
नारी डेस्क: दुबई से तेल अवीव जा रही 'फ्लाईदुबई' की उड़ान को दुर्घटनाग्रस्त करने की कोशिश कर रहे सह-पायलट का मुकाबला कर ''नायक'' के तौर पर उभरे भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार के मित्र और पेशे से डॉक्टर जिनीत शाह ने कहा कि चाकू लगने के बावजूद अपनी ''मसल मेमोरी'' के कारण वह एक बड़ी दुर्घटना को टालने में कामयाब रहे। मुंबई के घाटकोपर इलाके में पायलट के परिवार के पड़ोसी और मूत्र रोग विशेषज्ञ जिनीत शाह ने कहा, ''स्मित सच में बहुत अच्छे, दयालु और परिपक्व इंसान हैं।''
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फैसले लेने की काबिलियत ने रोका बड़ा हादसा
डॉक्टर ने कहा- ''मैं काफी समय से उनके संपर्क में था लेकिन हाल में वह दुबई चले गए इसलिए नियमित बातचीत नहीं हो पाती थी। हालांकि, जब भी वे यहां अपने माता-पिता से मिलने आते थे तो हमारी बात होती थी।'' शाह ने कहा- ''स्मित एक अच्छे पिता और बहुत जिम्मेदार इंसान हैं। उनके परिवार में दो बच्चे समेत चार सदस्य हैं।'' डॉक्टर ने बताया कि स्मित में तुरंत फैसले लेने की काबिलियत थी। वह पायलटों को प्रशिक्षण देते हैं और उनकी अपनी अकादमी भी है, शायद इसीलिए उन्हें पता था कि आपात स्थिति में क्या करना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने भी की पायलट की तारीफ
उन्होंने कहा, ''मसल मेमोरी की वजह से ही वह चाकू लगने के बावजूद हालात को संभाल पाए और 174 लोगों की जान बचा सके।'' 'मसल मेमोरी' एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें बार-बार अभ्यास करने के कारण हमारा दिमाग और मांसपेशियां किसी काम को इस तरह सीख जाते हैं कि हम उसे बिना ज्यादा सोचे-समझे स्वत: करने लगते हैं। पायलट की अब एक नायक की तरह सराहना की जा रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 'एक्स' पर लिखा, ''कैप्टन स्मित मच्छार एक नायक हैं।'' उन्होंने कहा, ''बेहद खतरनाक स्थिति में और गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने दूसरों की जान बचाने के लिए अपार साहस और अटूट संकल्प का परिचय दिया।'' उन्होंने कहा, ''भारत को कैप्टन मच्छार पर गर्व है।''
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मसल मेमोरी कैसे काम करती है?
जब आप कोई काम (जैसे साइकिल चलाना, गिटार बजाना, या टाइप करना) बार-बार करते हैं, तो आपका मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र उसका एक पक्का रास्ता बना लेता है। इससे वह काम बिना ज्यादा सोचे-समझकर स्वचालित (Automatic) तरीके से होने लगता है। जब आप जिम में कसरत करके मांसपेशियां बनाते हैं, तो मांसपेशी कोशिकाओं में 'मायोन्यूक्लिआई' (Myonuclei) की संख्या बढ़ जाती है। कसरत छोड़ देने पर मांसपेशियां भले ही कम हो जाएं, लेकिन ये मायोन्यूक्लिआई नष्ट नहीं होते। जब आप दोबारा कसरत शुरू करते हैं, तो ये पहले से मौजूद कोशिकाएं मांसपेशियों को बहुत तेजी से दोबारा बढ़ाने में मदद करती हैं।