नारी डेस्क: क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि रात में 7 से 8 घंटे सोने के बाद भी सुबह उठते ही शरीर थका हुआ लगता है? कई बार दिन की शुरुआत ही सुस्ती, सिर भारी होने और चिड़चिड़ेपन के साथ होती है। काम करने का मन नहीं करता और ध्यान लगाने में भी परेशानी महसूस होती है। अगर ऐसा लगातार हो रहा है तो सिर्फ यह सोचकर संतुष्ट होना ठीक नहीं है कि आपने पर्याप्त घंटे नींद ली है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अच्छी नींद का मतलब केवल बिस्तर पर 8 घंटे बिताना नहीं है। इस दौरान शरीर और दिमाग को कितनी अच्छी तरह आराम मिला, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है। अगर नींद बार-बार टूट रही है या आप गहरी नींद नहीं ले पा रहे हैं, तो पर्याप्त घंटे सोने के बावजूद सुबह तरोताजा महसूस नहीं होगा।
8 घंटे सोने के बाद भी क्यों रहती है थकान
अगर सुबह उठने के बाद भी शरीर में थकान, आलस या दिमाग में भारीपन महसूस होता है, तो इसकी एक वजह खराब स्लीप क्वालिटी हो सकती है। यानी आप भले ही 8 घंटे बिस्तर पर रहे हों, लेकिन इस दौरान शरीर को जरूरी आराम नहीं मिला। नींद की क्वालिटी खराब होने का असर अगले दिन की एनर्जी और काम करने की क्षमता पर भी पड़ सकता है। लगातार अच्छी नींद न मिलने से व्यक्ति दिनभर सुस्त महसूस कर सकता है, ध्यान लगाने में परेशानी हो सकती है और मूड भी प्रभावित हो सकता है। इसलिए केवल नींद के घंटे गिनने के बजाय यह देखना भी जरूरी है कि आपकी नींद कितनी शांत और लगातार रही।

सोने से पहले चाय-कॉफी लेने की आदत पड़ सकती है भारी
रात में सोने के आसपास चाय, कॉफी, एनर्जी ड्रिंक या दूसरी कैफीन वाली चीजें लेने की आदत नींद को प्रभावित कर सकती है। कैफीन शरीर में कई घंटों तक सक्रिय रह सकता है और कुछ लोगों में इसकी वजह से सोने में देरी या रात की नींद में परेशानी हो सकती है। अगर आपको रात में जल्दी और आराम से नींद नहीं आती है, तो शाम के बाद कैफीन का सेवन कम करना फायदेमंद हो सकता है। खासकर सोने से कुछ घंटे पहले चाय-कॉफी से दूरी बनाने की कोशिश करें। हालांकि कैफीन का असर हर व्यक्ति पर अलग हो सकता है।
रोज बदलता सोने का समय भी बिगाड़ सकता है नींद
अगर आपका सोने और जागने का समय हर दिन बदलता रहता है कभी रात 10 बजे सोना और कभी 1 या 2 बजे तक जागना तो इससे शरीर की प्राकृतिक बॉडी क्लॉक प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि नींद का एक नियमित शेड्यूल बनाए रखना जरूरी माना जाता है। कोशिश करें कि रोज लगभग एक ही समय पर सोएं और सुबह भी तय समय के आसपास उठें। छुट्टी वाले दिन भी सोने और उठने के समय में बहुत ज्यादा बदलाव करने से बचें। इससे शरीर को एक नियमित रूटीन की आदत पड़ती है और रात में नींद आने में आसानी हो सकती है।
सोने से पहले मोबाइल चलाने से बचें
