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ट्रेनिंग के दौरान CISF जवान का निधन, 6 महीने पहले ही लगी थी नौकरी, तिरंगे में लिपटकर घर लौटा शव

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 09 Jun, 2026 12:21 PM
ट्रेनिंग के दौरान CISF जवान का निधन, 6 महीने पहले ही लगी थी नौकरी, तिरंगे में लिपटकर घर लौटा शव

नारी डेस्क: देशसेवा का सपना आंखों में लिए जो जवान कुछ महीने पहले ही वर्दी में सजा था, किसी ने सोचा भी नहीं था कि इतनी जल्दी वही वर्दी उसके अंतिम सफर की पहचान बन जाएगी। ट्रेनिंग ग्राउंड की दौड़, पसीने में भीगा हौसला और परिवार की उम्मीदें सब कुछ एक पल में थम सा गया। जब तिरंगे में लिपटा उसका शरीर घर की दहलीज पर पहुंचा तो वहां मौजूद हर आंख सवालों और आंसुओं से भर गई कि आखिर इतनी जल्दी यह सपना अधूरा क्यों रह गया। बता दे कि राजस्थान के सीकर जिले से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। देश की सेवा का सपना लेकर केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) में भर्ती हुए 26 वर्षीय जवान संतोष कुमार वर्मा अब इस दुनिया में नहीं रहे। छत्तीसगढ़ में ट्रेनिंग के दौरान उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। इस खबर से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।

महज कुछ महीने पहले पूरी हुई थी देशसेवा की ख्वाहिश

सीकर जिले के रींगस क्षेत्र के भवानीपुरा गांव निवासी संतोष कुमार वर्मा इसी साल जनवरी 2026 में CISF में भर्ती हुए थे। परिवार और गांव के लोगों को उन पर गर्व था कि उनका बेटा देश की सुरक्षा में अपनी भूमिका निभाने जा रहा है। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। बताया जा रहा है कि छत्तीसगढ़ में ट्रेनिंग के दौरान दौड़ लगाते समय उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। साथियों ने तुरंत उन्हें अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उनका इलाज शुरू किया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।

#जय_हिन्द #जय_#भारत_माता_की_जय 🇮🇳

देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले सीआईएसएफ जवान संतोष कुमार की शहादत से पूरे देश को गर्व है। राजस्थान के सीकर जिले के रींगस क्षेत्र के भवानीपुरा गांव के निवासी संतोष कुमार ने देश सेवा के जज्बे के साथ सीआईएसएफ जॉइन की थी और महज चार महीने… pic.twitter.com/Abq3D3et0N

— अर्चना त्यागी--भारतीय किसान संघ 🇮🇳🇮🇳 (@Mrs_Tyagiji) June 9, 2026

मेहनतकश परिवार का होनहार बेटा था संतोष

संतोष कुमार वर्मा एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखते थे। उनके पिता मेहनत-मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। पांच भाई-बहनों में संतोष तीसरे नंबर पर थे। परिवार को उनसे बड़ी उम्मीदें थीं और वह भी देश की सेवा के साथ-साथ अपने परिवार की जिम्मेदारियों को मजबूती से निभाना चाहते थे।उनकी असामयिक मौत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।

पार्थिव देह पहुंचते ही गम में डूबा पूरा इलाका

रविवार को जब संतोष की पार्थिव देह उनके गृह क्षेत्र रींगस पहुंची तो माहौल बेहद भावुक हो गया। हर किसी की आंखें नम थीं। परिवार के लोग अपने बेटे को तिरंगे में लिपटा देखकर टूट गए। ग्रामीणों और परिजनों ने संतोष को शहीद का दर्जा देने की मांग भी उठाई। इस दौरान कुछ समय के लिए प्रदर्शन भी किया गया। बाद में स्थानीय विधायक सुभाष मील और प्रशासनिक अधिकारियों के आश्वासन के बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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तिरंगा यात्रा में उमड़ा जनसैलाब

रींगस से लेकर पैतृक गांव भवानीपुरा तक संतोष वर्मा की अंतिम यात्रा तिरंगे की छांव में निकाली गई। इस दौरान बड़ी संख्या में युवा हाथों में तिरंगा लेकर शामिल हुए और देशभक्ति के नारों के साथ अपने वीर बेटे को श्रद्धांजलि दी। सड़क के दोनों ओर खड़े लोगों ने भी नम आंखों से संतोष को अंतिम विदाई दी। पूरे क्षेत्र में शोक और गर्व का मिला-जुला माहौल देखने को मिला।

सैन्य सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई

भवानीपुरा गांव में संतोष कुमार वर्मा का अंतिम संस्कार पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया गया। CISF की टुकड़ी ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया। उनके बड़े भाई सुभाष वर्मा ने मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार की रस्म पूरी की। इस दौरान विधायक सुभाष मील, प्रशासनिक अधिकारी और कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी ने पुष्पचक्र अर्पित कर जवान को श्रद्धांजलि दी और उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।

🚨🇮🇳The Tricolor Wears His Valor, A Brother Bears The Pain 🇮🇳

Behind every brave soldier stands an elder brother who silently sacrificed his own dreams to build theirs.

Watching a younger brother return home wrapped in the sacred tricolor is a devastating pain that no words… pic.twitter.com/oSAugKouL8

— Ramesh Tiwari (@rameshofficial0) June 8, 2026

भाई की आंखों में छलका दर्द

अंतिम विदाई के दौरान सबसे मार्मिक दृश्य तब देखने को मिला जब संतोष के बड़े भाई की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। जिस छोटे भाई को उन्होंने पढ़ाया-लिखाया, आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और देशसेवा के सपने देखने का हौसला दिया, आज उसी भाई को तिरंगे में लिपटा देखकर उनका दिल टूट गया। परिवार के लिए यह क्षति कभी पूरी नहीं हो सकती, लेकिन संतोष का बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा।

गांव में बनेगा स्मारक

अंतिम संस्कार के दौरान विधायक सुभाष मील ने संतोष वर्मा की स्मृति में गांव में शहीद स्मारक बनवाने का आश्वासन भी दिया। ग्रामीणों का कहना है कि गांव का यह बेटा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनकर हमेशा याद किया जाएगा। हमेशा याद रहेगा संतोष का बलिदान महज 26 साल की उम्र में देशसेवा का सपना लिए निकले संतोष कुमार वर्मा का यूं चले जाना पूरे इलाके के लिए एक बड़ी क्षति है। उनका साहस, समर्पण और देश के प्रति प्रेम हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेगा। पूरा गांव आज अपने इस वीर सपूत को नम आंखों से सलाम कर रहा है।
 
 
 
 

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