नारी डेस्क : हाई ब्लड प्रेशर यानी हाई बीपी को अक्सर लोग एक सामान्य स्वास्थ्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन लंबे समय तक ब्लड प्रेशर बढ़ा रहने से शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंच सकता है। इसका असर दिल के साथ-साथ दिमाग, किडनी और रक्त वाहिकाओं पर भी पड़ता है। चिंता की बात यह है कि कई लोगों को हाई बीपी होने के बावजूद शुरुआत में कोई स्पष्ट लक्षण महसूस नहीं होते। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़े भी इस समस्या की गंभीरता को उजागर करते हैं। ऐसे में समय रहते ब्लड प्रेशर की जांच कराना और इसे नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है।
WHO के आंकड़े कर देंगे हैरान
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की सितंबर 2025 में प्रकाशित फैक्टशीट के मुताबिक, साल 2024 में दुनियाभर में 30 से 79 वर्ष की उम्र के लगभग 1.4 अरब वयस्क हाई ब्लड प्रेशर से प्रभावित थे, जो इस आयु वर्ग की करीब 33 प्रतिशत आबादी है। इनमें लगभग 44 प्रतिशत लोगों को अपनी समस्या के बारे में पता नहीं था। वहीं, केवल करीब 23 प्रतिशत लोगों का ब्लड प्रेशर नियंत्रण में था। ये आंकड़े बताते हैं कि हाई बीपी एक गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती है। इसे कई बार साइलेंट किलर भी कहा जाता है, क्योंकि इसके लक्षण स्पष्ट हुए बिना भी यह शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है।
क्या होता है हाई ब्लड प्रेशर?
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) के अनुसार, ब्लड प्रेशर वह दबाव है, जो खून के रक्त वाहिकाओं की दीवारों पर बहने के दौरान पड़ता है। जब यह दबाव लगातार सामान्य से अधिक बना रहता है, तो इसे हाई ब्लड प्रेशर या हाइपरटेंशन कहा जाता है। ब्लड प्रेशर की रीडिंग में दो नंबर होते हैं। पहला नंबर सिस्टोलिक प्रेशर होता है, जो दिल के धड़कने के दौरान रक्त का दबाव बताता है। दूसरा नंबर डायस्टोलिक प्रेशर होता है, जो दिल की धड़कनों के बीच का दबाव दर्शाता है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के वर्गीकरण में 120/80 mm Hg से कम रीडिंग सामान्य सीमा में आती है, जबकि 130–139 सिस्टोलिक या 80–89 डायस्टोलिक रीडिंग को स्टेज-1 हाई बीपी की श्रेणी में रखा जाता है। हालांकि, हाई बीपी की पुष्टि के लिए अलग-अलग मौकों पर सही तरीके से ली गई रीडिंग और डॉक्टर का आकलन जरूरी है।
किन कारणों से बढ़ता है ब्लड प्रेशर?
हाई बीपी होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। कुछ जोखिमों को जीवनशैली में बदलाव करके कम किया जा सकता है, जबकि कुछ पर हमारा सीधा नियंत्रण नहीं होता।
बढ़ती उम्र: उम्र बढ़ने के साथ रक्त वाहिकाओं में बदलाव होने लगते हैं, जिससे हाई बीपी का जोखिम बढ़ सकता है।
आनुवंशिक कारण: परिवार में माता-पिता या करीबी रिश्तेदारों को हाई बीपी होने पर व्यक्ति में भी इसका खतरा बढ़ सकता है।
अधिक वजन या मोटापा: वजन ज्यादा होने से हृदय और रक्त संचार तंत्र पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
शारीरिक गतिविधि की कमी: लंबे समय तक बैठे रहना और नियमित व्यायाम न करना हाई बीपी के जोखिम को बढ़ा सकता है।
अधिक नमक खाना: खाने में ज्यादा नमक लेने से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। WHO वयस्कों के लिए प्रतिदिन 5 ग्राम से कम नमक लेने की सलाह देता है। इसमें भोजन में मौजूद कुल नमक शामिल है।
शराब का अधिक सेवन: अधिक शराब पीने से ब्लड प्रेशर बढ़ने का जोखिम हो सकता है।
लंबे समय तक तनाव और खराब दिनचर्या: लगातार तनाव, अपर्याप्त नींद और अस्वस्थ खानपान भी ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मुश्किल पैदा कर सकते हैं।
कंट्रोल से बाहर ब्लड प्रेशर क्यों है खतरनाक?
