04 AUGTUESDAY2020 2:45:44 AM
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ऐसी थी भारत की पहली महिला ‘जवान’, शांति तिग्गा की ज़िन्दगी की दास्तां

  • Edited By Janvi Bithal,
  • Updated: 14 Jul, 2020 11:33 AM
ऐसी थी भारत की पहली महिला ‘जवान’, शांति तिग्गा की ज़िन्दगी की दास्तां

आज कल लोगों की यही सोच है कि आर्मी में लड़के ही अच्छा काम कर सकते हैं और ये काम लड़कियों का नहीं है लेकिन ऐसा नहीं है आज हम आपको एक ऐसी महिला की कहानी सुनाते हैं जो भारत की पहली महिला जवान बनीं । हम बात कर रहे हैं शांति तिग्गा की। शांति तिग्गा का नाम सुनकर हर भारतीय का सीना चौड़ा हो जाए अपनी मेहनत से आर्मी में जगह बनाने वाली शांति ने आते ही पुरूषों को भी पछाड़ दिया लेकिन शांति के लिए ये जिंदगी की जंग इतनी आसान नहीं थी। 

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गरीबी में पली बढ़ी शांति की शादी बहुत कम उम्र में हो गई थी लेकिन उसके बुंलद हौसलें कभी नहीं रूके। जिंदगी जैसे वैसे चल रही थी लेकिन फिर एक दिन शांति के पति का निधन हो गया। शांति का पति रेलवे में नौकरी करता था। पति के जाने के बाद शांति पर अपने बच्चों को पालने की जिम्मेदारी आ गई । पति की नौकरी तो शांति को मिल गई लेकिन फिर एक दिन शांति को Territorial Army के बारे में पता चला। शांति के कुछ जान पहचान वाले भी आर्मी में थे जिसके कारण शांति के लिए इसके बारे में जानकारी लेना आसान हो गया। जानकारी मिली और शांति ने इसकी परीक्षा देने का निर्णय लिया और  दिन रात एक एक कर दिया। 

ट्रेनिंग में सभी पुरूषों को छोड़ा पीछे 

शांति ने अपने ट्रेनिंग सेशन में ऐसा कमाल दिखाया कि उसने पुरूषों को भी पीछे छोड़ दिया। ट्रेनिंग सेशन में शांति ने ऐसा कमाल किया कि उसने 50 मीटर की दौड़ 12 सेकेंड में पूरी की और 1.5 किलोमीटर की दौड़ पूरी करने में अन्य प्रतिभागियों से 5 सेकेंड से कम का वक़्त लिया। 

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तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने सम्मानित किया था

शांति के प्रदर्शन से खुश होकर तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने उन्हें सम्मानित किया था। बंदूक चलाने की कला में शांति इतनी निपुण थी कि उन्होंने इसी कला से Marksman की पद्वी हासिल की। भारतीय सेना में महिलाओं की नियुक्ति ऑफ़िसर रैंक से ही होती है और शांति ने इस प्रथा को तोड़ा।

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दुख भरा था अंत 

खबरों की मानें तो  9 मई 2013 को कुछ अज्ञात लोगों ने उनका अपहरण कर लिया और अगली सुबह वो बेहोशी की हालत में रेलवे ट्रैक्स के किनारे एक पोल से बंधी मिली फिर एक दिन 13 मई, 2013 को वो रेलवे बाथरूम से काफ़ी देर तक बाहर नहीं आईं, पुलिस और रेलवे अधिकारियों ने दरवाज़ा तोड़ा और शांति का मृत शरीर लटकता हुआ पाया गया। ये मामला पुलिस में दे दिया गया लेकिन फिर ये केस बस कागजी बन कर रह गया। शांति की मौत कैसे हुई इस बारे में अभी तक किसी को कोई जानकारी नहीं है। 

इससे कोई इन्कार नहीं कर सकता की शांति ने हम सब का मान बढ़ाया है और वो बाकी महिलाओं के लिए भी एक मिसाल है। 

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