नारी डेस्क: नवरात्रि में व्रत रखने के दौरान कई लोगों को पेट फूलने, गैस बनने और पेट में भारीपन जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसकी एक वजह व्रत के दौरान खानपान में बदलाव भी हो सकता है। कुछ लोग लंबे समय तक खाली पेट रहते हैं, तो कुछ फलाहार में तली-भुनी चीजें, ज्यादा मिठाई या एक बार में जरूरत से ज्यादा खाना खा लेते हैं। इससे पाचन पर असर पड़ सकता है और पूरा दिन पेट में बेचैनी बनी रहती है। अगर आपको भी व्रत के दौरान गैस और ब्लोटिंग की समस्या हो रही है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। रोजमर्रा की कुछ आदतों में बदलाव करके इस परेशानी को कम करने में मदद मिल सकती है। आइए जानते हैं कि व्रत में पेट फूलने की समस्या क्यों होती है, इसके लक्षण क्या हैं और इससे राहत पाने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
व्रत में क्यों होती है गैस और पेट फूलने की समस्या
व्रत के दौरान हमारी खाने-पीने की आदतें बदल जाती हैं। कई बार हम लंबे समय तक कुछ नहीं खाते और फिर व्रत खोलते समय एक साथ ज्यादा भोजन कर लेते हैं। इससे पाचन तंत्र पर दबाव पड़ सकता है और पेट में गैस या भारीपन महसूस हो सकता है। इसके अलावा, व्रत में खाई जाने वाली कुछ चीजें भी पेट फूलने की वजह बन सकती हैं। जैसे साबूदाना, आलू या कुट्टू के आटे से बनी तली हुई चीजें अगर ज्यादा मात्रा में खाई जाएं, तो कुछ लोगों को अपच या पेट में परेशानी हो सकती है। वहीं, पर्याप्त पानी न पीने से कब्ज की समस्या बढ़ सकती है, जो पेट फूलने का एक कारण है। इसलिए व्रत के दौरान सिर्फ खाने की चीजों पर ही नहीं, बल्कि उनकी मात्रा और खाने के तरीके पर भी ध्यान देना जरूरी है।

गैस और ब्लोटिंग के क्या हैं लक्षण
अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड डाइजेस्टिव एंड किडनी डिजीज (NIDDK) के अनुसार, पाचन तंत्र में गैस होना सामान्य है। हालांकि, जब इसकी मात्रा बढ़ जाती है या गैस आसानी से बाहर नहीं निकल पाती, तो परेशानी महसूस हो सकती है।
गैस और ब्लोटिंग के कुछ सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं
पेट का फूला हुआ या तना हुआ महसूस होना।
पेट में भारीपन या असहजता रहना।
बार-बार डकार आना।
सामान्य से ज्यादा गैस पास होना।
पेट में दर्द या ऐंठन महसूस होना।
पेट से गड़गड़ाहट जैसी आवाजें आना।
हर व्यक्ति में इसके लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। अगर पेट फूलने के साथ तेज दर्द या अन्य गंभीर परेशानी हो रही है, तो इसे सामान्य गैस समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