जब ब्लड प्रेशर लंबे समय तक बढ़ा रहता है, तो रक्त वाहिकाओं और महत्वपूर्ण अंगों पर लगातार दबाव पड़ता है। इससे कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।
दिल को पहुंच सकता है नुकसान
हाई बीपी के कारण दिल को खून पंप करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। समय के साथ हृदय की मांसपेशियों पर दबाव बढ़ सकता है और दिल की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है। इससे हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर और दिल की धड़कन अनियमित होने का खतरा बढ़ सकता है।
दिमाग पर पड़ सकता है असर
हाई बीपी दिमाग तक खून पहुंचाने वाली रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है। इनके ब्लॉक होने या फटने से स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। लंबे समय तक अनियंत्रित बीपी रहने से याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता पर भी असर पड़ सकता है।
किडनी हो सकती है डैमेज
किडनी खून को फिल्टर करके शरीर से अपशिष्ट पदार्थ बाहर निकालने का काम करती है। हाई बीपी किडनी की छोटी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे उनकी फिल्टर करने की क्षमता प्रभावित होती है। दूसरी ओर, किडनी की बीमारी भी ब्लड प्रेशर बढ़ा सकती है। गंभीर मामलों में किडनी फेलियर का खतरा बढ़ सकता है। WHO के मुताबिक, अनियंत्रित हाई बीपी हार्ट अटैक, स्ट्रोक और किडनी डैमेज जैसी गंभीर समस्याओं का प्रमुख जोखिम कारक है।
हाई बीपी को कंट्रोल करने के लिए अपनाएं ये टिप्स
नमक का सेवन कम करें: भोजन में अतिरिक्त नमक डालने से बचें और चिप्स, नमकीन, अचार व ज्यादा नमक वाले पैकेज्ड फूड का सेवन सीमित रखें।
हेल्दी डाइट लें: फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और संतुलित मात्रा में प्रोटीन को डाइट का हिस्सा बनाएं।
रोजाना एक्सरसाइज करें: अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार नियमित पैदल चलें या दूसरी शारीरिक गतिविधियां करें।
वजन नियंत्रित रखें: संतुलित भोजन और नियमित व्यायाम की मदद से स्वस्थ वजन बनाए रखने की कोशिश करें।
तनाव कम करें: योग, ध्यान, पर्याप्त नींद और आराम के लिए समय निकालें।
बीपी की नियमित जांच करें: घर पर ब्लड प्रेशर मापते समय सही तरीके का इस्तेमाल करें और रीडिंग का रिकॉर्ड रखें।
दवाएं समय पर लें: डॉक्टर द्वारा दी गई दवाएं नियमित रूप से लें। बीपी सामान्य आने पर भी बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा बंद न करें।
WHO भी हाई बीपी को नियंत्रित रखने के लिए नमक कम करने, शारीरिक गतिविधि बढ़ाने, स्वस्थ वजन बनाए रखने और जरूरत के अनुसार दवाएं लेने की सलाह देता है।
कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
यदि ब्लड प्रेशर 180/120 mm Hg से अधिक आता है, तो कम से कम एक मिनट रुककर दोबारा जांच करें। यदि रीडिंग फिर भी इतनी अधिक है, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें। अगर इसके साथ सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी, शरीर में सुन्नपन या कमजोरी, नजर में बदलाव अथवा बोलने में कठिनाई हो, तो यह मेडिकल इमरजेंसी हो सकती है। ऐसी स्थिति में तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।
नोट: हाई बीपी को समय रहते पहचानना और नियंत्रित रखना दिल, दिमाग और किडनी को गंभीर नुकसान से बचाने में मदद कर सकता है। नियमित जांच कराएं और डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार जारी रखें।