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कैंसर के इलाज के बीच भावुक हुईं दीपिका कक्कड़, छलके आंसू, बोलीं- 'हमें बहुत लड़ना है'

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 04 Aug, 2026 01:52 PM
कैंसर के इलाज के बीच भावुक हुईं दीपिका कक्कड़, छलके आंसू, बोलीं- 'हमें बहुत लड़ना है'

नारी डेस्क: टीवी अभिनेत्री दीपिका कक्कड़ इन दिनों जिंदगी की सबसे कठिन लड़ाई लड़ रही हैं। लीवर कैंसर का पता चलने के बाद उनकी दो बड़ी सर्जरी हो चुकी हैं और अब उनका इलाज इन्फ्यूजन थेरेपी के जरिए जारी है। इस मुश्किल दौर में दीपिका लगातार हिम्मत के साथ आगे बढ़ रही हैं, लेकिन हाल ही में तीसरे इन्फ्यूजन के दौरान वह भावुक हो गईं। हॉस्पिटल में उन्होंने अपने दिल की बात साझा करते हुए कहा कि यह समय बेहद चुनौतीपूर्ण है, लेकिन हार मानना कोई विकल्प नहीं है।

तीसरे इन्फ्यूजन के लिए हॉस्पिटल पहुंचीं दीपिका

दीपिका के पति और अभिनेता शोएब इब्राहिम ने अपने यूट्यूब व्लॉग में इलाज से जुड़ी पूरी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि दीपिका को तीसरे इन्फ्यूजन के लिए हॉस्पिटल लेकर जाया गया था। इलाज शुरू होने से पहले उनके जरूरी मेडिकल टेस्ट किए गए और रिपोर्ट आने के बाद इन्फ्यूजन की प्रक्रिया शुरू हुई। इन्फ्यूजन पूरा होने के बाद शोएब ने जब दीपिका से उनकी तबीयत के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि इस बार वह शारीरिक से ज्यादा मानसिक और भावनात्मक रूप से खुद को भारी महसूस कर रही हैं।

'हर दिन एक नई चुनौती लेकर आता है'

दीपिका ने कहा कि वह जानती हैं कि एक पब्लिक फिगर होने की वजह से उनकी जिंदगी की हर छोटी-बड़ी बात लोगों तक पहुंच जाती है। लेकिन दुनिया में ऐसे अनगिनत लोग हैं जो उनसे कहीं ज्यादा कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस सफर ने उन्हें सिखाया है कि मुश्किल कितनी भी बड़ी क्यों न हो, इंसान को हिम्मत नहीं छोड़नी चाहिए। उनके मुताबिक हर दिन एक नई परेशानी सामने आती है। शरीर बीमारी से लड़ रहा होता है, दिमाग भी लगातार संघर्ष कर रहा होता है और अपनी इच्छाशक्ति को भी मजबूत बनाए रखना पड़ता है। इसके बावजूद लड़ते रहना ही सबसे जरूरी है।

'अपने बच्चों और अपनों के लिए मजबूत रहना होगा'

भावुक होते हुए दीपिका ने कहा कि वह सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि अपने बेटे रुहान, पति शोएब और पूरे परिवार के लिए मजबूत बने रहना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि मुश्किल वक्त में इंसान को अपने प्रियजनों की जिम्मेदारी और उनका प्यार ही आगे बढ़ने की ताकत देता है। उन्होंने कहा कि चाहे हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, लड़ाई जारी रखनी होगी और उम्मीद का साथ कभी नहीं छोड़ना चाहिए।

कैंसर मरीजों को देखकर मिलती है नई हिम्मत

दीपिका ने हॉस्पिटल के अपने अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बताया कि जब वह इलाज के लिए हॉस्पिटल जाती हैं तो वहां दूसरे कैंसर मरीजों को भी देखती हैं। कई मरीज लंबे समय से कीमोथेरेपी और इलाज से गुजर रहे होते हैं। दीपिका ने कहा कि ऐसे मरीजों को देखकर वह उनके लिए दुआ करती हैं और उनसे प्रेरणा भी लेती हैं। उन्हें लगता है कि जब इतने लोग पूरे साहस के साथ अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं, तो उन्हें भी मजबूत बने रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जरूरी है कि हम एक-दूसरे की हिम्मत बनें, भले ही हम एक-दूसरे को व्यक्तिगत रूप से न जानते हों।

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इलाज के बाद परिवार के साथ बिताया समय

तीसरे इन्फ्यूजन के बाद दीपिका और शोएब हॉस्पिटल से निकलकर डिनर के लिए गए। इस दौरान उन्होंने अपने बेटे रुहान को भी वहीं बुला लिया। दीपिका की मां भी उनके साथ मौजूद थीं। इलाज के बीच परिवार के साथ बिताया गया यह समय उनके लिए मानसिक राहत लेकर आया।

बेटे रुहान ने भी हालात के साथ किया खुद को एडजस्ट

शोएब इब्राहिम ने बताया कि इस पूरे कठिन दौर में उनका बेटा रुहान भी काफी समझदारी दिखा रहा है। हालांकि वह अपनी मां को बहुत मिस करता है, लेकिन परिस्थितियों के मुताबिक खुद को ढालने की कोशिश कर रहा है। परिवार की प्राथमिकता इस समय दीपिका का इलाज और उनका मनोबल बनाए रखना है।

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परिवार पर एक साथ आई कई मुश्किलें

दीपिका और शोएब का परिवार पिछले कुछ समय से लगातार मुश्किल दौर से गुजर रहा है। कुछ समय पहले शोएब इब्राहिम के पिता को ब्रेन हेमरेज हुआ था, जिसके बाद उन्हें लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा। अब उन्हें घर तो ले आया गया है, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें पूरी तरह बेड रेस्ट की सलाह दी है। इसी बीच दीपिका की मां भी संक्रमण की वजह से कुछ दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहीं। हालांकि अब उनकी तबीयत पहले से बेहतर बताई जा रही है।

हिम्मत और उम्मीद के साथ आगे बढ़ रही हैं दीपिका

कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझने के बावजूद दीपिका कक्कड़ लगातार सकारात्मक सोच के साथ इलाज करा रही हैं। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए यही संदेश दिया कि मुश्किल चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, इंसान को हिम्मत और उम्मीद का साथ नहीं छोड़ना चाहिए। उनका मानना है कि परिवार का साथ, मजबूत इच्छाशक्ति और सकारात्मक सोच हर कठिन लड़ाई को लड़ने की ताकत देती है।
  
 
 
 

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