नारी डेस्क: मानसून के बीच देश के कई हिस्सों में स्वाइन फ्लू यानी H1N1 के मामले बढ़ते नजर आ रहे हैं। दिल्ली, कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और चंडीगढ़ समेत कई राज्यों से संक्रमण के नए मामले सामने आए हैं। कुछ जगहों पर इस साल के आंकड़े पिछले साल की तुलना में ज्यादा हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग भी सतर्क है। हालांकि, बढ़ते मामलों के बीच राहत की बात यह है कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने फिलहाल किसी नए या ज्यादा खतरनाक H1N1 स्ट्रेन की पहचान से इनकार किया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस समय फैल रहा वायरस पहले से मौजूद मौसमी इन्फ्लुएंजा का ही हिस्सा है।
दिल्ली में 2,600 से ज्यादा H1N1 मरीज
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पिछले कुछ दिनों में H1N1 मामलों में तेजी देखी गई है। 27 अगस्त तक के दिल्ली सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, 24 घंटे में 166 नए H1N1 मामले सामने आए, जिसके बाद राजधानी में इस साल कुल संक्रमितों की संख्या 2,612 पहुंच गई। इसी दौरान कुल Influenza-A मामलों की संख्या 3,300 तक पहुंच गई। दिल्ली में संक्रमण बढ़ने के बाद अस्पतालों को भी तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों में आइसोलेशन बेड की व्यवस्था बढ़ाने पर जोर दिया है। डॉक्टरों का कहना है कि फ्लू के लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और जरूरत पड़ने पर समय पर जांच और इलाज कराना जरूरी है।

कर्नाटक में 4 हजार से ज्यादा मामले
कर्नाटक में भी H1N1 और मौसमी इन्फ्लुएंजा के मामलों की संख्या काफी ज्यादा है। 22 अगस्त तक राज्य में 4,212 लैब से पुष्टि किए गए इन्फ्लुएंजा मामले दर्ज किए गए थे। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग ने इसे किसी असामान्य प्रकोप के बजाय मौसमी पैटर्न का हिस्सा बताया है। कर्नाटक में आमतौर पर इन्फ्लुएंजा के दो पीक सीजन देखे जाते हैं। पहला जनवरी से मार्च के बीच और दूसरा जुलाई से सितंबर के दौरान आता है। मानसून के साथ दूसरे दौर में संक्रमण बढ़ना सामान्य माना जाता है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है, लेकिन फिलहाल घबराने जैसी स्थिति नहीं बताई गई है।
महाराष्ट्र में पिछले साल का आंकड़ा भी पार
महाराष्ट्र में इस साल H1N1 के मामले पिछले साल के पूरे आंकड़े को पीछे छोड़ चुके हैं। 21 अगस्त तक राज्य में 1,109 H1N1 मरीज सामने आए थे, जबकि पूरे 2025 में 942 मामले दर्ज किए गए थे। यानी इस साल अभी अगस्त में ही पिछले साल का आंकड़ा पार हो गया। राज्य में मुंबई और पुणे संक्रमण के प्रमुख केंद्र बने हुए हैं। दोनों शहरों में मिलकर महाराष्ट्र के कुल H1N1 मामलों का करीब 65 फीसदी हिस्सा दर्ज किया गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, मानसून के दौरान फ्लू के मामलों में बढ़ोतरी आम बात है, लेकिन इस साल संक्रमण का आंकड़ा पिछले सालों की तुलना में ज्यादा है।
राजस्थान में अगस्त में सबसे ज्यादा केस
राजस्थान में भी अगस्त के दौरान H1N1 मामलों में अचानक बढ़ोतरी देखने को मिली है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में अब तक 55 मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। यह 2026 में किसी एक महीने में सामने आए मामलों की सबसे बड़ी संख्या है। जनवरी से अगस्त 2026 तक राजस्थान में H1N1 के कुल 146 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें जनवरी में 2, फरवरी में 3, मार्च में 20, अप्रैल में 22, मई में 25, जून में 14, जुलाई में 5 और अगस्त में 55 मामले सामने आए। राज्य के स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, अभी तक किसी नए या ज्यादा खतरनाक H1N1 स्ट्रेन के फैलने की पुष्टि नहीं हुई है।
लखनऊ में भी मिले नए मरीज
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी H1N1 संक्रमण को लेकर स्वास्थ्य विभाग सतर्क है। बलरामपुर अस्पताल में H1N1 संक्रमित एक महिला की मौत के एक दिन बाद दो और मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। दोनों मरीजों को अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया और उनकी हालत स्थिर बताई गई। RT-PCR जांच में संक्रमण की पुष्टि हुई। राज्य सरकार ने सभी 75 जिलों को निगरानी बढ़ाने और फ्लू जैसे मामलों पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं।

