
नारी डेस्क : रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और रक्षा के संकल्प का पावन पर्व है। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी सुख-समृद्धि और लंबी उम्र की कामना करती हैं। राखी बांधते समय गांठ लगाने की भी कई पारंपरिक मान्यताएं हैं। कहीं 3 गांठें लगाने की परंपरा है, तो कुछ परिवारों में 5 गांठें लगाई जाती हैं। आइए जानते हैं इन दोनों मान्यताओं का धार्मिक महत्व।
राखी में 3 गांठ लगाने की मान्यता
कई परंपराओं में राखी की तीन गांठों को त्रिदेव—ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक माना जाता है।
पहली गांठ: भगवान ब्रह्मा को समर्पित मानी जाती है और जीवन में नई शुरुआत व प्रगति की कामना से जोड़ी जाती है।
दूसरी गांठ: भगवान विष्णु का प्रतीक मानी जाती है। इसे सुख, शांति, सुरक्षा और स्थिरता की कामना से जोड़ा जाता है।
तीसरी गांठ: भगवान शिव को समर्पित मानी जाती है। मान्यता के अनुसार यह नकारात्मकता और बाधाओं से रक्षा का प्रतीक है।

5 गांठों का क्या है महत्व?
कुछ परिवारों और क्षेत्रों में राखी में पांच गांठें लगाने की परंपरा भी देखने को मिलती है।
इन्हें पंचतत्व—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश से जोड़ा जाता है।
पृथ्वी: स्थिरता और धैर्य का प्रतीक
जल: शीतलता और सहजता का प्रतीक
अग्नि: ऊर्जा, साहस और आत्मविश्वास का प्रतीक
वायु: सकारात्मकता और गतिशीलता का प्रतीक
आकाश: विस्तार, संभावनाओं और सफलता का प्रतीक।

3 या 5, कौन-सी गांठ लगाएं?
इसका कोई एक सार्वभौमिक नियम नहीं है। राखी में 3 या 5 गांठ लगाने की परंपरा अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में अलग हो सकती है। इसलिए आप अपने परिवार की परंपरा और मान्यता के अनुसार राखी बांध सकती हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास और शुभकामना है।