
नारी डेस्क: दिल्ली हाईकोर्ट ने स्कूलों में बच्चों के स्मार्टफोन इस्तेमाल पर महत्वपूर्ण गाइडलाइंस जारी की हैं। इस मामले में अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि छात्रों के स्मार्टफोन के इस्तेमाल पर बैन नहीं लगा सकते। लेकिन इसके उपयोग को निगरानी में रखना जरूरी है। अदालत ने यह भी कहा कि स्मार्टफोन के फायदे जैसे बच्चों की सुरक्षा और माता-पिता से संपर्क बनाए रखने के बावजूद, इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए नियम और गाइडलाइंस लागू की जानी चाहिए।
दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला: स्मार्टफोन का उपयोग नियमन के तहत हो
दिल्ली हाईकोर्ट ने 2023 में दिल्ली शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी की गई एडवाइजरी पर टिप्पणी करते हुए कहा कि स्कूलों में स्मार्टफोन लाने पर पूरी तरह से रोक नहीं लगानी चाहिए, लेकिन इसके उपयोग को नियंत्रित किया जाना चाहिए। कोर्ट ने स्कूलों से कहा कि स्मार्टफोन का उपयोग कक्षाओं में पाबंद किया जाना चाहिए।

क्या होनी चाहिए नई नीति?
कोर्ट ने कहा कि स्कूलों में स्मार्टफोन के इस्तेमाल के लिए एक नीति बनानी चाहिए, जो गार्डियन, Teachers की सलाह से सही हो। यह नीति स्मार्टफोन का मनोरंजन के लिए इस्तेमाल कम करे, लेकिन बच्चों की सुरक्षा और माता-पिता से संपर्क के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सके। अगर कोई छात्र स्मार्टफोन के नियमों का उल्लंघन करता है, तो नीति में इस उल्लंघन के लिए साफ और सही कदम उठाने की व्यवस्था होनी चाहिए।

स्कूलों को ऑनलाइन व्यवहार सिखाने की सलाह
अदालत ने यह भी कहा कि स्कूलों को छात्रों को जिम्मेदार ऑनलाइन व्यवहार, डिजिटल और स्मार्टफोन के नैतिक उपयोग के बारे में शिक्षित करना चाहिए। छात्रों को यह समझाना चाहिए कि ज्यादा स्क्रीन टाईम और सोशल मीडिया का दुरुपयोग मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकता है, जैसे कि एंजाइटी और ध्यान में कमी।

इस फैसले के साथ, दिल्ली हाईकोर्ट ने स्मार्टफोन के उपयोग को लेकर एक संतुलित और समग्र दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि बच्चों का डिजिटल जीवन सुरक्षित और जिम्मेदार बने।