नारी डेस्क : देश के सबसे बड़े अर्धसैनिक बल केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में जवानों के प्रमोशन से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए एक अहम कदम उठाया जा सकता है। बल में करीब तीन दशक पहले खत्म किए गए लांस नायक और नायक के पदों को दोबारा शुरू करने की योजना पर विचार किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य कांस्टेबलों को प्रमोशन के अधिक अवसर देना, लंबे समय से चली आ रही पदोन्नति संबंधी समस्याओं को कम करना और जवानों का मनोबल बढ़ाना है।
1997 में खत्म कर दिए गए थे लांस नायक और नायक के पद
सीआरपीएफ में लांस नायक और नायक के पदों को वर्ष 1997 में केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश के बाद समाप्त कर दिया गया था। इसके तहत लांस नायक का पद कांस्टेबल और नायक का पद हेड कांस्टेबल के पद के साथ मिला दिया गया था। हालांकि, भारतीय सेना में ये दोनों रैंक अब भी प्रचलित हैं। अब इन पदों को दोबारा शुरू करने के प्रस्ताव पर जवानों और संबंधित अधिकारियों की राय मांगी जा रही है। इसके लिए सीआरपीएफ की निचली इकाइयों को विशेष सैनिक सम्मेलन और बैठकें आयोजित कर हितधारकों के सुझाव जुटाने के निर्देश दिए गए हैं।

18 अक्टूबर तक मुख्यालय भेजे जाएंगे सुझाव
प्रस्ताव को लेकर जमीनी स्तर पर मिलने वाले सुझावों को पहले सेक्टर स्तर पर एकत्रित किया जाएगा। इसके बाद इन्हें संकलित कर 18 अक्टूबर तक सीआरपीएफ मुख्यालय भेजने की प्रक्रिया तय की गई है, ताकि आगे की कार्रवाई के लिए सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्ताव रखा जा सके। इस पहल के जरिए यह समझने की कोशिश की जा रही है कि लांस नायक और नायक के पदों को दोबारा शुरू करने से जवानों के करियर और प्रमोशन की संभावनाओं पर क्या असर पड़ सकता है।
अभी पहले प्रमोशन के लिए करना पड़ता है 22 से 25 साल इंतजार
सीआरपीएफ में प्रमोशन में देरी एक बड़ी समस्या मानी जा रही है। करीब 3.25 लाख कर्मियों वाले इस बल में कांस्टेबलों को औसतन 22 से 25 साल बाद पहली पदोन्नति मिल पाती है। लंबे समय तक एक ही पद पर बने रहने के कारण जवानों में असंतोष और निराशा बढ़ने की बात सामने आती रही है। प्रस्ताव के मुताबिक, लांस नायक और नायक के पद दोबारा शुरू होने से कांस्टेबलों को हेड कांस्टेबल बनने से पहले प्रमोशन के दो अतिरिक्त अवसर मिल सकते हैं। इससे उनकी सेवा में आगे बढ़ने की संभावनाएं बेहतर होने और मनोबल बढ़ने की उम्मीद है।
क्या होगी प्रमोशन की संभावित व्यवस्था?
प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, जवान के कांस्टेबल के रूप में भर्ती होने के बाद लगभग पांच साल में लांस नायक, 10 साल में नायक और आगे चलकर हेड कांस्टेबल बनने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, यह व्यवस्था प्रस्ताव का हिस्सा है और इसके लागू होने, सेवा संबंधी नियमों तथा पदोन्नति की वास्तविक समय-सीमा पर अंतिम निर्णय संबंधित प्राधिकारी की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगा।

अग्निवीरों को आकर्षित करने की भी कोशिश
लांस नायक और नायक के पद दोबारा शुरू करने की योजना को सेना से सेवानिवृत्त होने वाले अग्निवीरों की भर्ती के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना के तहत सेना, नौसेना और वायुसेना में चार साल के लिए भर्ती किए गए अग्निवीरों का पहला बैच इस वर्ष सेवा अवधि पूरी कर रहा है। इसके बाद पात्र अग्निवीर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) में भर्ती के अवसर तलाश सकते हैं। वर्तमान में सीएपीएफ में कांस्टेबलों की वर्दी पर वरिष्ठ कांस्टेबल के लिए अनौपचारिक तौर पर इस्तेमाल होने वाला रैंक-चिह्न लगाने की व्यवस्था है, जिसे लांस नायक के समकक्ष माना जाता है। हालांकि, नायक के पद के लिए ऐसी व्यवस्था मौजूद नहीं है।
ऐसे में सीआरपीएफ में लांस नायक और नायक के पदों को दोबारा शुरू करने का प्रस्ताव न केवल जवानों के प्रमोशन से जुड़ी समस्याओं को दूर करने, बल्कि बल में करियर के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में भी अहम साबित हो सकता है। फिलहाल, प्रस्ताव पर सुझाव जुटाए जा रहे हैं और अंतिम निर्णय का इंतजार है।