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डेंगू में प्लेटलेट्स गिरते ही न घबराएं, इन लक्षणों पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 07 Oct, 2026 01:46 PM
डेंगू में प्लेटलेट्स गिरते ही न घबराएं, इन लक्षणों पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी

नारी डेस्क:  डेंगू का नाम सुनते ही ज्यादातर लोगों के मन में सबसे पहले प्लेटलेट्स का ख्याल आता है। जैसे ही रिपोर्ट में प्लेटलेट काउंट नीचे जाता है, परिवार वाले घबरा जाते हैं और उसे बढ़ाने के लिए तरह-तरह के उपाय शुरू कर देते हैं। लेकिन डेंगू में सिर्फ प्लेटलेट्स का आंकड़ा देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि मरीज की हालत कितनी गंभीर है। डॉक्टरों के मुताबिक डेंगू के दौरान प्लेटलेट्स कम होना आम बात है। ज्यादा जरूरी यह देखना है कि मरीज को ब्लीडिंग तो नहीं हो रही, ब्लड प्रेशर कैसा है, शरीर में पानी की कमी तो नहीं है, पेशाब ठीक से आ रहा है और कोई चेतावनी वाले लक्षण तो दिखाई नहीं दे रहे। डेंगू का गंभीर रूप कुछ ही घंटों में बिगड़ सकता है, इसलिए प्लेटलेट रिपोर्ट के साथ मरीज की पूरी स्थिति पर नजर रखना जरूरी है।

डेंगू में प्लेटलेट्स क्यों गिरने लगते हैं

डेंगू वायरस शरीर में पहुंचने के बाद कई तरह से प्लेटलेट्स की संख्या को प्रभावित कर सकता है। संक्रमण के दौरान बोन मैरो यानी हड्डियों के अंदर मौजूद उस हिस्से की कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है, जहां रक्त की कोशिकाएं बनती हैं। इसके अलावा शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया के कारण प्लेटलेट्स तेजी से नष्ट भी हो सकते हैं। इसी वजह से डेंगू के दौरान प्लेटलेट काउंट नीचे जा सकता है। आमतौर पर बीमारी के शुरुआती दिनों के बाद प्लेटलेट्स में गिरावट देखने को मिल सकती है। डेंगू की बीमारी में बुखार के बाद आने वाला महत्वपूर्ण चरण अक्सर तीसरे से आठवें दिन के बीच हो सकता है, इसलिए इस दौरान मरीज की निगरानी और भी जरूरी हो जाती है।

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40 हजार प्लेटलेट्स हैं तो क्या बहुत खतरा है

प्लेटलेट काउंट कम देखकर डरना स्वाभाविक है, लेकिन केवल एक संख्या के आधार पर मरीज की हालत का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। मान लीजिए किसी मरीज के प्लेटलेट्स 40 हजार तक पहुंच गए हैं। ऐसे में डॉक्टर सिर्फ इस आंकड़े को देखकर इलाज का फैसला नहीं करते। मरीज को ब्लीडिंग हो रही है या नहीं, उसका ब्लड प्रेशर और बाकी जांच कैसी है, वह पर्याप्त मात्रा में तरल ले पा रहा है या नहीं और पेशाब ठीक से हो रहा है या नहीं इन सभी बातों को देखा जाता है। इसलिए कम प्लेटलेट्स का मतलब हमेशा गंभीर डेंगू नहीं होता। वहीं दूसरी तरफ प्लेटलेट्स बहुत तेजी से गिर रहे हों या मरीज में चेतावनी वाले लक्षण दिखाई दे रहे हों, तो स्थिति को गंभीरता से लेना जरूरी है।

प्लेटलेट्स से ज्यादा इन लक्षणों पर रखें नजर

डेंगू में कुछ ऐसे संकेत हैं जिन्हें बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इनमें खास तौर पर शामिल हैं:

तेज या लगातार पेट दर्द

बार-बार उल्टी होना

नाक या मसूड़ों से खून आना

उल्टी या मल में खून आना

बहुत ज्यादा कमजोरी, बेचैनी या सुस्ती

सांस लेने में परेशानी

बहुत ज्यादा प्यास लगना

त्वचा का पीला, ठंडा या चिपचिपा महसूस होना

पेशाब कम आना

अचानक हालत बिगड़ना

इनमें से कोई भी चेतावनी संकेत दिखाई दे तो सिर्फ अगली प्लेटलेट रिपोर्ट का इंतजार नहीं करना चाहिए। मरीज को तुरंत डॉक्टर या अस्पताल की इमरजेंसी में ले जाना चाहिए।

