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Nari

आपने मुझे पहचान लिया, मैं ही हूं Kasab... AnjaliKulthe ने कहा- वो रात में कभी नहीं भूल सकती

  • Edited By Vandana,
  • Updated: 11 Jun, 2026 05:12 PM

नारी डेस्क:  26/11 वो रात जब पूरी मुंबई गोलियों की आवाज से दहल रही थी, उसी तड़तड़ाहट में दबीं थी गर्भवतियों की चीखें...लेकिन इन चीखों में एक साधाराण सी सफेद वर्दी में एक बहादुर नर्स भी शामिल थी जो उन गर्भवतियों की सांसें संभाल रही थीं। कंगना रानौत अपनी अपकमिंग मूवी भारत भाग्य विधाता में जिस बहादुर नर्स का किरदार निभा रही है, उनका नाम है अंजलि कुलथे (Anjali Kulthe) जो गोलियों की बौछार में खामोशी से जिंदगियां बचा लाई थी।

26/11 की खौफनाक रात और कामा अस्पताल में मचा हड़कंप

उस रात नर्स अंजलि मुंबई के कामा अस्पताल में ड्यूटी पर थीं, उनकी देखरेख में 20 गर्भवती महिलाएं थीं। शांत माहौल एकदम से चीखों और गोली की आवाजों में बदल गया। बाहर आतंक था लेकिन अंदर उम्मीद। दीवार फांदकर दो लड़के आए जिनके हाथों में हथियार थे... एक ने गोली चलाई, नर्स की सहकर्मी जाधव की साड़ी रक्त से लाल हो गई अंजलि उसे खींचकर अंदर लाई लेकिन कुछ ही मिनटों में वह दम तोड़ गई। अंजलि ने हौंसला बांधा और प्रसूति वार्ड में पहुंची जहां कुछ महिलाओं की डिलीवरी बस होने वाली थी और कुछ नवजातों के साथ लेटी थीं। एक पल जाया ना करते हए उन्होंने लोहे का भारी-भरकम दरवाजा बंद किया फिर धीरे से सबको पेंट्री के सबसे अंदर वाले छोटे-से कमरे में ले गई।

सहकर्मी की मौत के बाद भी नहीं टूटा हौसला

गर्भवतियां डर के मारे कांप रही थी, अचानक एक महिला को प्रसव पीड़ा शुरू हुई, चेहरा पीला पड़ गया, ब्लड प्रेशर बढ़ गया लेकिन अंजलि ने उसका हाथ थामा और कहा, 'डर मत... मैं ले जा रही हूं। बस मेरे साथ चल।' बाहर गोलियों की आवाज के बीच धीरे-धीरे अंजलि ने उस महिला को कंधे पर हाथ रखकर लेबर रूम तक पहुंचाया। उस दौरान गोलीबारी थी तो डाक्टर नहीं आ पा रही थी लेकिन अंजलि ने अकेले ही डिलीवरी करवाई बिना एक चीख और रोने की आवाज के।

मौत के साए में गूंजी नवजात की पहली किलकारी

उस समय मौत के तांडव के बीच बच्चे की किलकारी गूंजी...अंजलि की आंखों में आंसू आ गए। पूरी रात ऐसे ही रहे और सुबह 6 बजे जब पुलिस ने दरवाजा खटखटाया तो सबने राहत की सांस ली। बाद में जब उनसे पूछा गया कि आपको डर नहीं लगा? तो अंजलि दीदी ने सिर्फ इतना कहा- 'मैं नर्स हूं। मेरी वर्दी में बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है। और उस रात मेरे वार्ड में 20 मांएं थीं। मैं किसी मां को आतंकवादियों के हाथों अपने बच्चे की बलि नहीं चढ़ने देना चाहती थी। पूरी रात अंजलि महिलाओं के बीच बैठी रहीं। सबको हिम्मत बंधाती रहीं। सुबह जब पुलिस ने दरवाजा खटखटाया और बोला - 'सब सुरक्षित हैं, दरवाजा खोलिए', तब अंजलि और सबने राहत की सांस ली। 20 गर्भवती महिलाएं, 20 नवजात शिशु (जिनमें से एक उस रात पैदा हुआ) सब जिंदा।

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Madam आपने मुझे पहचान लिया

अदालत में साल 2010 में अजमल कसाब को पेश किया गया। अंजलि को गवाही के लिए बुलाया गया लेकिन परिवार डर के चलते राजी नहीं था क्योंकि   जान का खतरा था लेकिन अंजलि वर्दी पहनकर पहुंचीं। कसाब, उन्हें देखकर मुस्कुराया और कहा, 'मैडम, आपने मुझे पहचान लिया ना? मैं अजमल कसाब हूं।' अंजलि ने शांत स्वर में जवाब दिया- 'हां, मैंने पहचान लिया और उस रात तुमने जो किया, वो भी मैं कभी नहीं भूलूंगी।'

अंजलि कहती हैं कि इतने सालों बाद भी जब उस रात को याद करती हैं तो उनकी आवाज भर्रा जाती है। कई दिन उन्हें नींद नहीं आई। वो चीखें आज भी कानों में गूंजती हैं लेकिन साथ ही उस बच्चे की पहली किलकारी भी याद आती है...जो मैंने उस रात बचाई थी।'

उनकी बहादुरी के लिए उन्हें राष्ट्रपति वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया। ऐसी वीरांगना को सलाम जिसने अपने कर्तव्य को अपनी जान के ऊपर रखा।
 

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