नारी डेस्क: सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) की एक टीम ने गुरुवार को रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह के भोपाल स्थित घर का 3D स्कैन किया। यह स्कैन उनकी बहू ट्विशा शर्मा की मौत की जाच के तहत किया गया। CBI की टी जिसके साथ भारी पुलिस बल था, सुबह करीब 10:30 बजे कटारा हिल्स स्थित गिरिबाला सिंह के घर पहुंची। स्थानीय पुलिस ने इलाके की बैरिकेडिंग कर दी और इस कार्रवाई के दौरान आम लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी। यह कार्रवाई मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा इस मामले में गिरिबाला सिंह को दी गई अग्रिम ज़मानत रद्द किए जाने के एक दिन बाद हुई। अभिनेत्री ट्विशा शर्मा 12 मई को अपने ससुराल में मृत पाई गई थीं।
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गिरिबाला सिंह की जमानत का आदेश हुआ रद्द
इस घटना के तुरंत बाद गिरिबाला सिंह ने भोपाल की एक सत्र अदालत में गिरफ़्तारी से पहले ज़मानत (प्री-अरेस्ट बेल) के लिए अर्ज़ी दी थी, जिसे 15 मई को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने मंज़ूर कर लिया था। बुधवार को जारी किए गए 17 पन्नों के एक आदेश में, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अग्रिम जमानत के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) उन जरूरी तथ्यों और सबूतों की ठीक से जांंच करने में नाकाम रही, जो उसके सामने पेश किए गए थे। वेकेशन जज देवनारायण मिश्रा ने कहा कि WhatsApp चैट और ट्विशा के परिवार वालों के बयानों से यह पता चलता है कि आरोप सिर्फ़ ट्विशा के पति, समर्थ सिंह तक ही सीमित नहीं थे। कोर्ट ने यह भी कहा कि गिरिबाला सिंह को राहत देते समय कई अहम पहलुओं को नज़रअंदाज़ किया गया था।
गिरिबाला सिंह के खिलाफ कई अरोप
हाई कोर्ट ने कहा कि उनके ख़िलाफ़ लगे आरोपों की भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 80(2), 85 और 3(5) के तहत, साथ ही दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत और भी गहराई से जांच किए जाने की ज़रूरत है। कोर्ट ने ट्विशा के परिवार वालों द्वारा लगाए गए उन आरोपों का भी ज़िक्र किया, जिनमें कहा गया था कि गिरिबाला सिंह और उनके बेटे, समर्थ सिंह, दोनों ने मिलकर ट्विशा को दहेज के लिए कथित तौर पर परेशान किया और उस पर अपना गर्भ गिराने का दबाव डाला। हालांकि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत की वजह फांसी लगाना बताया गया था, लेकिन हाई कोर्ट ने पाया कि ट्विशा के शरीर पर छह-सात और चोटें भी मिली थीं, जिनमें उसके बाएं हाथ, उंगली और सिर पर लगी चोटें शामिल थीं।
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ट्विशा शर्मा के शरीर पर थी कई चोटें
कोर्ट ने पाया कि बाद में आई एक रिपोर्ट से यह साफ हो गया कि ये चोटें न तो फांसी के फंदे से शव को निकालते समय लगी थीं और न ही उसे अस्पताल ले जाते समय,इससे उसकी मौत के हालात को लेकर और भी सवाल खड़े हो गए हैं। सुनवाई के दौरान, ट्विशा के पिता की तरफ से पेश वकील ने दलील दी कि गिरिबाला सिंह, जो एक रिटायर्ड न्यायिक अधिकारी हैं और जिन्हें साइबर फोरेंसिक और क्राइम सीन मैनेजमेंट की ट्रेनिंग मिली हुई है, उन्होंने शायद अपनी इस विशेषज्ञता का इस्तेमाल करके क्राइम सीन के साथ छेड़छाड़ की हो।। हाई कोर्ट ने जिन मुख्य बिंदुओं पर विचार किया, उनमें यह शामिल है कि ट्विशा शर्मा के शरीर पर सात चोटें मिली थीं, जो इस मामले की गंभीरता को दर्शाती हैं। दूसरा, जांच टीम ने कई नोटिस जारी किए थे, लेकिन गिरिबाला सिंह की तरफ से ज़रूरी सहयोग नहीं मिला।" सूत्रों के मुताबिक, CBI जल्द ही गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार कर सकती है।