22 AUGSATURDAY2026 6:23:33 PM
Life Style

इस राज्य में एक साल तक नहीं बिकेगा पनीर, सरकार ने बिक्री पर लगाई रोक

  • Edited By Monika,
  • Updated: 22 Aug, 2026 04:50 PM
इस राज्य में एक साल तक नहीं बिकेगा पनीर, सरकार ने बिक्री पर लगाई रोक

नारी डेस्क : कर्नाटक सरकार ने ‘पनीर’ के नाम पर बेचे जा रहे एनालॉग या नॉन-डेयरी पनीर के उत्पादन, प्रोसेसिंग, पैकिंग, भंडारण, वितरण और बिक्री पर एक साल के लिए रोक लगा दी है। राज्य के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने यह फैसला उपभोक्ताओं के हित और खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया है। कर्नाटक के खाद्य सुरक्षा विभाग ने 17 अगस्त 2026 को जारी अधिसूचना में ऐसे एनालॉग या नॉन-डेयरी पनीर पर रोक लगाई, जिन्हें बाजार में असली पनीर के नाम से बेचा या पेश किया जाता है। यह प्रतिबंध एक साल के लिए लागू रहेगा।

क्या है एनालॉग या नॉन-डेयरी पनीर?

एनालॉग पनीर ऐसा उत्पाद होता है जो देखने और इस्तेमाल में पनीर जैसा लग सकता है, लेकिन इसे बनाने में दूध की वसा या दूध के ठोस पदार्थों को पूरी तरह या आंशिक रूप से वनस्पति तेल, वनस्पति फैट या अन्य गैर-डेयरी सामग्री से बदला जाता है। ऐसे उत्पादों को असली डेयरी पनीर के तौर पर बेचना या उपभोक्ता के सामने उसी नाम से पेश करना नियमों के खिलाफ है। कुछ एनालॉग उत्पादों में वनस्पति तेल, स्टार्च, स्टेबलाइजर, इमल्सीफायर और अन्य सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसलिए उपभोक्ताओं के लिए लेबल देखकर यह समझना जरूरी है कि उत्पाद वास्तव में दूध से बना है या किसी गैर-डेयरी विकल्प से।

PunjabKesari

पनीर के नाम पर बेचने पर क्यों हुई कार्रवाई?

सरकार की चिंता मुख्य रूप से उपभोक्ताओं को गुमराह करने और खाद्य मानकों के उल्लंघन को लेकर है। यदि कोई नॉन-डेयरी उत्पाद असली पनीर के रूप में बेचा जाता है, तो ग्राहक बिना जानकारी के उसे खरीद सकता है और उसे वह पोषण नहीं मिल सकता जिसकी वह दूध से बने पनीर से उम्मीद करता है। FSSAI ने भी स्पष्ट किया है कि किसी चीज एनालॉग को ‘पनीर’ के नाम से बेचना गंभीर खाद्य-नियम उल्लंघन है। खाद्य कारोबारियों को ऐसे उत्पादों की सही और स्पष्ट पहचान बताने के निर्देश दिए गए हैं।

यें भी पढ़ें : थायरॉयड में अचानक क्यों बढ़ने लगता है वजन? जानें इसकी असली वजह

होटल और रेस्टोरेंट भी नहीं कर सकेंगे इस्तेमाल

कर्नाटक का यह प्रतिबंध केवल दुकानों में बिक्री तक सीमित नहीं है। अधिसूचना के तहत ऐसे नॉन-डेयरी पनीर के निर्माण, प्रोसेसिंग, पैकिंग, स्टोरेज, परिवहन, सप्लाई और थोक व खुदरा बिक्री पर रोक लगाई गई है। यानी खाद्य कारोबारियों के लिए भी इसे पनीर के नाम पर इस्तेमाल करना या ग्राहकों को परोसना प्रतिबंधित होगा।

PunjabKesari

असली पनीर और एनालॉग पनीर में अंतर

असली पनीर एक डेयरी उत्पाद है, जिसे दूध से तैयार किया जाता है। वहीं एनालॉग पनीर में दूध की वसा या दूध के ठोस पदार्थों की जगह कुछ मात्रा में या पूरी तरह गैर-डेयरी सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है।  यही वजह है कि दोनों उत्पादों को एक ही नाम से बेचना उपभोक्ताओं के लिए भ्रम पैदा कर सकता है। FSSAI के अनुसार, जब किसी खाद्य पदार्थ में डेयरी उत्पाद के स्थान पर डेयरी एनालॉग का इस्तेमाल किया जाता है, तो उसकी प्रकृति को स्पष्ट रूप से बताना जरूरी है।

यें भी पढ़ें : हार्ट अटैक की असली वजह: मीट-तेल नहीं, बल्कि 5 गलत आदतें जो नाइट्रिक ऑक्साइड घटाती हैं

FSSAI भी कर चुका है लेबलिंग को लेकर सख्ती

कर्नाटक का फैसला ऐसे समय आया है जब FSSAI भी डेयरी एनालॉग को लेकर नियमों के पालन पर जोर दे रहा है। अप्रैल 2026 में FSSAI ने स्पष्ट किया था कि चीज एनालॉग को पनीर के नाम से बेचना कानून का गंभीर उल्लंघन है और खाद्य कारोबारियों को सही नाम और लेबलिंग सुनिश्चित करनी होगी। पनीर खरीदते समय केवल कम कीमत देखकर खरीदारी न करें। पैकेट पर दिए गए लेबल, सामग्री (Ingredients), FSSAI लाइसेंस और उत्पाद का नाम जरूर देखें। यदि किसी उत्पाद पर ‘Analogue’, ‘Non-Dairy’ या इसी तरह का उल्लेख है, तो उसे सामान्य दूध से बने पनीर के बराबर न समझें।

Related News