
नारी डेस्क : Ghaziabad के राजनगर एक्सटेंशन में रहने वाले हरीश राणा को 13 साल तक वेजिटेटिव स्टेट में रहने के बाद आखिरकार अस्पताल ले जाया गया। Supreme Court of India के आदेश के बाद उन्हें पैसिव यूथेनेशिया की प्रक्रिया के तहत All India Institute of Medical Sciences में भर्ती कराया गया है। इस बीच उनके घर से सामने आया एक भावुक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में सफेद कपड़ों में एक महिला हरीश को मुस्कुराते हुए विदाई देती नजर आ रही हैं। लोगों के मन में सवाल उठ रहा था कि आखिर वह महिला कौन हैं। बाद में पता चला कि वे Brahma Kumaris की बहन थीं, जो विदाई से पहले घर पर राजयोग मेडिटेशन कराने पहुंची थीं।
घर पर कराया गया राजयोग मेडिटेशन
हरीश राणा को अस्पताल ले जाने से पहले Brahma Kumaris की बहनें उनके घर पहुंचीं। वहां उन्होंने परिवार के साथ मिलकर राजयोग मेडिटेशन कराया। बताया गया कि यह मेडिटेशन हरीश की आत्मा को शांति और शक्ति देने के लिए किया गया था। इस दौरान माहौल बेहद भावुक हो गया था, क्योंकि परिवार पिछले 13 वर्षों से हरीश की सेवा में लगा हुआ था।
‘सबको माफ करते हुए जाओ हरीश’
विदाई के समय ब्रह्माकुमारी बहन ने हरीश के माथे पर टीका लगाया और सिर पर हाथ फेरते हुए कहा, सबको माफ करते हुए, सबसे माफी मांगते हुए जाओ हरीश… अब तुम्हारी तकलीफ खत्म होने वाली है। इन शब्दों के साथ उन्हें भावुक विदाई दी गई। इस पल का वीडियो सोशल मीडिया पर लोगों को भावुक कर रहा है।
2013 में हुआ था हादसा
परिवार के अनुसार, साल 2013 में हरीश राणा चंडीगढ़ में सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे। इसी दौरान वह एक इमारत की चौथी मंजिल से गिर गए थे। इस हादसे के बाद से उनका शरीर और दिमाग सामान्य रूप से काम नहीं कर पा रहा था और वह लंबे समय तक वेजिटेटिव स्टेट में रहे। करीब 13 साल तक माता-पिता ने उनकी सेवा की और हर संभव इलाज कराया।
सुप्रीम कोर्ट ने दी इच्छामृत्यु की अनुमति
लंबे समय तक इलाज के बाद भी स्थिति में सुधार न होने पर परिवार ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। इसके बाद Supreme Court of India ने 11 मार्च को हरीश राणा को पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति दे दी। अब उन्हें All India Institute of Medical Sciences में भर्ती कर लाइफ सपोर्ट सिस्टम धीरे-धीरे हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
भावुक हो गया हर कोई
ब्रह्माकुमारी बहन ने माता-पिता की भावनाओं का जिक्र किया, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। उन्होंने कहा कि भले ही हरीश बोल नहीं सकते थे, हंस नहीं सकते थे, लेकिन अपने माता-पिता के लिए वही सबकुछ थे। उनकी मौजूदगी ही परिवार के लिए सुकून और उम्मीद थी। ऐसे में उनकी विदाई का यह पल हर किसी के लिए बेहद भावुक कर देने वाला था।