
नारी डेस्क: कोलकाता की एक 11 साल की लड़की के दाहिने कान में लगातार धड़कनें जैसी आवाज आ रही थी। जब इस आवाज ने उसकी रोजमर्रा की जिंदगी में दखल देना शुरू किया, तो उसके माता-पिता ने डॉक्टरी मदद ली, लेकिन उन्हें इस अजीब आवाजं का कोई साफ़ कारण नहीं मिल पाया। शुरू में उसके लक्षणों को तनाव का नतीजा माना गया, जिससे बीमारी का पता लगाने में देरी हुई । मामले ने तब एक नया मोड़ लिया जब कलकत्ता मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (CMRI) में उसकी जांच की गई।
यह भी पढ़ें : भारतीय सिनेमा की सबसे सम्मानित एक्ट्रेस Sowcar Janaki ने 93 की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा
पूरा दिन आती रहती थी आवाज
Mint की खबर के मुताबिक अस्पताल की ओर से जारी बयान में लड़कर ने बताया- "जुलाई 2024 से मुझे अपने दाहिने कान में एक आवाज़ सुनाई दे रही है, जैसे कुछ बज रहा हो और यह लगातार, 24x7 होती रहती है। यह बहुत परेशान करने वाली है। जब मैं किसी शोर-शराबे वाली जगह पर होती हूं या कोई मेरे साथ होता है, तो मुझे इसका ज़्यादा पता नहीं चलता। लेकिन जब मैं अकेली होती हूं या कोई काम कर रही होती हूं, तो यह बहुत बड़ी समस्या बन जाती है। मैंने इसके लिए कई तरह के इलाज करवाए और डॉक्टरों से सलाह ली। सभी ने कहा कि यह मेरी मानसिक सेहत या तनाव से जुड़ी समस्या हो सकती है। कुछ दिन दवा लेने के बाद शुरू में तो मुझे ठीक लगा, लेकिन वह आवाज़ फिर से आने लगी और लगातार बनी हुई है।"
लड़की को हो गई थी ये बीमारी
MRI वेनोग्राम से पता चला कि लड़की का ट्रांसवर्स वीनस साइनस सिकुड़ गया है, जिससे लगातार आने वाली आवाजं का कारण कोई वैस्कुलर (रक्त वाहिकाओं से जुड़ी) समस्या हो सकती है। यह स्थिति 'यूनिलैटरल पल्सेटाइल टिनिटस' से जुड़ी थी। यूनिलैटरल पल्सेटाइल टिनिटस एक कान में होने वाली लयबद्ध, धड़कन जैसी आवाज़ है, जो मरीज की दिल की धड़कन से मेल खाती हुई लगती है। एक अहम क्लिनिकल संकेत तब मिला जब जुगुलर वेन (गर्दन की नस) को दबाने पर टिनिटस गायब हो गया। इससे डॉक्टरों को रक्त वाहिकाओं से जुड़ी वजहों की बारीकी से जांच करने का विचार आया, जिससे आखिरकार असल बीमारी का पता लगाने में मदद मिली।
यह भी पढ़ें : क्या मोबाइल ज्यादा यूज करने से होता है ब्रेन कैंसर ? स्टडी में एक- एक चीज समझाई गई विस्तार से
गर्दन की नस दबाने से ठीक हो जाती थी आवाज
मरीज़ का इलाज करने वाले डॉक्टर ने बताया- "जब एक तरफ़ पल्स की तरह आवाज सुनाई देती है (पल्सेटाइल टिनिटस), खासकर जब यह दिल की धड़कन के साथ तालमेल बिठाती है और गर्दन की नस (जुगुलर वेन) को दबाने पर गायब हो जाती है, तो डॉक्टरों को आम कारणों से हटकर सोचना चाहिए। इस मामले में, बारीकी से जांच करने पर नस (वीनस साइनस) के सिकुड़ने का पता चला और मरीज़ का सही इलाज हो सका।" नस के सिकुड़न को ठीक करने के लिए मरीज़ की वीनस साइनस स्टेंटिंग की गई। डॉक्टर ने कहा- "पल्सेटाइल टिनिटस कभी-कभी नस से जुड़ी किसी अंदरूनी समस्या का पहला संकेत हो सकता है। यह मामला समय पर न्यूरोलॉजिकल और वैस्कुलर जांच के महत्व को बताता है, क्योंकि कारण का पता चलने से हम स्टेंटिंग के ज़रिए नस के सिकुड़न का इलाज कर पाए और मरीज़ की परेशान करने वाली दिक्कतों को सफलतापूर्वक ठीक कर पाए।"