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ऑपरेशन के बाद भी बार- बार हो जाती है बवासीर, जानिए मरीज की किस गलती के कारण होता है ऐसा?

  • Edited By vasudha,
  • Updated: 30 Jul, 2026 02:06 PM
ऑपरेशन के बाद भी बार- बार हो जाती है बवासीर, जानिए मरीज की किस गलती के कारण होता है ऐसा?

नारी डेस्क: पाइल्स, जिसे बवासीर (hemorrhoids) भी कहा जाता ह  मलाशय के निचले हिस्से और गुदा (anus) की नसों में सूजन की समस्या है। हालांकि यह समस्या आम हो सकती है, लेकिन इससे पीड़ित लोगों के लिए यह काफी तकलीफदेह और परेशान करने वाली हो सकती है।  यह समस्या कई तरह से हो सकती है, जिसमें मुख्य रूप से बाहरी या अंदरूनी बवासीर शामिल हैं। वैसे तो इस समस्या को सर्जरी के माध्यम से दूर किया जा सकता है, लेकिन कई बार सर्जरी के बाद भी यह तकलीफ दे सकती है। 

 

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बवासीर के ऑपरेशन की कब पड़ती है जरूरत?

पाइल्स होने के मुख्य कारण व्यक्ति के बाउल मूवमेंट धीमा होना, कब्ज, कमोड या मल त्याग करते समय अधिक देर तक बैठना, आहार में फाइबर कम लेना और अधिक वजन उठाने का काम करना आदि माने जाते हैं। डॉक्टर्स और एक्सपर्ट्स बताते हैं कि जब दूसरे इलाज असरदार नहीं होते, तो हेमोरोइडेक्टोमी (बवासीर का ऑपरेशन) को सबसे अच्छा इलाज माना जाता है। हालांकि, अगर डॉक्टर की सलाह का सख्ती से पालन न किया जाए, तो इस तरीके से भी दिक्कतें हो सकती हैं। जैसे की  ब्लीडिंग (खून बहना) यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें सर्जरी वाली जगह पर थ्रोम्बोसिस (खून का थक्का जमना) हो जाता है, जो छोटा या बड़ा हो सकता है। यह दिक्कत कई कारणों से हो सकती है। 


गर्म पानी की सिकाई का फायदा

अस्थायी एनल स्टेनोसिस (गुदा का सिकुड़ना) उन दिक्कतों में से एक है जो बवासीर की सर्जरी के बाद आसानी से हो सकती हैं। यह बहुत आम समस्याओं में से एक है क्योंकि इलाज के दौरान गुदा की कंट्रोल करने वाली मांसपेशियां काम करना बंद कर देती हैं। समय के साथ यह समस्या पूरी तरह ठीक हो सकती है, इसलिए ज़्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है। इस लक्षण के दौरान ठीक होने में लगने वाले समय को कम करने के लिए, एक्सपर्ट मरीज़ों को चीगोंग (qigong) या एक्यूपंक्चर करने की सलाह देते हैं।  मरीज़ों को बवासीर वाले हिस्से को गर्म पानी या पारंपरिक दवा से सेंकना चाहिए ताकि ब्लड सर्कुलेशन और मांसपेशियों के ठीक होने की प्रक्रिया आसान हो सके।
 

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सर्जरी के बाद की दिक्कतों को कम करने के तरीके

मरीज़ों को ज़्यादा काम और भारी कसरत से बचना चाहिए क्योंकि इससे सर्जरी के नतीजों पर असर पड़ सकता है। इंफेक्शन से बचने के लिए गुदा (एनस) की नियमित सफाई करें। पानी के अलावा, मरीज सफाई के लिए अच्छी एंटीबैक्टीरियल खूबियों वाली चीज़ों जैसे लेट्यूस, ग्रीन टी की पत्तियां आदि का इस्तेमाल कर सकते हैं। सर्जरी के बाद ठीक होने की प्रक्रिया में मदद के लिए सही डाइट अपनाएं। मरीज़ों को पर्याप्त फाइबर और ज़रूरी विटामिन पाने के लिए कई तरह की हरी सब्ज़ियां और ताज़े फल खाने चाहिए। यह कब्ज़ को रोकने का भी एक असरदार तरीका है जिसे मरीज़ों को नजरअंदाज़ नहीं करना चाहिए। साथ ही, डाइट में मसालेदार खाना, ज़्यादा फैट वाला खाना और शराब जैसी चीज़ों को कम करना ज़रूरी है, क्योंकि ये पाचन के लिए अच्छे नहीं होते। संभावित दिक्कतों से बचने के लिए डॉक्टर की बताई दवाएं लें। 


बवासीर (पाइल्स) के लक्षण

बवासीर के लक्षण इसके प्रकार और गंभीरता के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं। बवासीर के कुछ आम लक्षण इस प्रकार हैं:

खून आना: मल त्यागते समय बिना दर्द के खून आना, जो अक्सर चमकीले लाल रंग का होता है।

खुजली या जलन: सूजन के कारण गुदा के आसपास बेचैनी महसूस होना।

सूजन: गुदा के पास गांठ का होना सूजी हुई नसों का संकेत हो सकता है।

दर्द: खासकर मल त्यागते समय दर्द होना, जो गंभीर बवासीर का संकेत हो सकता है।

मल त्यागने की आदतों में बदलाव: मल त्यागने में कठिनाई या बार-बार मल त्यागने की इच्छा महसूस हो सकती है।

समय पर इलाज के लिए इन लक्षणों की जानकारी होना बहुत ज़रूरी है। कई मरीज़ शर्म के कारण मदद लेने में देरी करते हैं, लेकिन लक्षणों को पहचानने से तुरंत इलाज और राहत मिल सकती है।

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