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राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में जांच को बड़ा झटका, डिलीट हुआ CCTV बैकअप

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 20 Jun, 2026 11:52 AM
राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में जांच को बड़ा झटका, डिलीट हुआ CCTV बैकअप

नारी डेस्क:  अयोध्या के राम जन्मभूमि मंदिर में सामने आए चर्चित चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) को एक बड़ा झटका लगा है। जांच के दौरान जिस सीसीटीवी फुटेज से कई अहम सुराग मिलने की उम्मीद थी, वह अब उपलब्ध नहीं है। तकनीकी कारणों से मंदिर परिसर और ट्रस्ट कार्यालय में लगे कैमरों का 45 दिन पुराना बैकअप अपने आप डिलीट हो चुका है, जिससे जांच एजेंसियों के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।

CCTV फुटेज से थी कई सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद

चढ़ावा चोरी मामले की जांच शुरू होने के बाद एसआईटी को उम्मीद थी कि सीसीटीवी फुटेज के जरिए चोरी की पूरी साजिश, उसका तरीका और इसमें शामिल लोगों की पहचान आसानी से की जा सकेगी। जांच टीम ने शुरुआती चरण में मंदिर परिसर में रखी करीब 40 दान पेटियों का निरीक्षण किया था। साथ ही नोटों की गिनती और अन्य व्यवस्थाओं से जुड़े 50 से अधिक कर्मचारियों की गतिविधियों की भी पड़ताल की गई थी। ऐसे में कैमरों की रिकॉर्डिंग को जांच का सबसे अहम हिस्सा माना जा रहा था।

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45 दिन बाद सिस्टम ने खुद डिलीट कर दिया डेटा

जानकारी के अनुसार, मंदिर और ट्रस्ट कार्यालय में लगे सीसीटीवी सिस्टम में केवल 45 दिनों तक का वीडियो रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की क्षमता है। निर्धारित समय सीमा पूरी होने के बाद पुराना डेटा स्वतः हट जाता है। इसी वजह से अब वह फुटेज उपलब्ध नहीं है, जो जांच को नई दिशा दे सकता था। माना जा रहा है कि यदि यह रिकॉर्डिंग सुरक्षित रहती तो चोरी की अवधि और उसके तरीके को समझना कहीं आसान हो सकता था।

चोरी कब और कैसे हुई, यही सबसे बड़ा सवाल

फुटेज न मिलने के कारण अब जांचकर्ताओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना है कि आखिर यह गड़बड़ी कब से चल रही थी और इसे किस तरह अंजाम दिया जा रहा था। हालांकि पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है और उनके पास से लाखों रुपये की नकदी भी बरामद की गई है। इससे यह संकेत जरूर मिला है कि मामला सामान्य चोरी का नहीं बल्कि बड़े स्तर पर की गई हेराफेरी से जुड़ा हो सकता है।

अब दस्तावेजों और बयानों पर टिकी जांच

तकनीकी सबूतों की कमी के बाद एसआईटी ने जांच की दिशा में बदलाव किया है। अब टीम बैंक खातों के रिकॉर्ड, लेजर बुक, दान पेटियां खोलने और गिनती की प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच कर रही है। इसके अलावा मंदिर परिसर में तैनात सुरक्षाकर्मियों, बैंक अधिकारियों और संबंधित कर्मचारियों से भी लगातार पूछताछ की जा रही है ताकि घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ी जा सकें।

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डिलीट डेटा रिकवर करने की कोशिश

सूत्रों के मुताबिक जांच एजेंसियां डिजिटल फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मदद लेने पर भी विचार कर रही हैं। कोशिश की जा रही है कि तकनीकी माध्यमों से डिलीट हो चुके वीडियो डेटा को दोबारा हासिल किया जा सके। यदि ऐसा संभव हो पाया तो जांच को महत्वपूर्ण दिशा मिल सकती है और कई अनसुलझे सवालों के जवाब सामने आ सकते हैं।

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मामले पर सरकार की भी नजर

राम मंदिर से जुड़ा होने के कारण यह मामला बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। यही वजह है कि राज्य सरकार भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जांच की प्रगति से लगातार अवगत कराया जा रहा है और संबंधित एजेंसियों को निष्पक्ष व गहन जांच के निर्देश दिए गए हैं।

हर सुराग तक पहुंचने की कोशिश में जुटी SIT

सीसीटीवी फुटेज का बैकअप न मिलना निश्चित रूप से जांच एजेंसियों के लिए एक बड़ा झटका है, लेकिन एसआईटी अभी भी हर संभव सबूत जुटाने में लगी हुई है। दस्तावेजी रिकॉर्ड, वित्तीय लेन-देन और संबंधित लोगों के बयानों के आधार पर पूरी सच्चाई तक पहुंचने का प्रयास जारी है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच टीम इस चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में चोरी के पूरे नेटवर्क और जिम्मेदार लोगों तक कब और कैसे पहुंचती है।
 

 

 
 

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