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Navratri के तीसरे दिन करें मां चंद्रघंटा की पूजा, जानें मंत्र और पूजा विधि

  • Edited By Monika,
  • Updated: 20 Mar, 2026 04:56 PM
Navratri के तीसरे दिन करें मां चंद्रघंटा की पूजा, जानें मंत्र और पूजा विधि

नारी डेस्क : चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन मां चंद्रघंटा को समर्पित होता है, जो देवी दुर्गा का वीर और शक्तिशाली स्वरूप हैं। साल 2026 में यह तिथि 21 मार्च को पड़ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन मां की पूजा करने से भय, तनाव और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

कौन हैं मां चंद्रघंटा?

मां चंद्रघंटा, मां दुर्गा का तीसरा स्वरूप हैं। इनके मस्तक पर अर्धचंद्र घंटी के आकार में सुशोभित होता है, इसी कारण इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। मां चंद्रघंटा दस भुजाओं में दिव्य अस्त्र-शस्त्र धारण किए बाघ पर सवार रहती हैं और उनकी घंटे की ध्वनि से नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है। उनकी पूजा करने से व्यक्ति के भीतर साहस, आत्मविश्वास और मानसिक संतुलन में वृद्धि होती है।

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नवरात्रि के तीसरे दिन का महत्व

नवरात्रि का तीसरा दिन एक्शन और आत्मविश्वास का दिन माना जाता है।
पहला दिन: संकल्प
दूसरा दिन: अनुशासन
तीसरा दिन: साहस के साथ आगे बढ़ना
इस दिन ग्रे रंग पहनना शुभ माना जाता है, जो स्थिरता और संतुलन का प्रतीक है।

मां चंद्रघंटा पूजा विधि (Step-by-Step)

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें
पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें
मां की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें
रोली, अक्षत, फूल, धूप और दीप अर्पित करें
“ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें
अंत में मां की आरती करें।

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मां चंद्रघंटा के प्रिय भोग

मां चंद्रघंटा को दूध से बने व्यंजन अत्यंत प्रिय माने जाते हैं। भक्त उन्हें भोग में खीर, मावा से बनी मिठाइयां, दूध और फल अर्पित करते हैं, जिससे माता प्रसन्न होती हैं। इसके साथ ही गुलाबी रंग के फूल चढ़ाना भी बेहद शुभ माना जाता है, जो भक्ति और श्रद्धा का प्रतीक है।

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शक्तिशाली मंत्र (Chandraghanta Mantra)

इन मंत्रों का जाप करने से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है
या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमो नमः।।
पिंडज प्रवरारूढा, चंडकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं, चंद्रघंटेति विश्रुता।।
ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥

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मां चंद्रघंटा की कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब असुर राजा महिषासुर ने देवताओं पर आक्रमण किया, तब सभी देवताओं ने त्रिमूर्ति (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) से मदद मांगी। उनके तेज से मां चंद्रघंटा प्रकट हुईं और उन्होंने दानवों का संहार किया।

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क्यों करें मां चंद्रघंटा की पूजा?

डर और चिंता से मुक्ति
आत्मविश्वास में वृद्धि
नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा
जीवन में सफलता और शांति।

नवरात्रि का तीसरा दिन केवल पूजा का नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और साहस जगाने का दिन है। मां चंद्रघंटा की आराधना से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
 

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