तेज धूप से बचा जाए और सही स्किन केयर अपनाई जाए, तो हल्की टैनिंग अपने आप भी धीरे-धीरे कम होने लगती है।
चेहरे और शरीर की टैनिंग में होता है अंतर
चेहरे की त्वचा शरीर के अन्य हिस्सों की तुलना में अधिक पतली और संवेदनशील होती है। इसलिए चेहरे की टैनिंग हटाने के लिए हल्के और सुरक्षित उत्पादों का इस्तेमाल किया जाता है। वहीं गर्दन, कोहनी, घुटने और पैरों जैसी जगहों की त्वचा अपेक्षाकृत मोटी होती है, जहां जरूरत पड़ने पर नियंत्रित एक्सफोलिएशन किया जा सकता है।

टैनिंग से बचने के लिए क्या करें
टैनिंग से बचाव ही सबसे बेहतर उपाय माना जाता है। इसके लिए रोजाना कम से कम SPF 30 या उससे अधिक वाला ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन लगाएं और हर दो से तीन घंटे में दोबारा लगाना न भूलें, खासकर यदि आप बाहर हैं।
इसके अलावा धूप में निकलते समय चौड़ी टोपी, सनग्लास और पूरी आस्तीन वाले कपड़े पहनें। सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच तेज धूप में लंबे समय तक रहने से बचें। साथ ही पर्याप्त पानी पीकर शरीर को हाइड्रेट रखें और त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षा परत (स्किन बैरियर) को मजबूत बनाए रखने के लिए नियमित मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल करें।
डर्मेटोलॉजिस्ट किन उपायों की सलाह देते हैं?
विटामिन C सीरम
विटामिन C एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है, जो धूप से हुए ऑक्सिडेटिव डैमेज को कम करने में मदद करता है। नियमित उपयोग से त्वचा की रंगत में सुधार आता है और टैनिंग धीरे-धीरे हल्की पड़ने लगती है।
नियासिनेमाइड
नियासिनेमाइड त्वचा की रंगत को समान बनाने में मदद करता है। यह स्किन बैरियर को मजबूत करता है, सूजन कम करता है और त्वचा की मरम्मत की प्रक्रिया को बेहतर बनाता है।
केमिकल पील
यदि टैनिंग अधिक गहरी हो गई है, तो डर्मेटोलॉजिस्ट की देखरेख में केमिकल पील कराया जा सकता है। इसमें विशेष प्रकार के एसिड का इस्तेमाल कर त्वचा की मृत कोशिकाओं को हटाया जाता है, जिससे नई और साफ त्वचा सामने आती है।
प्रोफेशनल मैनिक्योर और पेडिक्योर
हाथों और पैरों की टैनिंग हटाने के लिए मेडिकल-ग्रेड मैनिक्योर और पेडिक्योर भी उपयोगी हो सकते हैं। इनमें ऐसे उत्पादों का इस्तेमाल किया जाता है जो त्वचा को नुकसान पहुंचाए बिना टैनिंग कम करने में मदद करते हैं।
लेजर ट्रीटमेंट
यदि किसी हिस्से पर टैनिंग या यूवी किरणों के कारण बने दाग लंबे समय तक बने रहें और अन्य उपायों से सुधार न हो, तो विशेषज्ञ लेजर ट्रीटमेंट की सलाह दे सकते हैं। यह प्रक्रिया केवल प्रशिक्षित डर्मेटोलॉजिस्ट की निगरानी में ही करानी चाहिए।
इन घरेलू नुस्खों से करें परहेज
नींबू का रस
कई लोग टैनिंग हटाने के लिए सीधे त्वचा पर नींबू का रस लगा लेते हैं, लेकिन इससे जलन, खुजली और त्वचा में सूजन हो सकती है। धूप के संपर्क में आने पर यह फाइटोफोटोडर्मेटाइटिस जैसी समस्या का कारण भी बन सकता है।
बेकिंग सोडा स्क्रब
बेकिंग सोडा त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षा परत को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके अधिक इस्तेमाल से त्वचा रूखी, संवेदनशील और लाल हो सकती है।

टूथपेस्ट
टूथपेस्ट दांतों के लिए बनाया गया है, त्वचा के लिए नहीं। इसे चेहरे या शरीर पर लगाने से एलर्जी, खुजली और जलन की शिकायत हो सकती है।
सिरका
बिना पानी मिलाए सिरका सीधे त्वचा पर लगाने से केमिकल बर्न, लालिमा और जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
जोर-जोर से स्क्रब करना
अत्यधिक स्क्रबिंग करने से त्वचा की ऊपरी परत क्षतिग्रस्त हो सकती है। इससे इंफ्लेमेशन बढ़ता है और बाद में हाइपरपिग्मेंटेशन का खतरा भी बढ़ सकता है।
घरेलू प्रयोगों से हो सकते हैं ये नुकसान
बिना विशेषज्ञ की सलाह के किए गए घरेलू प्रयोगों से त्वचा में जलन, लालिमा, रूखापन, एलर्जिक रिएक्शन, स्किन बैरियर को नुकसान, हाइपरपिग्मेंटेशन और संवेदनशीलता जैसी समस्याएं हो सकती हैं। यदि किसी घरेलू उपाय के बाद त्वचा में असामान्य बदलाव दिखाई दें, तो तुरंत डर्मेटोलॉजिस्ट से संपर्क करें।