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रावण दहन देखने से पहले बच्चों की सुरक्षा का रखें ध्यान, इन 8 गलतियों से बचें

  • Edited By Monika,
  • Updated: 19 Oct, 2026 02:08 PM
रावण दहन देखने से पहले बच्चों की सुरक्षा का रखें ध्यान, इन 8 गलतियों से बचें

नारी डेस्क : दशहरा आते ही रावण दहन और मेले को लेकर बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिलता है। रंग-बिरंगी रोशनी, झूले, खाने-पीने की दुकानें और आतिशबाजी का नजारा पूरे परिवार के लिए आकर्षण का केंद्र होता है। लेकिन इस उत्साह के बीच सुरक्षा को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। रावण दहन के दौरान भीड़, धक्का-मुक्की, आग की चिंगारियों और पटाखों से चोट लगने का खतरा रहता है। ऐसे में अगर आप भी बच्चों और परिवार के साथ दशहरा देखने जा रहे हैं, तो कुछ जरूरी सावधानियां जरूर अपनाएं, ताकि त्योहार की खुशियां किसी परेशानी में न बदलें।

भीड़ से थोड़ी दूर खड़े हों

रावण दहन के समय मैदान में बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा होते हैं। ऐसे में बच्चों के साथ ऐसी जगह खड़े हों, जहां से कार्यक्रम साफ दिखाई दे और जरूरत पड़ने पर बाहर निकलने का रास्ता भी खुला रहे। बहुत ज्यादा भीड़ वाली जगह पर खड़े होने से बचें। अगर धक्का-मुक्की शुरू हो जाए, तो बच्चों को सुरक्षित रखते हुए भीड़ के दबाव से दूर निकलने की कोशिश करें।

सुरक्षा घेरा पार करने की गलती न करें

रावण दहन स्थल के आसपास पुलिस और आयोजकों की ओर से सुरक्षा घेरा बनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को आग, आतिशबाजी और अन्य संभावित खतरों से बचाना होता है। बच्चों के साथ सुरक्षा घेरा पार करने या पुतले के बहुत करीब जाने की कोशिश न करें। हमेशा निर्धारित सुरक्षित स्थान से ही कार्यक्रम देखें और पुलिस व आयोजकों के निर्देशों का पालन करें।

आग और आतिशबाजी से बच्चों को दूर रखें

रावण के पुतले में आग लगने के बाद जलते हुए टुकड़े और चिंगारियां आसपास गिर सकती हैं। इसलिए बच्चों को पुतले, आतिशबाजी और पटाखे चलाने वाली जगह से सुरक्षित दूरी पर रखें। जमीन पर पड़े जले या अधजले पटाखों को छूने और उठाने से भी रोकें, क्योंकि वे अचानक फट सकते हैं। बच्चों को यह भी समझाएं कि पटाखों के पास दौड़ना या खेलना खतरनाक हो सकता है।

मेले में बच्चों का हाथ न छोड़ें

मेले में खिलौनों, झूलों और खाने-पीने की दुकानों के कारण बच्चों का ध्यान जल्दी भटक सकता है। इसलिए भीड़ में उनका हाथ पकड़कर रखें और उन्हें अकेले कहीं जाने न दें। छोटे बच्चों को ऐसे कपड़े पहनाएं, जिनमें वे आसानी से नजर आ सकें। उनके पास माता-पिता का मोबाइल नंबर लिखी पर्ची या पहचान कार्ड रखना भी उपयोगी हो सकता है।

बिछड़ने पर क्या करना है, बच्चों को पहले ही बताएं

मेले में जाने से पहले बच्चों को अपना नाम, माता-पिता का नाम और संपर्क नंबर याद कराएं। उन्हें समझाएं कि अगर वे भीड़ में बिछड़ जाएं, तो घबराकर इधर-उधर न भागें। किसी पुलिसकर्मी, आधिकारिक सहायता केंद्र या मेले के हेल्प डेस्क से मदद मांगें। बच्चों को यह भी बताएं कि किसी अनजान व्यक्ति के साथ मेले से बाहर नहीं जाना है।

अनजान व्यक्ति के साथ जाने से रोकें

बच्चों को पहले से समझा दें कि परिवार से अलग होने पर किसी अनजान व्यक्ति के साथ कहीं नहीं जाना चाहिए, भले ही वह मदद करने की बात कहे। उन्हें मेले में प्रवेश करते समय पुलिस सहायता केंद्र और आयोजकों के सूचना केंद्र जैसी जगहें दिखा दें। यदि बच्चा बिछड़ जाए, तो परिवार के सदस्य तुरंत नजदीकी पुलिसकर्मी या आधिकारिक सहायता केंद्र को इसकी जानकारी दें।

मेले में प्रवेश और बाहर निकलने का रास्ता देख लें

कार्यक्रम शुरू होने से पहले प्रवेश और निकास के रास्तों की जानकारी जरूर ले लें। आपात स्थिति में भीड़ के साथ धक्का देते हुए आगे बढ़ने के बजाय शांत रहने और पुलिस की हिदायतों का पालन करने की कोशिश करें। बच्चों को भी समझाएं कि भगदड़ जैसी स्थिति में रुककर घबराने के बजाय सुरक्षित दिशा में निकलने के लिए आयोजकों के निर्देश सुनें।

बच्चों को अपनी नजरों के सामने रखें

रावण दहन के दौरान फोटो या वीडियो बनाने में इतने व्यस्त न हो जाएं कि बच्चों पर ध्यान ही न रहे। परिवार के किसी एक सदस्य को बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी दें। छोटे बच्चों को भीड़ में अकेला न छोड़ें और झूलों या खाने की दुकानों पर जाते समय उनके साथ रहें।

इन छोटी-छोटी सावधानियों से त्योहार को बनाएं सुरक्षित

दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और इसे परिवार के साथ खुशी से मनाना चाहिए। थोड़ी-सी सतर्कता और पहले से की गई तैयारी बच्चों को भीड़, आग और दूसरी अप्रिय घटनाओं से बचाने में मदद कर सकती है। इसलिए रावण दहन का आनंद लें, लेकिन बच्चों की सुरक्षा को हमेशा पहली प्राथमिकता दें।

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