
नारी डेस्क: अहोई अष्टमी हिंदुओं के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण दिन है। इस दिन माताएं अपने बच्चों की भलाई, लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए व्रत रखती हैं। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, अष्टमी तिथि 1 नवंबर को दोपहर 2:51 बजे शुरू होगी और 2 नवंबर 2026 को दोपहर 1:10 बजे तक रहेगी। चूंकि यह त्योहार सूर्योदय के समय मौजूद तिथि के आधार पर मनाया जाता है, इसलिए अहोई अष्टमी का व्रत 1 नवंबर को रखा जाएगा।

अहोई अष्टमी का महत्त्व
अहोई अष्टमी देवी अहोई को समर्पित है, जिन्हें उनके भक्त 'अहोई माता' कहते हैं। माताएं कार्तिक कृष्ण अष्टमी के दिन उनकी पूजा करती हैं और अपने बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य, लंबी उम्र और कुशलता की कामना करती हैं। कई परिवारों में अहोई माता को देवी पार्वती का ही रूप माना जाता है; इस मान्यता के कारण ऐसा लगता है मानो एक मां की प्रार्थना सीधे एक दिव्य मां तक पहुच रही हो। माना जाता है कि अहोई माता की आरती करने से दीर्घायु का वरदान मिलता है, इस दौरान ये शक्तिशाली मंत्र भी जरूर पढ़ना चाहिए।
अहोई माता का मुख्य मंत्र
ॐ पार्वतीप्रियनंदनाय नमः' ॐ उमादेव्यै नमः॥
इस मंत्र का जाप अहोई माता की पूजा के समय किया जाता है। यह मंत्र संतान की खुशहाली और सुरक्षित जीवन के लिए विशेष रूप से लाभकारी है। इस मंत्र का नियमित जाप करने से संतान की सुरक्षा और उन्नति के लिए माता अहोई की कृपा प्राप्त होती है।

अहोई माता की आरती
अहोई माता की आरती जय अहोई माता, जय अहोई माता! तुमको निसदिन ध्यावत हर विष्णु विधाता। टेक।।
ब्राह्मणी, रुद्राणी, कमला तू ही है जगमाता। सूर्य-चंद्रमा ध्यावत नारद ऋषि गाता।। जय।।
माता रूप निरंजन सुख-सम्पत्ति दाता।। जो कोई तुमको ध्यावत नित मंगल पाता।। जय।।
तू ही पाताल बसंती, तू ही है शुभदाता। कर्म-प्रभाव प्रकाशक जगनिधि से त्राता।। जय।।
जिस घर थारो वासा वाहि में गुण आता।। कर न सके सोई कर ले मन नहीं धड़काता।। जय।।
तुम बिन सुख न होवे न कोई पुत्र पाता। खान-पान का वैभव तुम बिन नहीं आता।। जय।।
शुभ गुण सुंदर युक्ता क्षीर निधि जाता। रतन चतुर्दश तोकू कोई नहीं पाता।। जय।।
श्री अहोई मां की आरती जो कोई गाता। उर उमंग अति उपजे पाप उतर जाता।। जय।।
पूजन विधि
अहोई माता की पूजा करते समय देवी की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाकर पूजा करें। संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए " ऊँ ह्रीं उमाये नमः" मंत्र का जाप करें। अहोई माता को पूजन के दौरान दूध-भात और लाल फूल अर्पित करें। वास्तु शास्त्र के अनुससर इस दिन अगर अहोई माता को गुड़ और चांदी की माला अर्पित जाए तो सभी मनोकामना पूरी होती है। इस दिन मां गौरी को श्रृंगार का सामान भेंट करना चाहिए। रात को चंद्रमा का दर्शन करके अर्घ्य दें और व्रत का पारण करें। यह व्रत और पूजा विधि संतान के जीवन में सुख, समृद्धि, और लंबी आयु लाने में मदद करती है।