नारी डेस्क : हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा अच्छी आदतों और संस्कारों के साथ बड़ा हो। इसके लिए वे उसकी पढ़ाई, स्कूल और व्यवहार पर तो ध्यान देते ही हैं, लेकिन अच्छी परवरिश सिर्फ इन चीजों तक सीमित नहीं होती। बच्चे के आसपास का माहौल, माता-पिता का आपस में व्यवहार और बच्चे के साथ बिताया गया समय भी उसके विकास और भावनात्मक सुरक्षा पर असर डाल सकता है। माता-पिता आपस में किस तरह बात करते हैं, बच्चे की बात कितनी ध्यान से सुनते हैं और घर के नियमों को लेकर कितना एकमत रहते हैं। बच्चे इन छोटी-छोटी बातों को भी नोटिस करते हैं। इसमें उन्होंने बच्चों की परवरिश से जुड़े 5 रूल्स बताए हैं, जिन्हें माता-पिता अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में अपनाने की कोशिश कर सकते हैं।
रूल नंबर 1- बच्चे के लिए समय जरूर निकालें
डॉक्टर के अनुसार, अगर घर पर माता-पिता दोनों मौजूद हैं, तो कोशिश करें कि बच्चे को अकेलेपन का एहसास न हो। उदाहरण के लिए अगर मां खाना बना रही हैं, तो पिता उस दौरान बच्चे के साथ समय बिता सकते हैं। इसी तरह अगर पिता किसी काम में व्यस्त हैं, तो मां बच्चे के साथ समय बिता सकती हैं। बच्चे के साथ सिर्फ मौजूद रहना ही नहीं, बल्कि उससे बातचीत करना और उसकी बात ध्यान से सुनना भी जरूरी है। बच्चे को यह महसूस होना चाहिए कि वह अपनी छोटी-बड़ी बातें माता-पिता के साथ शेयर कर सकता है।

रूल नंबर 2- बच्चे के सामने एक-दूसरे की बुराई न करें
पति-पत्नी के बीच मतभेद होना सामान्य बात है, लेकिन कोशिश करें कि इनका असर बच्चे के सामने न पड़े। बच्चे के सामने एक-दूसरे की शिकायत या बुराई करने से वह भावनात्मक रूप से उलझन महसूस कर सकता है। इसलिए “तुम्हारी मां हमेशा ज्यादा रिएक्ट करती हैं” या “तुम्हारे पिता मेरी बात नहीं समझते” जैसी बातें बच्चे के सामने कहने से बचें। अगर किसी मुद्दे पर दोनों के बीच मतभेद है, तो उसे बच्चे से अलग निजी तौर पर सुलझाने की कोशिश करें।
रूल नंबर 3- दिन में कम से कम एक बार साथ खाना खाएं
परिवार के साथ बैठकर खाना खाने का समय सिर्फ भोजन तक सीमित नहीं होना चाहिए। कोशिश करें कि दिन में कम से कम एक बार माता-पिता और बच्चे साथ बैठकर खाना खाएं। इस दौरान मोबाइल और टीवी को दूर रखकर बच्चे से बातचीत करें। उससे पूछ सकते हैं कि आज उसके दिन की सबसे अच्छी बात क्या रही या क्या कोई ऐसी बात हुई जिससे वह परेशान हुआ। ऐसी छोटी-छोटी बातचीत से माता-पिता को बच्चे की भावनाओं और रोजमर्रा की जिंदगी को समझने का मौका मिलता है और परिवार के बीच बेहतर संवाद बनाने में मदद मिल सकती है।

रूल नंबर 4- बनाए गए नियमों पर कायम रहें
अगर माता-पिता ने बच्चे के लिए कोई नियम तय किया है, तो दोनों को कोशिश करनी चाहिए कि उस नियम का पालन हो। उदाहरण के लिए अगर मां ने तय किया है कि डिनर से पहले चॉकलेट नहीं मिलेगी, तो पिता को भी उसी नियम पर कायम रहना चाहिए। अगर बच्चा एक माता-पिता से मना सुनने के बाद दूसरे से वही बात मनवाने की कोशिश करता है और उसे अनुमति मिल जाती है, तो घर के नियमों में असंगति पैदा हो सकती है। इसलिए बच्चों के लिए बनाए गए जरूरी नियमों को लेकर माता-पिता के बीच आपसी समझ होना बेहतर है।
रूल नंबर 5- बच्चे के सामने एक टीम की तरह रहें
डॉक्टर के अनुसार, माता-पिता के लिए बच्चे के सामने एक टीम की तरह रहना जरूरी है। अगर एक माता-पिता किसी काम के लिए मना करते हैं और दूसरा उसी काम की अनुमति दे देता है, तो बच्चा दोनों के अलग-अलग फैसलों को समझने में उलझ सकता है। इसलिए बच्चे से जुड़े जरूरी फैसलों पर पहले आपस में बात करें और फिर बच्चे के सामने एकमत होकर बात रखने की कोशिश करें। इससे घर में नियमों को लेकर स्पष्टता बनी रहती है।

आखिर में सबसे जरूरी है बच्चे को समय और भरोसा देना
बच्चों की परवरिश का कोई एक तय फॉर्मूला नहीं होता। हर बच्चा और हर परिवार अलग होता है। इसलिए इन नियमों को कठोर नियम मानने के बजाय एक सामान्य parenting guidance के तौर पर देखा जा सकता है। सबसे जरूरी बात यह है कि बच्चे को माता-पिता का समय, ध्यान, प्यार और सुरक्षित माहौल मिले। अगर बच्चे के व्यवहार, भावनाओं या विकास को लेकर कोई गंभीर चिंता हो, तो बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर रहता है।