07 MAYTHURSDAY2026 8:42:37 PM
Life Style

सेना का चहेता है ये "नन्हा जवान", ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सेवा में जुटा रहा 10 साल का  बच्चा

  • Edited By vasudha,
  • Updated: 07 May, 2026 05:11 PM
सेना का चहेता है ये

नारी डेस्क: भारत द्वारा पहलगाम आतंकवादी हमले के जवाब में पाकिस्तान स्थित आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ पिछले साल मई में चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पंजाब के दूर-दराज के गांव के एक 10 वर्षीय बच्चे ने सेना की मदद कर पूरे देश को प्रेरित किया और देशभक्ति की मिसाल पेश की। पंजाब के फिरोजपुर के तरणवाली गांव के श्रवण सिंह  ने लगभग एक साल पहले पाकिस्तान के साथ बढ़ते तनाव के बीच भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्थित अपने गांव में तैनात सेना के जवानों की स्वेच्छा से सेवा की, और उन्हें अपने घर से चाय, पानी, दूध और लस्सी लाकर दी। 

PunjabKesari
श्रवण लगातार करता रहा  सेना की सेवा

ऑपरेशन सिंदूर की सालगिरह पर श्रवण  ने कहा कि उसने सिर्फ अपने दिल की बात सुनी। उन्होंने कहा- ''जब ऑपरेशन सिंदूर शुरू हुआ, तो सैनिक हमारे गांव आए मुझे लगा कि मुझे उनकी सेवा करनी चाहिए क्योंकि वे हमारे लिए लड़ रहे थे।'' गांव में तैनात सैनिकों के बीच श्रवण  पानी, चाय और छाछ के साथ मनमोहक मुस्कान की वजह से अजीज बन गया था। श्रवण  ने कहा- ''मुझे कभी उम्मीद नहीं थी कि मुझे इसके लिए सम्मानित किया जाएगा।'' श्रवण के पिता सोना सिंह ने कहा कि परिवार को अब भी विश्वास नहीं हो रहा है कि उनके बेटे को इतना सम्मान मिला है। उन्होंने कहा- ''हम भारतीय सेना के बहुत आभारी हैं कि उन्होंने उसे प्रोत्साहित किया और उसके योगदान को सराहा। हमने कभी सोचा भी नहीं था कि हमारा बेटा एक दिन भारत के राष्ट्रपति से पुरस्कार प्राप्त करेगा और उसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिलने का अवसर मिलेगा।'' 


श्रवण के हैं बहुत बड़े सपने

पिता ने बताया कि श्रवण को विभिन्न कार्यक्रमों और सार्वजनिक आयोजनों में आमंत्रित किया जाता है, लेकिन वह अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे रहा है और भविष्य में सशस्त्र बलों में शामिल होने का सपना देखता है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत-पाकिस्तान तनाव के मद्देनजर श्रवण के प्रयासों को काफी सराहना मिली। उस समय उसने दुश्मन के ड्रोन हमले और सीमा पार से गोलाबारी के खतरे की परवाह किये बिना अग्रिम मोर्चे पर तैनात सैनिकों की सेवा की और उनके शिविरों में जाकर पानी, छाछ और चाय आदि पहुंचायी। भीषण गर्मी और तनाव के बावजूद 11 साल के इस बच्चे ने लंबे समय से इलाके में तैनात सैनिकों की सेवा की। उसके इस जज्बे की सेना के अधिकारियों के साथ-साथ ग्रामीणों भी भूरि-भूरि प्रशंसा की। उसकी देशभक्ति की भावना और निस्वार्थ समर्पण को सम्मानित करते हुए सेना की गोल्डन एरो डिवीजन ने उसे ''सबसे कम उम्र के असैन्य योद्धा'' के खिताब से नवाजा। 

PunjabKesari
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी कर चुकी हैं सम्मानित

सेना ने पिछले साल जुलाई में श्रवण  की शिक्षा का खर्च भी उठाने का फैसला किया ताकि वित्तीय बाधाएं उसके सपने को पूरा करने में रुकावट न बनें। उसका सपना सेना में शामिल होना है। पिछले साल दिसंबर में, श्रवण  की प्रेरणादायक सेवा राष्ट्रीय स्तर पर तब चर्चा में आई जब उसे नयी दिल्ली में आयोजित एक समारोह के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 'प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार' से सम्मानित किया। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, भारतीय सेना ने पिछले साल छह मई की देर रात पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में नौ आतंकी ठिकानों पर मिसाइल हमले किए, जिनमें जैश-ए-मोहम्मद का गढ़ बहावलपुर और मुरीदके में लश्कर-ए-तैबा का अड्डा शामिल था।
 

Related News