शरीर में गैस कैसे बनती है
NIDDK के अनुसार, पाचन तंत्र में गैस पहुंचने की एक वजह खाना खाते या पीते समय हवा निगलना है। इसके अलावा, बड़ी आंत में मौजूद बैक्टीरिया कुछ ऐसे कार्बोहाइड्रेट को तोड़ते हैं, जो छोटी आंत में पूरी तरह पच नहीं पाते। इस प्रक्रिया में भी गैस बनती है। पेट फूलने की समस्या हमेशा सिर्फ गैस की वजह से नहीं होती। कब्ज, कुछ खाद्य पदार्थों को पचाने में परेशानी, फूड इनटॉलरेंस, सीलिएक डिजीज और इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) जैसी स्थितियां भी इसकी वजह बन सकती हैं। अगर आपको बार-बार पेट फूलने की समस्या होती है, तो यह ध्यान दें कि किन चीजों को खाने के बाद परेशानी बढ़ती है। इससे समस्या की वजह समझने में मदद मिल सकती है।
व्रत में गैस और पेट फूलने से राहत पाने के आसान तरीके
अगर व्रत के दौरान पेट में गैस बन रही है या पेट फूला हुआ महसूस हो रहा है, तो कुछ आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं।
थोड़ा-थोड़ा करके खाएं
व्रत खोलते समय एक साथ बहुत ज्यादा भोजन करने से बचें। इसकी जगह थोड़ी-थोड़ी मात्रा में खाएं और जरूरत के अनुसार बीच-बीच में कुछ खा लें। इससे पाचन तंत्र पर अचानक ज्यादा दबाव नहीं पड़ेगा।
पानी पीने में लापरवाही न करें
व्रत के दौरान कई लोग पानी कम पीते हैं, जिससे शरीर में पानी की कमी और कब्ज की समस्या हो सकती है। इसलिए अगर आपके व्रत के नियमों में पानी पीना शामिल है, तो दिनभर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी पीते रहें। इससे शरीर में पानी की कमी से बचने में मदद मिलेगी।
खाना धीरे-धीरे और अच्छी तरह चबाकर खाएं
जल्दी-जल्दी खाने से ज्यादा हवा निगलने की संभावना बढ़ सकती है, जिससे डकार और गैस की परेशानी हो सकती है। इसलिए खाना खाते समय जल्दबाजी न करें। मुंह बंद करके धीरे-धीरे चबाएं और आराम से भोजन करें।
हल्की वॉक करें
खाना खाने के बाद कुछ देर हल्की वॉक करना पाचन में मदद कर सकता है। पूरे दिन बैठे रहने के बजाय थोड़ी देर चलते-फिरते रहें। हालांकि, व्रत के दौरान कमजोरी या चक्कर महसूस हो रहे हों, तो खुद पर ज्यादा दबाव न डालें।
गैस बढ़ाने वाली चीजों पर ध्यान दें
कुछ लोगों को बीन्स, दालें, पत्तागोभी और कुछ अन्य खाद्य पदार्थ खाने से ज्यादा गैस बनती है। अगर आपको भी किसी खास चीज से परेशानी होती है, तो उसकी मात्रा कम करें या उससे बचें। हर व्यक्ति का पाचन अलग होता है, इसलिए जरूरी नहीं कि सभी को एक ही तरह के खाने से परेशानी हो।
तली-भुनी और ज्यादा मसालेदार चीजें कम खाएं
व्रत में पूरी, पकौड़े, चिप्स और अन्य तली हुई चीजें खाना आम है। लेकिन ज्यादा तला हुआ या फैट से भरपूर भोजन कुछ लोगों में अपच और पेट भारी होने की समस्या बढ़ा सकता है। इसलिए फलाहार में हल्के और कम तेल वाले विकल्प चुनें।

फिजी ड्रिंक्स से दूरी बनाएं
सोडा और अन्य कार्बोनेटेड पेय पदार्थ पेट में अतिरिक्त गैस बढ़ा सकते हैं। अगर आपको पहले से ब्लोटिंग की समस्या है, तो इनसे बचना बेहतर हो सकता है। चाय-कॉफी भी सीमित मात्रा में लें, खासकर अगर इनसे आपको एसिडिटी या पेट में परेशानी होती है।
सोने से ठीक पहले भारी भोजन न करें
रात में सोने से ठीक पहले बहुत ज्यादा खाना खाने से पेट में भारीपन और अपच की समस्या हो सकती है। कोशिश करें कि भोजन और सोने के बीच पर्याप्त समय रहे। खाना खाते समय आराम से बैठें और जल्दबाजी न करें।
पेट की हल्की मालिश कर सकते हैं
अगर पेट में फंसी गैस की वजह से असहजता हो रही है, तो पेट पर हल्के हाथ से दाईं ओर से बाईं ओर मालिश करने से कुछ लोगों को राहत मिल सकती है। मालिश करते समय ज्यादा दबाव न डालें। अगर पेट में तेज दर्द है, तो मालिश करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लें।
पेट फूलने की समस्या में किन चीजों से बचें?
गैस और ब्लोटिंग की परेशानी कम करने के लिए कुछ आदतों से दूरी बनाना भी जरूरी है:
एक बार में बहुत ज्यादा भोजन न करें। बहुत ज्यादा तला-भुना, फैटी, मीठा या मसालेदार खाना खाने से बचें। सोडा और अन्य फिजी ड्रिंक्स का सेवन कम करें। खाना खाते समय जल्दबाजी न करें। जिन खाद्य पदार्थों से आपको बार-बार परेशानी होती है, उन्हें पहचानकर सीमित करें। डॉक्टर की सलाह के बिना बार-बार गैस की दवाएं न लें।
कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
अगर पेट फूलने और गैस की समस्या बार-बार हो रही है या घरेलू उपायों से राहत नहीं मिल रही, तो डॉक्टर से सलाह लें। पेट फूलने के साथ लगातार पेट दर्द, उल्टी, बिना वजह वजन कम होना, मल में खून आना या मल त्याग की आदतों में बदलाव जैसे लक्षण हों, तो जांच कराना जरूरी है। अगर पेट बहुत ज्यादा फूल गया है और साथ में तेज दर्द हो रहा है, उल्टी हो रही है या मल और गैस बिल्कुल पास नहीं हो रही, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
ध्यान रखें: व्रत के दौरान पेट फूलने और गैस की समस्या को कम करने के लिए संतुलित फलाहार, पर्याप्त पानी, धीरे-धीरे खाना और हल्की शारीरिक गतिविधि मददगार हो सकती है। लेकिन अगर परेशानी लगातार बनी रहती है, तो इसे केवल व्रत का असर मानकर नजरअंदाज न करें।