
नारी डेस्क : अभिनेता प्रकाश राज ने अभिजीत दीपके की हिरासत और दिल्ली में तिरंगा मार्च के दौरान पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भारत में सत्ता परिवर्तन की मांग लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से ही होनी चाहिए। प्रकाश राज के मुताबिक, भारत की अपनी लोकतांत्रिक व्यवस्था, संविधान और मतदान का अधिकार है, इसलिए देश में बदलाव के लिए बांग्लादेश या नेपाल जैसे हालात का रास्ता अपनाने की जरूरत नहीं है।
अभिजीत दीपके की हिरासत पर क्या बोले प्रकाश राज?
प्रकाश राज ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके को तिरंगा मार्च से पहले हिरासत में लिए जाने पर नाराजगी जताई। उन्होंने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत करके विवाद सुलझाना चाहिए था, न कि बल प्रयोग करना चाहिए था। अभिनेता ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन और अपनी बात रखने के अधिकार को लोकतंत्र का अहम हिस्सा बताया। उनके अनुसार, नागरिकों को सवाल पूछने, विरोध जताने और मतदान के जरिए सरकार बदलने का अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के रवैये ने लोगों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर किया।
भारत बांग्लादेश या नेपाल नहीं है
प्रकाश राज ने सत्ता परिवर्तन की मांग का समर्थन करते हुए स्पष्ट किया कि भारत में बदलाव चुनाव और संवैधानिक प्रक्रिया के जरिए ही होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत के पास अपना संविधान, कानून और लोकतांत्रिक व्यवस्था है। महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव अंबेडकर और भगत सिंह जैसे महापुरुषों के विचारों का जिक्र करते हुए उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों के महत्व पर जोर दिया। उनका कहना है कि सरकार बदलने की मांग करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन इसके लिए संवैधानिक रास्ता अपनाना जरूरी है। बांग्लादेश में 2024 और नेपाल में 2025 के विरोध प्रदर्शनों के बाद हुए राजनीतिक बदलावों का संदर्भ देते हुए उन्होंने भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को अलग बताया।
‘हर घर तिरंगा’ के नारे पर भी उठाए सवाल
प्रकाश राज ने तिरंगा मार्च के दौरान हुई हिरासत की कार्रवाई पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी सवाल किया। उन्होंने कहा कि जब सरकार ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को बढ़ावा देती है, तो तिरंगा लेकर मार्च निकालने वाले युवाओं को रोकने की जरूरत क्यों पड़ रही है? अभिनेता ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ पुलिस ने सख्ती दिखाई। उन्होंने कहा कि विरोध करने वालों की बात सुनने और उनसे बातचीत करने के बजाय बल प्रयोग करना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, सरकार चाहे जितनी सख्ती कर ले, लोग अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाते रहेंगे।
CEC को हटाने और प्रदर्शनकारियों की रिहाई की मांग
प्रकाश राज ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की मांग का भी समर्थन किया। उन्होंने अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास की रिहाई की मांग उठाई। साथ ही, उन्होंने नेहा बोरा को हिरासत में रखे जाने पर भी सवाल किया। दिल्ली में 16 अक्टूबर को प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले पुलिस ने अभिजीत दीपके को हिरासत में लिया था। मार्च के दौरान अन्य प्रदर्शनकारियों को भी हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आईं। इस कार्रवाई को लेकर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के रुख पर बहस तेज हो गई है। हालांकि, चुनावी प्रक्रिया से जुड़े आरोपों और पुलिस कार्रवाई पर अलग-अलग पक्षों के दावे हैं। ऐसे में पूरे मामले को समझने के लिए संबंधित अधिकारियों और अन्य पक्षों के बयानों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।