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बार-बार डकार आने के है ये 6 कारण

  • Edited By Anjali Rajput,
  • Updated: 07 Mar, 2019 01:13 PM
बार-बार डकार आने के है ये 6 कारण

डकार आना एक नेचुरल क्रिया है, जो किसी भी समय आ सकती हैै। बहुत से लोगों को ऐसा लगता है कि खाना खाने के बाद डकार आ गई तो इसका मतलब है कि खाना पच गया लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं है। कुछ भी खाने के बाद डकार आना डाइजेशन के प्रोसेस का एक अहम हिस्सा है लेकिन बार-बार डकार आने के पीछे कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं। अगर डकार ज्यादा आए तो ये कई बार बीमारियों का संकेत भी हो सकता है।


ऐरोफेजिया हैं खास वजह

अक्सर ऐसा होता है कि हम खाना खाते समय ज्यादा हवा पेट में निगल जाते हैं और फिर डकारें आने लगती हैं। इस प्रॉब्लम को ऐरोफेजिया कहते हैं। कुछ खाते या पीते समय हवा पेट में चले जाने से अक्सर ऐरोफेजिया की प्रॉब्लम पैदा हो जाती है। इस प्रॉब्लम से बचने के लिए छोटे निवाले लें और मुंह बंद करके धीरे-धीरे खाने को चबा कर निगलें।
 

बिगड़ता डाइजेशन

डाइजेशन में मदद करने वाले कुछ बैक्टीरिया पेट में मौजूद होते हैं। इनका संतुलन बिगड़ने पर भी गैस बनती है और डकार आती है। बार-बार डकार आने से एसिड रिफ्लक्स, एसिडिटी और कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। 

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इरिटेबल बाउल सिंड्रोम 

इस बीमारी में रोगी को कब्ज, पेट दर्द, मरोड़ व दस्त आदि हो सकते हैं। साथ ही इस रोग का एक बड़ा लक्षण बहुत ज्यादा डकार आना भी होता है। इस समस्या के अलावा पेप्टिक अल्सर के कारण भी ज्यादा डकार आ सकती है। 
  

बदहजमी या ज्यादा खाना

कब्ज या बदहज़मी की वजह से भी ज्यादा डकार आने की प्रॉब्लम होती है। ऐसे में डकार आने के साथ पेट में दर्द भी हो सकता है। कार्बोनेटेड ड्रिंक्स, जंक फूड, गोभी, मटर, दालें जैसे कई फूड पेट में गैस बनाते हैं। इन्हें खाने-पीने के बाद भी ज्यादा डकार आती है। 

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डिप्रेशन और बदलाव

स्ट्रैस कई प्रॉब्लम्स का अकेला कारण होता है। स्ट्रैस या किसी बड़े बदलाव का असर हमारे पेट पर भी पड़ता है। कई अध्ययनों में भी ये बात सामने आई है कि लगभग 65 प्रतिशत मामलों में मूड में अचानक या बड़ा बदलाव या तनाव का बढ़ना ज्यादा डकार आने का कारण बनता है।

 

गैस्ट्रोसोफेजिअल रिफ्लक्स डिज़ीज़

कई बार गैस्ट्रोसोफेजिअल रिफ्लक्स डिज़ीज़ (जीइआरडी) या सीने में तेज जलन के कारण भी ज्यादा डकार आती हैं। इस बीमारी में आंतों में जलन होने लगती है और आहार नलिका (फूड पाइप) में एसिड बनने लगता है। इसमें बचाव के लिए खानपान और जीवनशैली में कई पॉजिटिव और हेल्दी बदलाव करने की जरूरत होती है।

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