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घुटनों की ग्रीस खत्म हो गई या जिद्दी दर्द तो ये काम करें, मिल जाएगा आराम

  • Edited By Vandana,
  • Updated: 25 Aug, 2026 09:23 PM
घुटनों की ग्रीस खत्म हो गई या जिद्दी दर्द तो ये काम करें, मिल जाएगा आराम

नारी डेस्कः घुटनों का दर्द उम्र बढ़ने, ज्यादा वजन, चोट, गठिया, ऑस्टियोआर्थराइटिस या लंबे समय तक गलत तरीके से बैठने-खड़े रहने जैसी कई वजहों से हो सकता है। इसी के साथ घुटनों में ग्रीस खत्म होने, हल्के दर्द और जकड़न में कुछ घरेलू उपाय राहत दे सकते हैं, लेकिन लगातार या तेज दर्द में इसके कारण की जांच जरूरी है।

गर्म सिकाई करें

अगर घुटने में पुराना दर्द या जकड़न है, तो 15–20 मिनट तक गर्म सिकाई दिन में 2–3 बार की जा सकती है। इससे मांसपेशियों और जोड़ के आसपास की जकड़न कम करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, अगर घुटना हाल ही में चोट लगने के बाद सूज गया है, तो शुरुआती समय में ठंडी सिकाई ज्यादा उपयोगी हो सकती है।

सरसों के तेल से हल्की मालिश

हल्के गर्म सरसों के तेल से घुटने के आसपास बहुत हल्के हाथों से मालिश करने से आराम महसूस हो सकता है। मालिश को दर्द वाले जोड़ पर बहुत जोर से न करें। ध्यान रखें कि तेल की मालिश दर्द के मूल कारण का इलाज नहीं करती।
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 हल्दी को डाइट में शामिल करें

हल्दी में कर्क्यूमिन नामक यौगिक पाया जाता है, जिस पर सूजन और दर्द के संबंध में शोध हुआ है। खाने में सामान्य मात्रा में हल्दी लेना ठीक है, लेकिन हल्दी वाला दूध या हल्दी सप्लीमेंट घुटने के दर्द का पक्का इलाज नहीं माना जाना चाहिए।

हल्की एक्सरसाइज जरूरी है

घुटने के दर्द में पूरी तरह आराम करते रहना हमेशा सही नहीं होता। डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह से हल्की स्ट्रेचिंग, क्वाड्रिसेप्स मजबूत करने वाली एक्सरसाइज, तैराकी या हल्की वॉक मददगार हो सकती है। अगर किसी व्यायाम से दर्द बढ़ता है, तो उसे रोक दें।

वजन पर ध्यान दें

अगर वजन ज्यादा है, तो धीरे-धीरे वजन कम करना घुटनों पर पड़ने वाले दबाव को कम कर सकता है। डाइट में सब्जियां, फल, दालें, साबुत अनाज और पर्याप्त प्रोटीन शामिल करें और तला-भुना भोजन कम करें।

मेथी और अन्य नुस्खों में सावधानी

मेथी का पानी या मेथी को भोजन में शामिल करना सामान्य मात्रा में लिया जा सकता है, लेकिन मेथी का लेप, लहसुन, अजवाइन या किसी जड़ी-बूटी को घुटने पर लगाने से दर्द ठीक होने का मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। त्वचा पर लगाने से जलन या एलर्जी भी हो सकती है।

घुटने की “ग्रीस” बढ़ाने के लिए क्या खाएं?

