नारी डेस्क: जबलपुर के बरगी डैम में हुए क्रूज हादसे को लेकर लगातार ही नए और चौकाने वाले उपदटेस आए रहे हैं। इसी बीच एक नया वीडियो भी सामने आया जिसके बाद यह सोशल मैया पर खूब वायरल हो रहा हैं बता दे कि इस वीडियो को देखने के बाद सब के मन में यह सुरक्षा को लकेर सवाल आ रहे हैं।वीडियो में साफ दिखाई दे रहा हैं की क्रूज के अंदर बैठे पर्यटक शुरुआत में सामान्य स्थिति में थे, फिर अचानक से तेजी से पानी अंदर घुसने लगता हैं। कुछ ही समय में माहौल चीख-पुकार में बदल जाता है, बच्चे रोने लगते हैं और यात्री जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगते हैं। चालिए आपको बताते हैं आखिर किसकी गलती थी। ....
अंदर की तस्वीर रूला देने वाली
इस वीडियो में शुरुआत में सब कुछ सामान्य दिखता है। लोग आराम से बैठे हैं, बच्चे हंस रहे हैं, लेकिन अचानक हालात बदल जाते हैं। देखते ही देखते क्रूज के अंदर पानी घुसने लगता है। कुछ ही पलों में डर और अफरा-तफरी फैल जाती है। लोग इधर-उधर भागने लगते हैं, बच्चे रोने लगते हैं और हर कोई खुद को बचाने की कोशिश में जुट जाता है।
स्टाफ की दिखें लापरवाह
सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि जब नाव डगमगाने लगती है, तब स्टाफ लाइफ जैकेट निकालता दिखाई देता है। कई यात्रियों के पास जैकेट नहीं होती, कुछ लोग खुद ही उन्हें ढूंढ़ने की कोशिश करते नजर आते हैं। इस लापरवाही ने सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। नियमों की बात करें तो इनलैंड वेसल्स एक्ट 2021 के मुताबिक हर यात्री को सफर शुरू होने से पहले लाइफ जैकेट देना और उसे पहनाना जरूरी होता है, लेकिन यहां ऐसा नहीं हुआ। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि जहां 29 टिकट जारी किए गए थे, वहीं 40 से ज्यादा लोग सवार थे।
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ऑरेंज अलर्ट होने के बावजूद लिया इतना बड़ा रिस्क
मौसम भी इस हादसे का एक बड़ा कारण माना जा रहा है। उस दिन मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया था और तेज आंधी की चेतावनी भी दी थी, इसके बावजूद क्रूज को पानी में उतार दिया गया। अब तक इस हादसे में 9 लोगों के शव मिल चुके हैं और 4 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। इस हादसे की एक बेहद भावुक तस्वीर भी सामने आई है। दिल्ली से आए एक परिवार की मां ने आखिरी समय में अपने छोटे बच्चे को अपने ही लाइफ जैकेट से बांध लिया और उसे सीने से लगाए रखा। जब दोनों के शव मिले, तब भी मां और बेटा एक-दूसरे से लिपटे हुए थे। यह दृश्य हर किसी को झकझोर देने वाला है।
स्टाफ की तरफ से लोगो को कोई मदत नहीं मिली
महिला के पति ने बताया कि हादसे के वक्त स्टाफ सिर्फ लोगों को बैठे रहने के लिए कहता रहा, लेकिन कोई ठोस मदद नहीं दी गई। किसी तरह उन्हें एक ट्यूब मिली, जिसकी मदद से वे किनारे तक पहुंच सके। हादसे के बाद बचाव कार्य में भी देरी की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि सूचना मिलने के बाद भी पहली रेस्क्यू टीम को निकलने में करीब 25 मिनट लग गए। तकनीकी दिक्कतों की वजह से उपकरण दूसरी गाड़ी में शिफ्ट करने पड़े। दूसरी टीम भी देर से रवाना हुई। इस देरी ने हालात को और बिगाड़ दिया, क्योंकि शुरुआती घंटे सबसे अहम होते हैं।
कुल मिलाकर, यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि कई स्तरों पर हुई लापरवाही का नतीजा नजर आता है चाहे वो सुरक्षा नियमों की अनदेखी हो, मौसम चेतावनी को नजरअंदाज करना हो या फिर समय पर राहत कार्य न पहुंच पाना।