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20 साल बाद Japan ने लगाया भारतीय आम पर Ban , बात टिकी विश्वास पर

  • Edited By Monika,
  • Updated: 29 May, 2026 04:32 PM
20 साल बाद Japan ने लगाया भारतीय आम पर Ban , बात टिकी विश्वास पर

नारी डेस्क : भारत के रसीले और स्वादिष्ट आम दुनियाभर में मशहूर हैं। खासकर अल्फोंसो, केसर, लंगड़ा और बंगनपल्ली जैसी प्रीमियम किस्मों की विदेशों में भारी डिमांड रहती है। लेकिन अब Japan ने भारतीय आमों के आयात पर रोक लगा दी है। करीब 20 साल बाद लिया गया यह फैसला भारतीय किसानों और निर्यातकों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

क्यों लगाया गया भारतीय आमों पर बैन?

जापानी अधिकारियों ने भारत के Vapour Heat Treatment (VHT) केंद्रों में निरीक्षण के दौरान फ्यूमिगेशन और डिसइंफेक्शन प्रक्रियाओं में खामियां पाई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक मार्च 2026 में उत्तर प्रदेश के रहमानपुर स्थित VHT केंद्र की जांच के दौरान ये कमियां सामने आईं। जापान का कहना है कि भारतीय आमों की कुछ खेपें उनके सख्त प्लांट हेल्थ और क्वारंटाइन मानकों पर खरी नहीं उतरीं। खासतौर पर फल मक्खी (Fruit Fly) जैसे कीटों को लेकर जापान बेहद सख्त नीति अपनाता है।

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किन आमों पर पड़ा असर?

जापान द्वारा लगाए गए इस प्रतिबंध का असर भारत की कई मशहूर और प्रीमियम आम किस्मों पर पड़ा है। इनमें अल्फोंसो, केसर, लंगड़ा और बंगनपल्ली जैसे आम शामिल हैं, जिन्हें जापान में काफी पसंद किया जाता था। अपनी मिठास, खुशबू और बेहतरीन गुणवत्ता की वजह से ये भारतीय आम वहां अच्छी कीमतों पर बिकते थे। अब बैन लगने के बाद इन किस्मों के निर्यात पर सीधा असर पड़ा है, जिससे किसानों और एक्सपोर्टर्स दोनों की चिंता बढ़ गई है।

क्या होता है VHT प्रोसेस?

Vapour Heat Treatment यानी VHT एक नॉन-केमिकल प्रक्रिया है, जिसमें आमों को नियंत्रित गर्म और नम हवा में रखा जाता है ताकि कीट और उनके लार्वा खत्म हो जाएं। भारत और जापान के बीच आम निर्यात समझौते में यह प्रक्रिया अनिवार्य है। हर साल जापान अपने क्वारंटाइन अधिकारियों को भारत भेजकर इन केंद्रों का निरीक्षण करवाता है।

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20 साल पहले भी लगा था बैन

जापान ने पहली बार 1986 में भारतीय आमों पर प्रतिबंध लगाया था। उस समय फल मक्खी संक्रमण को लेकर चिंता जताई गई थी। बाद में भारत ने वैज्ञानिक परीक्षण और बेहतर क्वारंटाइन सिस्टम तैयार किए, जिसके बाद 2006 में जापान ने यह बैन हटा लिया था। अब लगभग दो दशक बाद फिर से यह व्यापार रुक गया है।

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किसानों और निर्यातकों को बड़ा नुकसान

हालांकि जापान भारत का सबसे बड़ा आम बाजार नहीं है, लेकिन वहां भारतीय आमों को प्रीमियम कीमत मिलती है। ऐसे में इस फैसले से निर्यातकों को भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है। महाराष्ट्र के अल्फोंसो उत्पादक किसान पहले ही भीषण गर्मी और अल नीनो के कारण फसल नुकसान झेल रहे हैं। अब जापान के इस फैसले ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

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क्या भारत की साख पर पड़ेगा असर?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बैन से भारत की कृषि गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली पर सवाल उठ सकते हैं। इससे दूसरे आयातक देश भी भारतीय कृषि उत्पादों की जांच को लेकर सख्ती बढ़ा सकते हैं। जापान ने अभी तक यह साफ नहीं किया है कि प्रतिबंध कब हटाया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि जब तक भारतीय VHT केंद्र अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार सुधार नहीं कर लेते, तब तक आमों का आयात बंद रहेगा।

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