
नारी डेस्क: सोना- चांदी के बाद अब चीनी भी खून के आंसू रूलाने जा रही है। भारत में चीनी के दाम पिछले कुछ महीनों से तेजी से बढ़ रहे हैं। केवल इसी महीने चीनी की क़ीमतों में 20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। खुदरा बाजारों में चीनी की कीमतें बढ़कर 65 प्रति किलो तक पहुंच गई हैं। एक महीने पहले चीनी की क़ीमत 48.18 रुपये प्रति किलोग्राम थी। जानकारों का कहना है कि चीनी के दाम इससे पहले कभी इतने ऊंचे नहीं गए, अब त्योहारी सीजन में अचानक बढ़े दामों ने आम आदमी की चिंता बढ़ा दी है।
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त्योहारों के मौसम में बढ़ती है चीनी की डिमांड
भारत का चीनी बाज़ार एक अजीब संकट में फंसा हुआ है। देश के खेतों में काफ़ी गन्ना है, इथेनॉल के बड़े प्रोग्राम के लिए सैकड़ों डिस्टिलरी बनी हुई हैं, और सरकार ने घरेलू सप्लाई बनाए रखने के लिए एक्सपोर्ट पर रोक भी लगा रखी है। फिर भी चीनी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रही हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस संकट की मुख्य वजह इथेनॉल बनाने के लिए गन्ने का इस्तेमाल है। चीनी की कीमत बढ़ने का समय इससे ज़्यादा मुश्किल नहीं हो सकता था। भारत का त्योहारों का मौसम, जब मिठाइयों और प्रोसेस्ड खाने की चीज़ों की मांग तेज़ी से बढ़ती है।
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अचनक से दामों में आया उछाल
कुछ बाज़ारों में कीमतों में तेज़ी से उछाल आया है। पंजाब में चीनी की खुदरा कीमत लगभग 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है, जबकि मुंबई, भोपाल और दूसरे बाज़ारों के कुछ हिस्सों में कीमतें 58-63 रुपये प्रति किलो के आसपास पहुंच गई हैं। गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहार आने वाले हैं, इसलिए सरकार यह पक्का करने की कोशिश कर रही है कि चीनी की कमी त्योहारों के मौसम में महंगाई की समस्या न बन जाए। जानकार चेतावनी दे रहे हैं कि ऐसा संतुलन बनाए रखने की ज़रूरत है जिससे इथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल प्रोग्राम की वजह से खाने-पीने की चीज़ों की कीमतों पर बुरा असर न पड़े, जैसा कि चीनी के मामले में हो रहा है।