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बुखार उतरने के बाद भी लापरवाही न करें

डेंगू में एक बात अक्सर लोगों को भ्रमित करती है। बुखार कम होते ही उन्हें लगता है कि मरीज अब ठीक हो रहा है। लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता। डेंगू के गंभीर होने के चेतावनी संकेत अक्सर बुखार कम होने के आसपास या उसके बाद के 24 से 48 घंटों में दिखाई दे सकते हैं। इसलिए बुखार उतरने के बाद भी मरीज की हालत पर नजर रखना जरूरी है।

प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए क्या करें

डेंगू में शरीर को पर्याप्त तरल देना बहुत जरूरी है। अगर मरीज आसानी से पानी और दूसरे तरल पदार्थ ले पा रहा है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार पर्याप्त मात्रा में तरल दिया जा सकता है। जरूरत के अनुसार पानी, ओआरएस और दूसरे उपयुक्त तरल लिए जा सकते हैं।अगर मरीज लगातार उल्टी कर रहा है और तरल पीने में परेशानी हो रही है, तो अस्पताल में डॉक्टर स्थिति के अनुसार नस के जरिए तरल यानी आईवी फ्लूइड दे सकते हैं। हर मरीज को अपने आप आईवी लगाने की जरूरत नहीं होती।

बुखार में कौन सी दवा लें

डेंगू में बुखार और दर्द के लिए आमतौर पर पैरासिटामोल का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन दवा की सही मात्रा डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लेनी चाहिए। एस्पिरिन और आइबुप्रोफेन जैसी दवाओं से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इनसे ब्लीडिंग का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए डेंगू के दौरान बिना डॉक्टर की सलाह के दर्द या बुखार की कोई दवा लेना सही नहीं है।

क्या पपीते के पत्ते का जूस प्लेटलेट्स बढ़ाता है

डेंगू में पपीते के पत्ते का जूस प्लेटलेट्स बढ़ाने के घरेलू उपाय के तौर पर काफी चर्चा में रहता है। कुछ छोटी रिसर्च में इसके संभावित फायदे बताए गए हैं, लेकिन इसे डेंगू का प्रमाणित इलाज नहीं माना जाता। इसलिए मरीज को सिर्फ पपीते के पत्ते के जूस पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। डॉक्टर की निगरानी, पर्याप्त तरल और जरूरी जांच का कोई विकल्प इसे नहीं माना जा सकता। अगर इसे लेने के बाद उल्टी या किसी तरह की परेशानी हो, तो इसे बंद करके डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

क्या प्लेटलेट्स कम होते ही चढ़ाना पड़ता है

यह भी एक आम गलतफहमी है कि प्लेटलेट्स कम होते ही प्लेटलेट चढ़ाना जरूरी है। वास्तव में डॉक्टर मरीज की पूरी स्थिति देखकर इसका फैसला करते हैं। सिर्फ प्लेटलेट काउंट कम होने के कारण हर डेंगू मरीज को प्लेटलेट ट्रांसफ्यूजन देने की जरूरत नहीं होती। खासकर बिना ब्लीडिंग के केवल प्लेटलेट संख्या के आधार पर नियमित या बचाव के तौर पर प्लेटलेट चढ़ाने की सलाह नहीं दी जाती। गंभीर ब्लीडिंग या दूसरी चिकित्सीय जरूरत होने पर डॉक्टर ट्रांसफ्यूजन का फैसला कर सकते हैं।

डेंगू में सबसे जरूरी है मरीज की निगरानी

डेंगू में प्लेटलेट की रिपोर्ट जरूर महत्वपूर्ण है, लेकिन यह पूरी तस्वीर नहीं बताती। मरीज कैसा महसूस कर रहा है, ब्लीडिंग है या नहीं, पेट में दर्द और उल्टी कितनी है, शरीर में पानी की स्थिति कैसी है और पेशाब ठीक से आ रहा है या नहीं इन सभी चीजों पर ध्यान देना जरूरी है।

इसलिए प्लेटलेट्स कम होने पर घबराने के बजाय डॉक्टर के संपर्क में रहें और समय-समय पर जरूरी जांच करवाते रहें। वहीं अगर ब्लीडिंग, तेज पेट दर्द, लगातार उल्टी, सांस लेने में परेशानी, बहुत ज्यादा कमजोरी या पेशाब कम होने जैसे संकेत दिखाई दें, तो तुरंत अस्पताल पहुंचें। गंभीर डेंगू एक मेडिकल इमरजेंसी हो सकता है।
 

 

 

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