नारी डेस्क: दिग्गज अभिनेता प्रदीप राम सिंह रावत के परिवार, दोस्तों और सहयोगियों ने एक प्रार्थना सभा में उन्हें याद किया। 74 साल की उम्र में ब्लड कैंसर से तेज़ी से बिगड़ी तबीयत के कारण उनका निधन हो गया था। गजनी, लगान, सरफरोश और छावा जैसी फिल्मों में यादगार अभिनय के लिए मशहूर प्रदीप रावत अपने पीछे ऐसा काम छोड़ गए हैं, जिसने उन्हें हिंदी, तेलुगु और तमिल सिनेमा में बहुत प्यार दिलाया।
उनके बेटे विक्रमादित्य सिंह रावत ने अपने पिता को भावुक श्रद्धांजलि दी। उन्हें "सम्मान और इज़्ज़त" वाले व्यक्ति बताते हुए उन्होंने कहा कि उनके पिता उनके लिए क्या मायने रखते थे, इसे बयां करने के लिए शब्द कम पड़ जाएंगे। विक्रमादित्य ने कहा- "सबसे पहले, मैं यह कहना चाहूंगा कि मैं अपने पिता के बारे में चाहे कितने भी शब्द कहूं, वे हमेशा कम ही होंगे। वह सम्मान और इज्जत वाले व्यक्ति थे। मैं चाहे कितनी भी बार भगवान से प्रार्थना करूं, या अगर भगवान मुझसे पूछें कि मैं कैसा पिता चाहता था, तो मैं हमेशा उन्हीं का नाम लूंगा।"
सबका शुक्रिया अदा करते हुए विक्रमादित्य खुद को रोक नहीं पाए उनके आंसू आ गए। उन्होंने भावुक होकर बोले- 'जो भी यहां आया उन सभी का धन्यवाद। मैं ज्यादा बोलने की हालत में नहीं हूं। मेरी बहुत यादें हैं उनके साथ और कुछ तो नहीं बोल पाऊंगा। अभी मेरे हाथ-पैर कांप रहे हैं। वो आप सभी से बहुत प्यार करते थे और तारीफ करते थे। आप सभी यहां आए, उसके लिए शुक्रिया।' विक्रमादित्य ने अभिनेता के आखिरी दिनों के बारे में भी बात की और याद किया कि कैसे शुरू में मामूली लगने वाली स्वास्थ्य समस्या बाद में गंभीर हो गई।
प्रदीप के बेटे ने कहा- "दो महीने पहले उन्हें हिचकी आने लगी थी। वह घर आए और हमें लगा कि यह किसी मामूली संक्रमण की वजह से हो सकता है। लेकिन जैसे-जैसे यह बढ़ती गई हमने डॉक्टर को घर बुलाया। जब डॉक्टर आए, तो उन्होंने कहा कि गंभीर इन्फेक्शन हो सकता है।" उन्होंने आगे कहा कि कई दवाइयां देने के बावजूद उनके पिता की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाने के वादे को दोहराते हुए विक्रमादित्य ने कहा- "डॉक्टर ने कई दवाइयां लिखीं, लेकिन दुर्भाग्य से उनमें से किसी ने भी काम नहीं किया। उन्हें यकीन था, और मुझे भी यकीन है, कि एक दिन मैं उनका नाम रोशन करूंगा। मैं उनकी विरासत को आगे बढ़ाऊंगा। मैं उनकी विरासत को अपनाना चाहता हूं और उसे और भी बड़ा बनाना चाहता हूं।"
एक्टर रघुबीर यादव ने भी प्रदीप रावत को याद किया और कहा कि यह दिग्गज एक्टर हमेशा लोगों के दिलों में रहेंगे। फिल्म इंडस्ट्री के लिए उनके जाने को "बहुत बड़ी" क्षति बताते हुए उन्होंने कहा, "...वह हमेशा हमारे दिमाग और दिलों में रहेंगे। जिन लोगों ने भी उनके साथ काम किया है, वे उन्हें कभी नहीं भूल पाएंगे।" प्रदीप रावत अपने पीछे पत्नी कल्याणी रावत और बेटे विक्रमादित्य रावत को छोड़ गए हैं। यह एक्टर हिंदी, तेलुगु और तमिल फिल्मों में अपनी एक्टिंग के लिए काफी मशहूर थे। उन्होंने 'सरफरोश', 'लगान', 'सई', 'नायक', 'गजनी' और हाल ही में 'छावा' जैसी फिल्मों में यादगार रोल निभाए, जिसमें उन्होंने येसाजी कंक का किरदार निभाया था।