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लंदन में बढ़ते मामलों से फिर चर्चा में कोरोना, WHO की नजर; जानें भारत में क्या है स्थिति

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 06 Oct, 2026 01:13 PM
लंदन में बढ़ते मामलों से फिर चर्चा में कोरोना, WHO की नजर; जानें भारत में क्या है स्थिति

 नारी डेस्क:   कोरोना का नाम सुनते ही लोगों को 2020 का वह दौर याद आ जाता है, जब इस वायरस ने पूरी दुनिया की रफ्तार रोक दी थी। हालांकि अब स्थिति पहले जैसी नहीं है और कोरोना के साथ दुनिया काफी हद तक सामान्य जीवन जीना सीख चुकी है। इसके बावजूद वायरस लगातार बदल रहा है और समय-समय पर इसके नए वेरिएंट सामने आते रहते हैं। इन दिनों XFG वेरिएंट एक बार फिर चर्चा में है। ब्रिटेन और खासकर लंदन में इसके बढ़ते प्रसार की रिपोर्ट सामने आई है। WHO भी XFG को लगातार मॉनिटर कर रहा है। हालांकि फिलहाल उपलब्ध जानकारी में यह नहीं दिखता कि XFG दूसरे मौजूदा वेरिएंट्स की तुलना में ज्यादा गंभीर बीमारी पैदा कर रहा है।

लंदन में क्यों बढ़ी XFG की चर्चा?

ब्रिटेन में कोरोना के मामलों और अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों में बढ़ोतरी की रिपोर्ट सामने आई है। हालिया रिपोर्टों में लंदन में भी संक्रमण बढ़ने की बात कही गई है और कुछ मामलों की जीनोम सीक्वेंसिंग में XFG की पहचान हुई है। WHO के आंकड़ों के मुताबिक XFG यूरोप समेत कुछ क्षेत्रों में बढ़ रहा है। अगस्त 2026 तक उपलब्ध वैश्विक सीक्वेंसिंग डेटा में XFG सबसे ज्यादा रिपोर्ट किए जाने वाले वेरिएंट्स में शामिल था। हालांकि WHO का कहना है कि अभी तक उपलब्ध सबूतों से XFG से सार्वजनिक स्वास्थ्य पर दूसरे मौजूदा वेरिएंट्स की तुलना में अतिरिक्त जोखिम साबित नहीं हुआ है।

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क्या है XFG वेरिएंट?

XFG कोरोना वायरस का एक रिकॉम्बिनेंट वेरिएंट है। इसका मतलब है कि वायरस की अलग-अलग आनुवंशिक लाइनों के हिस्से आपस में मिलकर एक नई लाइन बना सकते हैं। WHO के अनुसार XFG की सबसे पहली पहचान 27 जनवरी 2025 को दर्ज हुई थी और जून 2025 में इसे Variant Under Monitoring यानी निगरानी वाले वेरिएंट की सूची में रखा गया। यह JN.1 से जुड़ी लाइन है। WHO की निगरानी सूची में XFG के साथ कुछ दूसरे वेरिएंट भी शामिल हैं। इसलिए सिर्फ XFG का नाम सामने आने का मतलब यह नहीं है कि कोई नई महामारी जैसी स्थिति बन गई है।

XFG के क्या लक्षण हो सकते हैं?

XFG से होने वाला संक्रमण भी सांस से जुड़ी दूसरी वायरल बीमारियों की तरह अलग-अलग लोगों में अलग तरीके से दिखाई दे सकता है। रिपोर्ट किए गए लक्षणों में गले में खराश, खांसी, जुकाम, नाक बहना, थकान और बुखार जैसी परेशानियां शामिल हो सकती हैं। कुछ लोगों में शरीर या मांसपेशियों में दर्द भी हो सकता है। वहीं कुछ संक्रमित लोगों में लक्षण बहुत हल्के हो सकते हैं या स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। इसलिए सिर्फ लक्षण देखकर यह तय करना संभव नहीं है कि संक्रमण XFG का है या किसी दूसरे वायरस का।

क्या XFG ज्यादा खतरनाक है?

अभी तक ऐसा पुख्ता प्रमाण नहीं है कि XFG दूसरे मौजूदा कोरोना वेरिएंट्स की तुलना में ज्यादा गंभीर बीमारी या मौत का कारण बन रहा है। WHO के मौजूदा आंकड़ों के अनुसार XFG सहित निगरानी में रखे गए प्रमुख वेरिएंट्स से सार्वजनिक स्वास्थ्य पर अतिरिक्त जोखिम का प्रमाण नहीं मिला है। हालांकि वायरस के बदलते स्वरूप को देखते हुए इसकी निगरानी जारी रखना जरूरी है। यानी फिलहाल XFG का नाम सुनकर घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन कोरोना को पूरी तरह नजरअंदाज करना भी सही नहीं होगा।

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भारत में क्या है कोरोना की स्थिति?

भारत में भी कोरोना वायरस के मामले समय-समय पर सामने आते रहते हैं। हालांकि किसी वेरिएंट की मौजूदगी का मतलब अपने आप यह नहीं होता कि देश में संक्रमण की बड़ी लहर आ गई है। WHO के अनुसार XFG दुनिया के कई हिस्सों में पाया जा रहा है और अगस्त 2026 तक के वैश्विक सीक्वेंसिंग आंकड़ों में इसकी हिस्सेदारी बढ़ी थी। लेकिन उपलब्ध आंकड़ों में इसे अधिक गंभीर बीमारी के जोखिम से नहीं जोड़ा गया है। भारत में अगर किसी व्यक्ति को खांसी, बुखार, गले में खराश, जुकाम या सांस लेने में परेशानी हो रही है, तो इसे सामान्य वायरल मानकर लगातार नजरअंदाज करने के बजाय जरूरत के अनुसार डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

किन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत

बुजुर्गों, कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों और पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों में किसी भी श्वसन संक्रमण के गंभीर होने का जोखिम सामान्य व्यक्ति की तुलना में ज्यादा हो सकता है।

ऐसे लोगों के लिए भीड़भाड़ वाली जगहों पर सावधानी रखना, बीमार होने पर दूसरों से दूरी बनाए रखना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार टीकाकरण या अन्य बचाव के उपाय अपनाना उपयोगी हो सकता है। WHO ने 2026 में भी उन लोगों के लिए नियमित COVID-19 टीकाकरण पर विचार करने की सलाह दी है, जिन्हें गंभीर बीमारी का सबसे ज्यादा खतरा है।

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घबराने की नहीं, सावधानी की जरूरत

कोरोना अब पहले की तरह पूरी तरह अनजान बीमारी नहीं है। इसके नए वेरिएंट सामने आना वायरस के बदलने की प्रक्रिया का हिस्सा है। XFG फिलहाल WHO की निगरानी में है और उपलब्ध आंकड़े इसे पहले के वेरिएंट्स से ज्यादा खतरनाक साबित नहीं करते। फिर भी अगर लगातार बुखार, सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, अत्यधिक कमजोरी या ऑक्सीजन से जुड़ी समस्या महसूस हो तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

यानी फिलहाल XFG को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधानी और निगरानी बनाए रखना जरूरी है।
 
  

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