घुटने की “ग्रीस” को मेडिकल भाषा में सिनोवियल फ्लूइड कहा जाता है। यह जोड़ को चिकनाई देने और हड्डियों के बीच घर्षण कम करने में मदद करता है। हालांकि, कोई एक खाद्य पदार्थ सीधे घुटने की ग्रीस को बढ़ाने का काम नहीं करता। सही पोषण कार्टिलेज, हड्डियों और जोड़ों के स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद कर सकता है।

डाइट में ये चीजें शामिल कर सकते हैं:

ओमेगा-3: अखरोट, अलसी, चिया सीड्स और फैटी फिश जैसे सैल्मन।
कैल्शियम और विटामिन D: दूध, दही, पनीर, रागी, तिल और जरूरत के अनुसार विटामिन D के स्रोत।
प्रोटीन: दाल, चना, राजमा, पनीर, अंडे और मछली—मांसपेशियों को मजबूत रखने के लिए।
फल और हरी सब्जियां: पालक, मेथी, ब्रोकोली, संतरा, अमरूद और अन्य रंगीन फल-सब्जियां।
हल्दी और अदरक: इन्हें सामान्य मात्रा में भोजन में शामिल किया जा सकता है।
पर्याप्त पानी: शरीर को हाइड्रेटेड रखना जरूरी है, हालांकि पानी पीने से सीधे “ग्रीस” बढ़ने का दावा सही नहीं है।
जरूरी बात: अगर घुटने में लगातार दर्द, सूजन, आवाज के साथ दर्द, जकड़न या चलने में परेशानी है, तो केवल खान-पान पर निर्भर न रहें। ऑस्टियोआर्थराइटिस या कार्टिलेज की समस्या में डॉक्टर/फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह और सही एक्सरसाइज भी जरूरी हो सकती है।

क्या आयुर्वेदिक दवाएं लेनी चाहिए?

आयुर्वेद में घुटने के दर्द के लिए अलग-अलग उपचार बताए जाते हैं, लेकिन किसी भी आयुर्वेदिक तेल, काढ़े या गोली को बिना विशेषज्ञ की सलाह के लंबे समय तक न लें। कुछ हर्बल उत्पाद दूसरी दवाओं के साथ प्रतिक्रिया कर सकते हैं या उनकी गुणवत्ता अलग-अलग हो सकती है।

कब तुरंत डॉक्टर को दिखाएं?

अगर घुटना अचानक बहुत सूज जाए, लाल या गर्म हो, तेज दर्द हो, चोट के बाद पैर पर वजन न डाल पाएं, बुखार के साथ घुटने में दर्द हो या घुटना लॉक हो जाए, तो घरेलू उपचार पर निर्भर न रहें। लगातार कई हफ्तों तक दर्द रहने पर भी ऑर्थोपेडिक डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से जांच कराना बेहतर है।

सबसे जरूरी बात यह है कि घरेलू और आयुर्वेदिक उपाय दर्द में अस्थायी राहत दे सकते हैं, लेकिन अगर कारण ऑस्टियोआर्थराइटिस, रूमेटाइड आर्थराइटिस, लिगामेंट/मेनिस्क की चोट या गाउट है, तो मूल समस्या का इलाज जरूरी है।

घुटनों के दर्द का रामबाण इलाज? इन उपायों से मिल सकती है राहत

घुटनों के दर्द का कोई एक “रामबाण इलाज” नहीं है, क्योंकि दर्द का कारण अलग-अलग हो सकता है। हल्के दर्द में गर्म सिकाई, वजन नियंत्रित रखना और नियमित हल्की एक्सरसाइज से राहत मिल सकती है।

अगर दर्द पुराना है, तो क्वाड्रिसेप्स मजबूत करने वाली एक्सरसाइज और फिजियोथेरेपी काफी मददगार हो सकती है। सरसों के तेल से हल्की मालिश या हल्दी को डाइट में शामिल करना सहायक हो सकता है, लेकिन इन्हें बीमारी का पक्का इलाज नहीं मानना चाहिए।

अगर घुटने में लगातार दर्द, सूजन, गर्माहट, चलने में परेशानी या चोट के बाद तेज दर्द है, तो ऑर्थोपेडिक डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। सही कारण पता चलने के बाद ही सबसे प्रभावी इलाज तय किया जा सकता है।

 

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