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थायरॉइड की बीमारी से भारतीय क्यों है ज्यादा परेशाना? समझिए इस बीमारी को इसके उपाय को

  • Edited By vasudha,
  • Updated: 31 Mar, 2026 02:44 PM
थायरॉइड की बीमारी से भारतीय क्यों है ज्यादा परेशाना? समझिए इस बीमारी को इसके उपाय को

नारी डेस्क:  थायरॉइड चेकअप में अक्सर एक उलझन वाली बात सामने आती है: TSH थोड़ा ज़्यादा, और T3 और T4 नॉर्मल। डॉक्टर इसे "बॉर्डरलाइन" कहते हैं। मरीज़ को ज़्यादातर ठीक ही महसूस होता है, ऐसे में वह रिपोर्ट को इग्नोर कर देते हैं।  भारत में थायरॉइड से जुड़ी बीमारियां इसी कारण गंभीर रूप ले लेती हैं। । 2014 में 'इंडियन जर्नल ऑफ़ एंडोक्राइनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज़्म' द्वारा किए गए एक  अध्ययन में पाया गया कि भारत में लगभग हर 10 में से 1 वयस्क को हाइपोथायरॉइडिज़्म है, और लगभग 8-9% लोगों को सबक्लिनिकल हाइपोथायरॉइडिज़्म है।

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अचानक नहीं बढ़ता थायरॉइड

2014 में भारत के कई शहरों में हुई एक स्टडी से पता चला कि 42 मिलियन से ज़्यादा भारतीय थायरॉइड से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे हो सकते हैं। थायरॉइड की बीमारी हार्ट अटैक की तरह अचानक और ज़ोरदार नहीं होती,  यह चुपचाप बढ़ती है। समय के साथ यह मूड, मेटाबॉलिज़्म, प्रजनन क्षमता और दिल की सेहत को बदल देती है। रिपोर्ट में नतीजे 'बॉर्डरलाइन' आने पर घबराने की ज़रूरत नहीं है। लेकिन, यह इस बात का संकेत ज़रूर है कि आपको इस पर ध्यान देना चाहिए। हर कुछ महीनों में एक आसान सा फ़ॉलो-अप टेस्ट करवाकर आप सालों की थकान, मेटाबॉलिज़्म से जुड़ी दिक्कतों और प्रजनन से जुड़ी समस्याओं से बच सकते हैं।


 भारत में थायरॉयड की समस्या इतनी आम क्यों है?

आयोडीन की कमी या असंतुलन:   पहले आयोडीन की कमी ज्यादा थी, अब प्रोसेस्ड फूड के कारण imbalance हो गया है।

खराब लाइफस्टाइल: देर से सोना, जंक फूड, एक्सरसाइज की कमी के कारण बढ़ती है ये बीमारी 

महिलाओं में ज्यादा असर:    हार्मोनल बदलाव (पीरियड्स, प्रेग्नेंसी, मेनोपॉज) के कारण महिलाओं में यह ज्यादा देखा जाता है।

तनाव (Stress):    लगातार तनाव हार्मोन को बिगाड़ देता है।

जेनेटिक कारण:   परिवार में किसी को है तो जोखिम बढ़ जाता है।

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बॉर्डरलाइन थायरॉयड रिपोर्ट क्या होती है?

जब आपका TSH टेस्ट नॉर्मल रेंज के किनारे पर होता है (ना पूरी तरह नॉर्मल, ना पूरी तरह बीमारी), उसे “borderline” कहते हैं।

सामान्य TSH रेंज: 0.4 – 4.0 mIU/L
 borderline: 4–10 (Hypothyroid की शुरुआत)


शुरुआत में इसके कोई खास लक्षण नहीं होते, हल्की थकान को लोग “नॉर्मल” समझ लेते हैं। अकसर लोग वजन बढ़ना/घटना को डाइट से जोड़ देते हैं, डॉक्टर की सलाह को गंभीरता से नहीं लेते। Unchecked रहने पर तेजी से वजन बढ़ना या घटना, बाल झड़ना, स्किन ड्राई होना, पीरियड्स अनियमित होना, प्रेग्नेंसी में दिक्कत, दिल की बीमारी का खतरा , डिप्रेशन और कमजोरी जैसी  समस्याएं हो सकती हैं


खतरे से बचने के लिए करें ये उपाय

हर 6 महीने में TSH टेस्ट करवाएं, डाइट में आयोडीन युक्त नमक, सेलेनियम (नट्स, खासकर ब्राजील नट्स), जिंक (बीज, दालें) ऐड करें।  रोज 30 मिनट वॉक/योग करें। 7–8 घंटे की नींद लें, तनाव कम करें। डॉक्टरों का कहना है कि borderline होने पर भी दवा या lifestyle therapy जरूरी हो सकती है।  बॉर्डरलाइन का मतलब सेफ नहीं होता, बल्कि यह एक warning signal है। सही समय पर ध्यान देने से बड़ी बीमारी बनने से बचा जा सकता है।
 

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