नारी डेस्क : ट्यूबरकुलोसिस (TB) एक संक्रामक बीमारी है, जो Mycobacterium tuberculosis बैक्टीरिया के कारण होती है। यह मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है, लेकिन शरीर के दूसरे हिस्सों जैसे लिम्फ नोड्स, दिमाग, किडनी और रीढ़ की हड्डी को भी प्रभावित कर सकती है। हालांकि, टीबी के बैक्टीरिया के संपर्क में आने वाले हर व्यक्ति को बीमारी नहीं होती। कुछ लोगों में संक्रमण निष्क्रिय रहता है, जबकि कुछ में यह एक्टिव टीबी का रूप ले सकता है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, कुछ लोगों में टीबी होने का जोखिम सामान्य लोगों की तुलना में अधिक रहता है। ऐसे लोगों के लिए समय पर जांच और डॉक्टर की सलाह बेहद जरूरी है।
इन 7 लोगों को टीबी का ज्यादा खतरा
जिन्हें पहले टीबी हो चुका है: जिन लोगों को पिछले कुछ वर्षों में टीबी हो चुका है, उनमें दोबारा टीबी होने का जोखिम रह सकता है। ऐसे लोगों को लगातार लक्षण दिखाई देने पर जांच करवानी चाहिए।
टीबी मरीज के संपर्क में रहने वाले लोग: अगर कोई व्यक्ति एक्टिव टीबी से पीड़ित व्यक्ति के बेहद करीब या लंबे समय तक संपर्क में रहा है, तो उसके संक्रमित होने का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे लोगों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार टीबी की जांच करवानी चाहिए।

धूम्रपान करने वाले: धूम्रपान फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है और श्वसन तंत्र की संक्रमण से लड़ने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है। इसलिए स्मोकिंग करने वालों में टीबी का जोखिम अधिक हो सकता है।
ज्यादा शराब का सेवन करने वाले: अत्यधिक शराब का सेवन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित कर सकता है। इसी वजह से नियमित और ज्यादा शराब पीने वालों में टीबी समेत कई संक्रमणों का जोखिम बढ़ सकता है।
डायबिटीज से पीड़ित लोग: मधुमेह शरीर की इम्यून प्रतिक्रिया को प्रभावित कर सकता है। इसलिए डायबिटीज वाले लोगों में टीबी का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में अधिक हो सकता है।
कुपोषित लोग: शरीर को पर्याप्त पोषण न मिलने पर इम्यून सिस्टम कमजोर हो सकता है। ऐसे में संक्रमण से लड़ने की क्षमता कम हो सकती है और टीबी का खतरा बढ़ सकता है।
60 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्ग: उम्र बढ़ने के साथ इम्यून सिस्टम की क्षमता में बदलाव आ सकता है। इसलिए 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को टीबी के लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

इनएक्टिव और एक्टिव टीबी में क्या अंतर है?
टीबी बैक्टीरिया शरीर में मौजूद हो सकते हैं लेकिन व्यक्ति को बीमार न करें। इसे इनएक्टिव या लेटेंट टीबी संक्रमण कहा जाता है। इसमें आमतौर पर लक्षण नहीं होते और व्यक्ति दूसरों में संक्रमण नहीं फैलाता। वहीं, जब बैक्टीरिया सक्रिय होकर बढ़ने लगते हैं और बीमारी के लक्षण दिखाई देने लगते हैं, तो इसे एक्टिव टीबी डिजीज कहा जाता है। फेफड़ों की एक्टिव टीबी वाले व्यक्ति से संक्रमण दूसरे लोगों तक फैल सकता है।
टीबी के इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
टीबी के लक्षण बीमारी के प्रभावित हिस्से के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।
फेफड़ों की टीबी में आमतौर पर ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
लंबे समय तक रहने वाली खांसी
सीने में दर्द, खांसी या बलगम में खून आना
लगातार कमजोरी और थकान
बिना वजह वजन कम होना
भूख कम लगना, बुखार या ठंड लगना
रात में ज्यादा पसीना आना।

समय पर जांच है बेहद जरूरी
टीबी का इलाज संभव है, लेकिन इसके लिए बीमारी की पहचान और समय पर पूरा इलाज जरूरी है। अगर आप ऊपर बताए गए किसी जोखिम समूह में आते हैं या लंबे समय से टीबी जैसे लक्षण महसूस कर रहे हैं, तो खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से संपर्क करें और उनकी सलाह के अनुसार जांच करवाएं।