
कुछ लोग जो वजन कम करने का प्रयास करते हैं वे मैदे से बनी हुई चीजें नहीं खाते। हर किसी के किचन में मैदा पाया जाता है जिससे अनेको खाद्य पदार्थ बनाए जाते हैं। मैदा या रिफाइंड आटे को रोज अपने आहार में शामिल करने से इसका नुकसान तुरंत दिखाई नहीं देता। इसके कई साइड इफेक्ट होते हैं जो लंबे समय तक प्रयोग करने के बाद ही पता चलता है। मैदा एक परिष्कृत गेहूं का आटा है जिसमें से फाइबर समाप्त कर दिया जाता है। फिर इसके बाद इसे बेंजोइल पेरोक्साइड ब्लीच किया जाता है जिससे इसको साफ और सफेद रंग और टेक्सचर दिया जाता है।
क्या आपको पता है कि चाइना और यूरोपियन देशों में बेंजोइल पेरोक्साइड को बैंड कर दिया गया है क्योंकि इससे स्किन कैंसर हो सकता है। आज हम आपको बताते है कि कैसे मैदा हमारे स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है।
- मोटापा बढ़ाए
बहुत ज्यादा मैदा खाने से शरीर का वजन बढ़ना शुरु हो जाता है। यही नहीं इससे कोलेस्ट्रॉल का लेवल और खून में ट्राइग्लीसराइड भी बढ़ता है।
- पेट
मैदे में बिल्कुल भी फाइबर नहीं होता इसलिए ये पेट के लिए खराब होता है। इससे कब्ज होने की शिकायत होती है।
- फूड एलर्जी
मैदे में ग्लूटन होता है जोकि फूड एलर्जी को पैदा करता है। इसमें भारी मात्रा में ग्लूटन पाया जाता है जो खाने को लचीला बनाकर उसको मुलायम टेक्सचर देता है। वहीं गेंहू के आटे में ढेर सारा फाइबर और प्रोटीन पाया जाता है।
- हड्डियां
मैदा बनाते वक्त इसमें से प्रोटीन निकल जाता है और यह एसिडिक बन जाता है जो हड्डियों से कैल्शियम को खींच लेता है। इससे हड्डियां कमजोर हो जाती हैं।
- बीमारियां
मैदे को नियमित खाते रहने से शरीर का इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है जिससे बार-बार बीमार होने की संभावना बढ़ने लगती है।
- डायबिटीज
मैदै खाने से शुगर लेवल तुरंत ही बढ़ जाता है क्योंकि इसमें बहुत ज्यादा हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स होता है।
- गठिया और हार्ट की बीमारी
ब्लड शुगर बढ़ने से खून में ग्लूकोज़ जमने लगता है फिर इससे शरीर में केमिकल रिएक्शन होता है जिससे कैटरैक्ट से ले कर गठिया और हार्ट की बीमारियां होने लगती हैं।