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Asmita Dey ने रचा इतिहास, जूडो में भारत को दिलाया पहला स्वर्ण पदक

  • Edited By Monika,
  • Updated: 02 Aug, 2026 04:17 PM
Asmita Dey ने रचा इतिहास, जूडो में भारत को दिलाया पहला स्वर्ण पदक

नारी डेस्क :  ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 भारतीय खेलों के लिए लगातार ऐतिहासिक पल लेकर आ रहे हैं। इसी कड़ी में भारतीय जूडो खिलाड़ी अस्मिता डे ने ऐसा कारनामा कर दिखाया, जो अब तक कोई भारतीय जूडोका नहीं कर सका था। उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनकर इतिहास रच दिया। स्वर्ण पदक जीतने के बाद जब अस्मिता डे पोडियम के सबसे ऊंचे स्थान पर खड़ी थीं और पूरे स्टेडियम में भारतीय राष्ट्रगान 'जन गण मन' गूंज रहा था, तब वह पल भारतीय खेल इतिहास के सबसे गर्वित क्षणों में शामिल हो गया। यह जीत केवल एक खिलाड़ी की सफलता नहीं, बल्कि भारतीय जूडो के वर्षों के संघर्ष, मेहनत और लगातार हो रहे विकास का प्रतीक भी मानी जा रही है।

भारतीय जूडो के लिए मील का पत्थर

भारत ने पिछले कुछ वर्षों में जूडो में लगातार बेहतर प्रदर्शन किया है, लेकिन कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक का सपना अधूरा था। अस्मिता डे ने इस इंतजार को खत्म करते हुए भारतीय जूडो को नई पहचान दिलाई। उनकी इस ऐतिहासिक जीत से देशभर के युवा खिलाड़ियों को भी प्रेरणा मिलेगी और जूडो जैसे खेलों में नई प्रतिभाओं का उत्साह बढ़ेगा।

भारत के पदक अभियान को मिली नई मजबूती

अस्मिता डे का स्वर्ण पदक भारत के शानदार कॉमनवेल्थ गेम्स अभियान में एक और बड़ी उपलब्धि बनकर सामने आया है। भारतीय खिलाड़ी विभिन्न खेलों में लगातार पदक जीत रहे हैं और देश की पदक तालिका को मजबूत कर रहे हैं। अस्मिता की जीत ने यह साबित कर दिया कि भारत अब केवल पारंपरिक खेलों तक सीमित नहीं है, बल्कि जूडो जैसे मुकाबलों में भी विश्व स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।

देशभर से मिल रही बधाइयां

इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद खेल प्रेमियों, पूर्व खिलाड़ियों, खेल विशेषज्ञों और सोशल मीडिया पर लाखों लोगों ने अस्मिता डे को बधाई दी। उनकी जीत को भारतीय जूडो के लिए एक नई शुरुआत माना जा रहा है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि भविष्य में भारतीय जूडो को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत बनाएगी।

भारत के लिए गर्व का क्षण

अस्मिता डे का यह स्वर्ण पदक सिर्फ एक मेडल नहीं, बल्कि भारतीय खेल इतिहास का सुनहरा अध्याय है। ग्लासगो में राष्ट्रगान की गूंज के साथ उन्होंने यह संदेश दिया कि भारतीय खिलाड़ी अब हर खेल में इतिहास रचने का दम रखते हैं। उनकी यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

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