गुरुग्राम में 12 मामले सामने आए
हरियाणा के गुरुग्राम में भी H1N1 के 12 मामले दर्ज किए गए हैं। मानसून के दौरान संक्रमण बढ़ने के बीच स्वास्थ्य विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए है। लोगों को फ्लू जैसे लक्षण सामने आने पर लापरवाही नहीं करने और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दी जा रही है।
चंडीगढ़ में अब तक 14 मरीज
चंडीगढ़ में भी इस साल H1N1 के मामले सामने आए हैं। अगस्त में अब तक 7 मरीजों की पुष्टि हुई है, जिसके बाद 2026 में शहर में कुल मामलों की संख्या 14 हो गई। आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में सबसे ज्यादा मरीज मिले। इससे पहले जून और जुलाई में एक-एक, मई में दो, अप्रैल में एक और मार्च में दो मामले दर्ज किए गए थे।
कोलकाता में भी बढ़ी फ्लू की रफ्तार
कोलकाता में भी मानसून के दौरान H1N1 के मामलों में तेजी देखने को मिली। 22 जुलाई तक सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, करीब दो हफ्तों के दौरान अस्पतालों में स्वाइन फ्लू के मरीजों की संख्या बढ़ी थी। कुछ मरीजों में तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी, शरीर में तेज दर्द और डायरिया जैसे लक्षण देखे गए। शहर के पीयरलेस अस्पताल में भी लगातार कई हफ्तों से H1N1 के मरीज पहुंच रहे थे। एक दिन में 9 मरीजों को अस्पताल में भर्ती किए जाने की जानकारी सामने आई थी, जबकि कई अन्य का इलाज ओपीडी में चल रहा था।
क्या किसी नए H1N1 स्ट्रेन से फैला है संक्रमण
देश के अलग-अलग हिस्सों में मामलों में बढ़ोतरी के बाद लोगों के बीच नए वायरस या नए स्ट्रेन को लेकर भी चिंता बढ़ी है। हालांकि, ICMR ने फिलहाल ऐसी किसी आशंका को खारिज किया है। ICMR के मुताबिक, भारत में इस समय फैल रहा Influenza A (H1N1) pdm09 वायरस कोई नया स्ट्रेन नहीं है। इसकी मौजूदगी देश में 2025 से है और मौजूदा बढ़ोतरी को मौसमी इन्फ्लुएंजा के पैटर्न से जोड़ा गया है। इसलिए विशेषज्ञों ने लोगों से घबराने की बजाय सामान्य सावधानियां बरतने की अपील की है।

किन बातों का रखें ध्यान
H1N1 एक संक्रामक श्वसन संक्रमण है और इसके लक्षण सामान्य फ्लू जैसे हो सकते हैं। बुखार, खांसी, गले में खराश, बदन दर्द और थकान जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और अन्य संवेदनशील लोगों को लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। विशेषज्ञों की सलाह है कि भीड़भाड़ वाली जगहों पर सावधानी बरतें, हाथों की साफ-सफाई का ध्यान रखें और फ्लू जैसे लक्षण होने पर खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर की सलाह लें।
फिलहाल स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि देश में H1N1 मामलों में बढ़ोतरी जरूर हुई है, लेकिन किसी नए और ज्यादा खतरनाक स्ट्रेन के सामने आने की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए घबराने की जरूरत नहीं, लेकिन संक्रमण से बचाव को लेकर लापरवाही भी नहीं करनी चाहिए।