नारी डेस्क: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने हमारी जिंदगी को कई मायनों में आसान बनाया है। फिल्मों से लेकर मेडिकल और शिक्षा तक, इस तकनीक का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन इसके गलत इस्तेमाल को लेकर भी लगातार सवाल उठ रहे हैं। खासकर अभिनेत्रियों की तस्वीरों और वीडियो को AI की मदद से बदलकर आपत्तिजनक रूप में पेश करने के मामले चिंता बढ़ा रहे हैं। अब एक्ट्रेस श्रेया सरन ने भी इस मुद्दे पर खुलकर अपनी बात रखी है। ‘दृश्यम’ और ‘आरआरआर’ जैसी फिल्मों में नजर आ चुकीं श्रेया सरन ने बताया कि AI की मदद से उनकी तस्वीरों के साथ भी छेड़छाड़ की जाती है। कभी उनके शरीर के अंगों का आकार बदल दिया जाता है, तो कभी तस्वीरों से कपड़े तक हटा दिए जाते हैं। एक्ट्रेस ने इसे परेशान करने वाला बताया और कहा कि तकनीक का ऐसा इस्तेमाल सही नहीं है। इससे पहले जाह्नवी कपूर भी अपने गाने के मॉर्फ्ड वीडियो को लेकर नाराजगी जाहिर कर चुकी हैं।
AI से तस्वीरों के साथ की जाती है छेड़छाड़
श्रेया सरन ने अपने एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में AI से बनाई गई मॉर्फ्ड तस्वीरों के बारे में बात की। उन्होंने बताया कि कई बार उनकी तस्वीरों को इस तरह बदल दिया जाता है कि उन्हें खुद भी समझना मुश्किल हो जाता है कि तस्वीर में दिखाई दे रही महिला वही हैं या नहीं।एक्ट्रेस के मुताबिक, कभी उनके शरीर का आकार बदल दिया जाता है, तो कभी तस्वीरों में ऐसे बदलाव कर दिए जाते हैं, जिनका असल तस्वीर से कोई संबंध नहीं होता। कपड़ों को हटाकर तस्वीरों को आपत्तिजनक बनाने जैसी हरकतें भी की जाती हैं। श्रेया ने कहा कि कई बार ऐसी चीजों को देखकर उन्हें नजरअंदाज करना पड़ता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इस तरह की हरकतों को सही माना जाए। उनके लिए यह अनुभव परेशान करने वाला है और AI का ऐसा इस्तेमाल सामान्य बात समझकर स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।

AI के फायदे भी मानती हैं श्रेया
श्रेया सरन ने AI के हर इस्तेमाल को गलत नहीं बताया। उनका मानना है कि यह तकनीक कई क्षेत्रों में उपयोगी साबित हो सकती है और लोगों के लिए नए अवसर भी पैदा कर सकती है। लेकिन जब इसी तकनीक का इस्तेमाल किसी की तस्वीर बिगाड़ने या उसे आपत्तिजनक रूप में दिखाने के लिए किया जाता है, तो यह गंभीर चिंता का विषय बन जाता है। एक्ट्रेस के मुताबिक, हर नई तकनीक के साथ कुछ चुनौतियां भी सामने आती हैं। ऐसे में जरूरी है कि लोग तकनीक का इस्तेमाल जिम्मेदारी से करें और इसके गलत इस्तेमाल से होने वाले नुकसान को समझें।
जाह्नवी कपूर के मॉर्फ्ड वीडियो पर भी हुआ था विवाद
AI से तस्वीरों और वीडियो के साथ छेड़छाड़ का मुद्दा उस समय भी चर्चा में आया था, जब जाह्नवी कपूर के गाने ‘चुट्टमल्ले’ के मॉर्फ्ड वीडियो को लेकर विवाद हुआ। यह गाना फिल्म ‘देवरा: पार्ट 1’ का हिस्सा है, जिसमें जाह्नवी कपूर के साथ जूनियर एनटीआर नजर आए थे। वायरल हुए कथित मॉर्फ्ड वीडियो में जाह्नवी की छवि को बदलकर आपत्तिजनक रूप दिया गया था, जो मूल गाने का हिस्सा नहीं था। इसके बाद जाह्नवी ने 4 अक्टूबर 2026 को अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर इस घटना की निंदा की थी। इस मामले में जूनियर एनटीआर, चिरंजीवी, विजय देवरकोंडा और खुशबू सुंदर समेत कई सितारों ने जाह्नवी का समर्थन किया था। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया कि किसी की तस्वीर या वीडियो को उसकी अनुमति के बिना बदलकर गलत तरीके से पेश करना कितना गंभीर मामला है।
फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से खुश हैं श्रेया
AI के मुद्दे के अलावा श्रेया सरन ने फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं की बदलती भूमिका पर भी बात की। उन्होंने कहा कि अब महिलाएं सिर्फ कैमरे के सामने अभिनय करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि फिल्मों की कहानियां चुनने, प्रोजेक्ट्स में निवेश करने और रचनात्मक फैसले लेने में भी आगे आ रही हैं। एक्ट्रेस का मानना है कि फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं की स्थिति बदलने के लिए सिर्फ महिलाओं पर आधारित फिल्में बनाना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए जरूरी है कि महिलाएं उन कहानियों को लिखने, फिल्मों को बनाने और उनमें पैसा लगाने से जुड़े फैसलों में भी शामिल हों। जब महिलाओं को कहानी और फिल्म निर्माण के अहम फैसले लेने का अवसर मिलेगा, तभी उनकी जिंदगी, अनुभवों और परेशानियों को बेहतर तरीके से पर्दे पर दिखाया जा सकेगा।
2001 में डेब्यू से अब तक कितना बदल गया सिनेमा
श्रेया सरन ने अपने करियर के शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि साल 2001 में फिल्म ‘इष्टम’ से डेब्यू करने के समय फिल्म इंडस्ट्री का माहौल आज से काफी अलग था। उन्होंने बताया कि शुरुआती तीन फिल्मों की शूटिंग के दौरान उनके पास मेकअप वैन तक नहीं थी। कलाकार कई बार किसी पेड़ के नीचे बैठकर खाना खाते थे और एक-दूसरे के साथ वक्त बिताते थे। उस दौर में अभिनेता और निर्देशक फिल्मों के अलावा जिंदगी, किताबों और संगीत पर भी बातचीत करते थे। कई बार वे रिकॉर्डर लेकर आते और साथ बैठकर गाने सुनते थे। श्रेया के मुताबिक, आज शूटिंग के दौरान कई लोग अपने ईयरफोन में व्यस्त रहते हैं और आपस में बातचीत पहले के मुकाबले कम होती है। उनके अनुभव में फिल्में बनाने का तरीका ही नहीं, बल्कि सेट पर कलाकारों के एक-दूसरे से जुड़ने का अंदाज भी काफी बदल गया है।

AI के गलत इस्तेमाल पर उठ रहे हैं सवाल
श्रेया सरन का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब AI से तैयार की गई फर्जी तस्वीरों और वीडियो को लेकर कलाकारों की चिंताएं लगातार सामने आ रही हैं। किसी की असली तस्वीर में बिना अनुमति बदलाव करना और उसे आपत्तिजनक रूप में फैलाना उसकी निजता और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकता है।
AI का इस्तेमाल रचनात्मक कामों में मददगार हो सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि किसी की तस्वीर या पहचान के साथ मनमाने तरीके से छेड़छाड़ की जाए। श्रेया की बात इसी ओर ध्यान दिलाती है कि तकनीक के विकास के साथ उसके जिम्मेदार इस्तेमाल और लोगों की निजता की सुरक्षा को भी उतनी ही अहमियत मिलनी चाहिए।