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मौनी अमावस्या पर सिर्फ मौन रखने से बदल सकती है जीवन की दिशा, जानें कैसे

  • Edited By Monika,
  • Updated: 18 Jan, 2026 01:09 PM
मौनी अमावस्या पर सिर्फ मौन रखने से बदल सकती है जीवन की दिशा, जानें कैसे

नारी डेस्क : सनातन धर्म में मौनी अमावस्या को मौन, संयम और आत्मशुद्धि से जुड़ा अत्यंत पवित्र पर्व माना गया है। यह दिन आत्मचिंतन, साधना और मानसिक संतुलन के लिए विशेष महत्व रखता है। वर्ष 2026 में मौनी अमावस्या 18 जनवरी की रात 12:03 बजे से शुरू होकर 19 जनवरी की रात 1:21 बजे तक रहेगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन मौन व्रत (Maun Vrat) धारण करने से मन, वाणी और कर्म तीनों की शुद्धि होती है। शास्त्रों में कहा गया है कि मौन व्यक्ति को बाहरी शोर और मानसिक विक्षेपों से दूर करके भीतर की शांति से जोड़ता है। इसी कारण मौनी अमावस्या को आध्यात्मिक उन्नति और मानसिक शांति का श्रेष्ठ अवसर माना गया है।

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मौनी अमावस्या पर मौन व्रत का धार्मिक महत्व

मौनी अमावस्या पर मौन व्रत का सीधा संबंध वाणी संयम और आत्मनियंत्रण से है। शास्त्रों के अनुसार, वाणी से उत्पन्न क्रोध, कटु शब्द और असंयम व्यक्ति के कर्म बंधन को मजबूत करते हैं। जब साधक मौन धारण करता है, तो वाणी के साथ-साथ मन भी स्वतः शांत होने लगता है। अमावस्या तिथि को अंतर्मुखी ऊर्जा का प्रतीक माना गया है। इस दिन मौन रखने से साधक आत्मा की गहराइयों में उतरकर स्वयं का अवलोकन कर पाता है। पितृ तर्पण, स्नान और साधना के साथ किया गया मौन व्रत मानसिक विकारों को शांत करता है। यही कारण है कि ऋषि-मुनियों की परंपरा में मौनी अमावस्या को मौन साधना का श्रेष्ठ दिन कहा गया है।

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मौन व्रत से मिलने वाले आध्यात्मिक लाभ (Mauni Amavasya 2026 Silence Benefits)

मौनी अमावस्या पर किया गया मौन व्रत साधक को कई गहरे आध्यात्मिक लाभ प्रदान करता है। मौन से मन की चंचलता कम होती है और ध्यान में स्थिरता आती है। जब शब्दों का त्याग किया जाता है, तब चेतना अधिक जाग्रत होती है और व्यक्ति अपने भीतर छिपे संस्कारों, भावनाओं और विचारों को स्पष्ट रूप से समझ पाता है। शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि मौन व्रत से कर्म दोष शिथिल होते हैं और आत्मा पर जमी अशुद्धियां धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं। यह व्रत व्यक्ति में धैर्य, आत्मसंयम और संतुलन को विकसित करता है, जिससे जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण बनता है।

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मानसिक शांति और जीवन संतुलन में मौन की भूमिका (Mental Peace on Mauni Amavasya)

मौनी अमावस्या का मौन व्रत केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और जीवन संतुलन का प्रभावी उपाय भी है। मौन से तनाव कम होता है और विचारों में स्पष्टता आती है। जब व्यक्ति बोलने के बजाय सुनने और समझने पर ध्यान देता है, तो उसके निर्णय अधिक संतुलित और विवेकपूर्ण हो जाते हैं। इस दिन का मौन व्रत व्यक्ति को क्रोध, जल्दबाजी और नकारात्मक भावनाओं से दूर रहने की प्रेरणा देता है। इसका प्रभाव पारिवारिक और सामाजिक जीवन में भी दिखाई देता है, जहां संवाद अधिक शांत और सकारात्मक हो जाता है। धार्मिक दृष्टि से देखा जाए तो मौनी अमावस्या का मौन व्रत जीवन को सरल, शांत और आत्मकेंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया है।

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मौनी अमावस्या पर रखा गया मौन व्रत व्यक्ति को बाहरी शोर से दूर कर भीतर की शांति से जोड़ता है। यह दिन आत्मशुद्धि, मानसिक संतुलन और आध्यात्मिक जागरूकता का अनुपम अवसर प्रदान करता है। यदि श्रद्धा और संयम के साथ मौन का पालन किया जाए, तो इसका प्रभाव केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि जीवन की दिशा को सकारात्मक रूप से बदल सकता है।
 

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