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दुनिया में दिल के रोग से हो रहीं सबसे ज्यादा मौतें, WHO की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 04 Oct, 2026 09:02 AM
दुनिया में दिल के रोग से हो रहीं सबसे ज्यादा मौतें, WHO की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

नारी डेस्क: दुनियाभर में हृदय रोग आज भी लोगों की जान लेने वाली सबसे बड़ी वजह बना हुआ है। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO की ताजा रिपोर्ट में सामने आया है कि 2023 में दुनिया में करीब 6.1 करोड़ लोगों की मौत हुई। इनमें लगभग 95 लाख मौतें अकेले इस्केमिक हार्ट डिजीज यानी हृदय की धमनियों से जुड़ी बीमारी के कारण हुईं। यह कुल मौतों का करीब 16 फीसदी है। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2000 से अब तक इस बीमारी से होने वाली मौतों में करीब 30 लाख का इजाफा हुआ है। इसके बाद स्ट्रोक मौतों की दूसरी और क्रोनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज यानी सीओपीडी तीसरी बड़ी वजह रही। WHO के आंकड़ों के अनुसार 2023 में स्ट्रोक से करीब 68 लाख और सीओपीडी से करीब 36 लाख लोगों की मौत हुई।

गैर-संक्रामक बीमारियां बनीं बड़ी चुनौती

WHO की रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि दुनिया में अब मौतों का बड़ा हिस्सा ऐसी बीमारियों की वजह से हो रहा है जो संक्रामक नहीं हैं। 2023 में वैश्विक स्तर पर हुई मौतों में करीब 74 फीसदी हिस्सेदारी गैर-संक्रामक बीमारियों की थी। दुनिया में मौतों की शीर्ष 10 वजहों में 8 गैर-संक्रामक बीमारियां शामिल रहीं। इसका मतलब है कि हृदय रोग, स्ट्रोक, मधुमेह, कैंसर और सांस से जुड़ी पुरानी बीमारियां अब दुनिया के सामने बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बन चुकी हैं।

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कोरोना अब टॉप-10 में नहीं

कोविड-19 महामारी के दौरान दुनिया में मौतों का आंकड़ा काफी बढ़ गया था। लेकिन अब इसकी स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। WHO के अनुसार 2023 में पहली बार कोविड-19 दुनिया में मौतों की शीर्ष 10 वजहों से बाहर हो गया। महामारी के दौरान 2021 में कोविड-19 मौतों की प्रमुख वजहों में सबसे ऊपर पहुंच गया था।

महामारी के बाद बढ़ी जीवन प्रत्याशा

कोरोना महामारी के कारण दुनियाभर में औसत जीवन प्रत्याशा में गिरावट आई थी। अब इसमें दोबारा सुधार देखने को मिला है। WHO के अनुसार 2023 में वैश्विक जीवन प्रत्याशा बढ़कर 73.3 साल हो गई, जबकि 2019 में यह 73.4 साल थी। यानी यह लगभग महामारी से पहले के स्तर पर पहुंच चुकी है। हालांकि स्वस्थ जीवन जीने की अवधि अभी पूरी तरह महामारी से पहले के स्तर पर नहीं पहुंची है। 2023 में स्वस्थ जीवन प्रत्याशा 62.8 साल रही, जो 2019 के मुकाबले 0.4 साल कम है। WHO के मुताबिक लोग ज्यादा समय तक तो जी रहे हैं, लेकिन जीवन के ज्यादा साल स्वस्थ रहकर बिताना अभी भी एक बड़ी चुनौती है।

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भारत में भी दिल की सेहत को लेकर चिंता

भारत में भी कम उम्र में हृदय रोग का खतरा चिंता का विषय बना हुआ है। तनाव, खराब नींद, शारीरिक गतिविधि की कमी, धूम्रपान, अस्वास्थ्यकर खान-पान, बढ़ता वजन, हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज जैसे कारण दिल की सेहत पर असर डाल सकते हैं। हालांकि किसी व्यक्ति को हृदय रोग का खतरा कितना है, यह उसकी उम्र, पारिवारिक इतिहास और अन्य स्वास्थ्य स्थितियों पर भी निर्भर करता है। इसलिए केवल उम्र के आधार पर जोखिम को कम समझना सही नहीं है।

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दिल को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें

हृदय रोग के जोखिम को कम करने के लिए रोजमर्रा की आदतों पर ध्यान देना जरूरी है। नियमित शारीरिक गतिविधि करें, लंबे समय तक लगातार बैठे रहने से बचें और खाने में नमक, ज्यादा चीनी और अस्वास्थ्यकर वसा की मात्रा सीमित रखें। इसके साथ ही समय-समय पर ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर की जांच कराना भी जरूरी है। धूम्रपान से दूरी और पर्याप्त नींद भी दिल की सेहत के लिए महत्वपूर्ण है। WHO भी हृदय रोग समेत गैर-संक्रामक बीमारियों के जोखिम को कम करने के लिए तंबाकू, अस्वास्थ्यकर खान-पान, शारीरिक निष्क्रियता और वायु प्रदूषण जैसे जोखिम कारकों पर ध्यान देने की सलाह देता है।

याद रखें: हृदय रोग का खतरा केवल उम्र बढ़ने के साथ ही नहीं जुड़ा है। अपनी दिनचर्या और स्वास्थ्य जांच पर समय रहते ध्यान देकर कई जोखिमों को कम किया जा सकता है।
 

 

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