बिस्तर पर जाने के बाद मोबाइल पर सोशल मीडिया देखना, वीडियो चलाना या लगातार स्क्रीन पर लगे रहना भी नींद की आदतों को खराब कर सकता है। मोबाइल इस्तेमाल करते हुए अक्सर पता ही नहीं चलता कि सोने का समय कब आगे निकल गया। इसके अलावा, रात में लगातार मिलने वाले नोटिफिकेशन और सोशल मीडिया की गतिविधियां दिमाग को सक्रिय बनाए रख सकती हैं। इसलिए सोने से पहले कुछ समय मोबाइल और दूसरी स्क्रीन से दूरी बनाना बेहतर आदत हो सकती है। फोन को बिस्तर से थोड़ा दूर रखना भी मददगार हो सकता है।
कैसे पता चले कि आपकी नींद की क्वालिटी ठीक नहीं है
कई बार शरीर खुद संकेत देता है कि रात की नींद पर्याप्त आराम देने वाली नहीं रही। अगर 7 से 8 घंटे सोने के बावजूद नीचे बताए गए लक्षण बार-बार दिखाई देते हैं, तो अपनी नींद की आदतों पर ध्यान देना चाहिए।
सुबह उठते ही थकान महसूस होना।
दिनभर सुस्ती या बार-बार नींद आना।
उठने के बाद दिमाग भारी या सुस्त लगना।
काम या पढ़ाई पर ध्यान लगाने में परेशानी होना।
रात में बार-बार नींद खुलना।
सुबह उठने पर सिर दर्द या भारीपन महसूस होना।
इनमें से कोई एक लक्षण कभी-कभार होना जरूरी नहीं कि किसी बीमारी का संकेत हो। लेकिन अगर ये समस्याएं लगातार बनी रहती हैं या रोजमर्रा के काम पर असर डालने लगती हैं, तो इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

अच्छी नींद के लिए इन आदतों को अपनाएं
सोने की जगह का माहौल भी नींद की क्वालिटी पर असर डाल सकता है। कोशिश करें कि कमरे में रात के समय रोशनी कम हो और सोते वक्त वातावरण शांत और अंधेरा रहे। कमरे का तापमान भी बहुत ज्यादा गर्म या ठंडा न हो तो आरामदायक नींद में मदद मिल सकती है। छुट्टी वाले दिन भी अपनी नींद का समय अचानक न बदलें। देर रात तक जागने और सुबह बहुत देर से उठने की आदत आपकी नियमित स्लीप रूटीन को बिगाड़ सकती है। बेहतर होगा कि छुट्टी के दिन भी सोने और जागने का समय लगभग वही रखा जाए। सोने से पहले मोबाइल इस्तेमाल करने की आदत को धीरे-धीरे कम करें। अगर संभव हो तो बिस्तर पर जाने से पहले ही फोन अलग रख दें। इससे आपको समय पर सोने में मदद मिल सकती है और दिमाग को आराम के लिए तैयार होने का मौका मिलता है। इसके साथ ही अपने बिस्तर और तकिए की सुविधा पर भी ध्यान दें। अगर गद्दा, तकिया या सोने की जगह असहज है तो रात में बार-बार करवट बदलने या नींद खुलने की समस्या हो सकती है। आरामदायक और शांत वातावरण अच्छी नींद के लिए जरूरी है।
सिर्फ 8 घंटे सोना ही काफी नहीं
कुल मिलाकर, अच्छी नींद का मतलब केवल 8 घंटे सोना नहीं है। नींद कितनी लगातार रही, रात में कितनी बार आंख खुली, सोने का समय कितना नियमित है और सुबह उठने के बाद आप कैसा महसूस करते हैं इन सभी बातों पर ध्यान देना जरूरी है। अगर पर्याप्त नींद लेने के बावजूद लंबे समय तक थकान, दिन में अत्यधिक नींद, तेज खर्राटे, रात में सांस रुकने जैसा एहसास या बार-बार नींद टूटने की समस्या बनी रहती है, तो इसे सिर्फ सामान्य थकान मानकर छोड़ना ठीक नहीं है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर रहेगा, क्योंकि कभी-कभी नींद से जुड़ी दूसरी समस्याएं भी इसके पीछे हो सकती हैं।