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सर्दियों में दोगुना बढ़ जाता है स्ट्रॉक का खतरा, हार्ट पेशेंट यूं रखें बचाव

सर्दियों में दोगुना बढ़ जाता है स्ट्रॉक का खतरा, हार्ट पेशेंट यूं रखें बचाव
Views:- Monday, December 10, 2018-6:31 PM

सर्दी के मौसम में बढ़ती ठंड़ और घटता तापमान दिल के रोगियों के लिए खतरनाक हो सकता है। इस मौसम के दौरान हार्ट पेशेंट में स्ट्रॉक का खतरा दोगुना बढ़ जाता है क्योंकि सर्द हवाएं शरीर के आसपास से गर्माहट छीन लेती हैं, जिससे रक्तवाहिकाएं सिकुड़ने लगती हैं। इसका असर हृदय को खून सप्लाई करने वाली धमनियों पर भी पड़ता है जो हार्ट अटैक का खतरा बढ़ा देती है।

सुबह की हवा ज्यादा खतरनाक

एक अध्ययन के मुताबिक, सुबह के समय रक्त वाहिकाएं सिम्पेथेटिक ओवर एक्टिविटी के कारण संकुचित होती हैं। इस मौसम दौरान हवा में मौजूद धुंआ और इसकी खराब गुणवत्ता दिल के दौरे का खतरा बढ़ाती है, जिससे जोखिम दोगुना हो सकता है। चिकित्सकों के मुताबिक, सर्दियों में हवा की धीमी गति और आर्द्रता (humidity) के स्तर में वृद्धि हो जाती है। जिससे हवा की स्थिति बिगड़ने लगती है क्योंकि प्रदूषित तत्व हवा में नीचे ही रह जाते हैं, इधर-उधर फैल नहीं पाते। यही प्रदूषण सांस के जरिए हृदय तक पहुंचकर व्यक्ति को नुकसान पहुंचाता है। दिल की समस्या वाले लोगों के लिए इन दिनों ज्यादा जोखिम रहता है।

स्मॉग पहुंचाती है सेहत को नुकसान 

विशेषज्ञों के अनुसार, सर्दियों के शुरुआती दिनों में स्मॉग और धुंध आम बात है जो सिर्फ हार्ट अटैक ही नहीं बल्कि खांसी, गले में जलन, आंखों की लालगी, अस्थमा, सांस लेने में कठिनाई, फेफड़ों की बीमारी आदि का खतरा भी बढ़ा देती है। जबकि शुष्क या जाती हुई ठंड़ में फॉग और स्मॉग का खतरा कम हो जाता है और ठंड़ी हवाएं भी बंद हो जाती हैं। 

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क्यों सर्दियों में ही होती है यह प्रॉब्लम?

ठंड़ के मौसम में प्रदूषण जमीनी स्तर पर घिरा रहता है। जो सांस लेने में परेशानी और छाती में संक्रमण पैदा करता है। इससे हाई बीपी की समस्या भी बनी रहती है। शरीर में विटामिन डी की कमी, कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ने, रक्त की अपूर्ति, ब्लड सर्कुलेशन की गड़बड़ी, पसीना न आने और फेफड़ों में अतिरिक्त पानी जमा होने से हार्ट स्ट्रोक के मामले ज्यादा होते हैं। 

कैसे पहचानें खतरे के संकेत

खुद का बचाव रखने के लिए इसके संकेतों की तरफ ध्यान देना बहुत जरूरी है। छाती में जलन, बेचैनी, लगातार बीपी हाई रहना,हाथ में दर्द होकर छाती तक जाना, जबड़े से दर्द शुरू होकर छाती तक फैलना आदि इसके संकेत हो सकते हैं। इसके अलावा फ्लूड इनटेक पर खास ध्यान दें, जिस अनुपात में आप पानी पी रहे हैं अगर उस मुकाबले पेशाब नहीं आ रहा तो इसका मतलब फेफड़ों में अतिरिक्त पानी जमा हो रहा है। इस मामले में देरी न करके तुरंत डॉक्टरी जांच करवाएं। 

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ऐसे रखें बचाव 

सर्दी के मौसम में हार्ट स्ट्रोक से खुद का बचाव करने के लिए कुछ सावधानियां आपके काम आ सकती हैं। 

खुद को कवर करके रखें

ठंड़े मौसम में खुद को गर्म कपड़े से कवर करके रखें ताकि शरीर में गर्माहट बनी रहे। हाथों पैरों को गर्म करने के लिए सिर पर टोपी और पैरों में जुराबें डाल कर रखें। 

न करें सुबह की सैर

सुबह-सुबह घर से बाहर निकलना बंद कर दें। ठंड़ी और प्रदूषित हवा सांस के जरिए शरीर में जाने का खतरा कम रहेगा। धूप निकलने पर या दोपहर के समय घर से बाहर निकलें। 

पैदल चलने से बचेें

इस मौसम में बुजुर्ग और बच्चों को जितना हो सके पैदल चलने से बचना चाहिए। 

शराब को कहें ना

सर्दियों में बाहर जाने पर एल्कोहल का सेवन हार्ट अटैक का खतरा बढ़ा सकता है हालांकि यह गर्मी का अहसास कराता है, लेकिन शरीर के महत्‍वपूर्ण अंगों से गर्मी को दूर कर देता है। जिससे हार्ट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। 

खाएं पौष्टिक आहार

लोग तली हुई चीजें, देसी घी, हाई प्रोटीन और वसा वाले खाद्य पदार्थों का सेवन इस मौसम में बहुत ज्यादा करते हैं। ये चीजें सेहत के लिए नुकसानदायक हैं क्योंकि इसे पचने में बहुत समय लगता है। ज्यादा शारीरिक श्रम न करने के कारण पाचन क्रिया बिगड़ने लगती है और कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के चांस भी ज्यादा हो जाते हैं। हल्का और संतुलित भोजन खाए।

घर पर करें योग और एक्सरसाइज 

घर से बाहर नहीं जा पा रहे तो एक्सराइज करना बंद न करें। घर पर योग, मेडिटेशन, एक्सराइज करें। 

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