नारी डेस्क: दांतों में कैविटी यानी सड़न की समस्या आजकल काफी आम हो गई है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, कोई भी इसकी चपेट में आ सकता है। शुरुआत में दांतों में हल्का दर्द, ठंडा-गर्म लगना या दांत की सतह पर छोटा-सा निशान दिखाई दे सकता है। अगर समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो सड़न बढ़कर दांत के अंदर तक पहुंच सकती है और रूट कैनाल जैसे इलाज की जरूरत पड़ सकती है। दांतों की सेहत बनाए रखने के लिए रोजाना ब्रश करना, मीठी चीजों का कम सेवन करना और समय-समय पर डेंटिस्ट से जांच करवाना जरूरी है। इसी बीच न्यूट्रिशनिस्ट भावना गर्ग ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में एक खास हर्बल चाय की रेसिपी साझा की है। इसमें मुलेठी, कोको के छिलके, एरिथ्रिटोल और क्रैनबेरी का इस्तेमाल किया जाता है। दावा है कि इन चीजों में मौजूद कुछ तत्व मुंह में कैविटी पैदा करने वाले बैक्टीरिया को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि इस चाय को दांतों की सड़न का पक्का इलाज नहीं माना जा सकता। आइए जानते हैं इसे बनाने का तरीका और इससे जुड़ी जरूरी सावधानियां।
कैविटी होने पर दांतों में क्या बदलाव आते हैं
दांतों की सबसे बाहरी परत को इनेमल कहा जाता है। जब मुंह में मौजूद बैक्टीरिया खाने-पीने की चीजों से मिलने वाली शुगर का इस्तेमाल करते हैं, तो एसिड बनता है। यह एसिड धीरे-धीरे दांतों के इनेमल से खनिजों को कम कर सकता है। समय के साथ दांत कमजोर होने लगते हैं और उनमें कैविटी बन सकती है। शुरुआती अवस्था में, जब दांत में अभी गड्ढा नहीं बना होता, तो लार और फ्लोराइड की मदद से इनेमल में कुछ खनिज वापस आ सकते हैं। इस प्रक्रिया को रीमिनरलाइजेशन कहा जाता है। लेकिन अगर दांत में बाकायदा छेद बन चुका है, तो केवल चाय या घरेलू नुस्खे से उसे दोबारा भरना संभव नहीं होता। ऐसे में डेंटिस्ट की सलाह लेना जरूरी है।

हर्बल चाय में इस्तेमाल होने वाली चीजें क्या करती हैं?
न्यूट्रिशनिस्ट भावना गर्ग ने अपनी रेसिपी में चार मुख्य चीजों का इस्तेमाल किया है।
मुलेठी की जड़: मुलेठी में कुछ ऐसे प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं, जिन पर बैक्टीरिया के खिलाफ संभावित प्रभाव को लेकर अध्ययन हुए हैं। हालांकि, इससे बनी चाय कैविटी को ठीक कर देती है, इसका पर्याप्त चिकित्सकीय प्रमाण नहीं है।
कोको के छिलके: कोको में कुछ प्राकृतिक यौगिक पाए जाते हैं, जिन पर मुंह की सेहत के संबंध में शोध किया गया है। लेकिन कोको के छिलकों से बनी चाय को कैविटी का प्रमाणित इलाज नहीं माना जाता।
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एरिथ्रिटोल: यह चीनी के विकल्प के रूप में इस्तेमाल होने वाला एक स्वीटनर है। इसके दांतों की सेहत पर संभावित प्रभाव को लेकर अध्ययन किए गए हैं। फिर भी इसे कैविटी रोकने या उसका इलाज करने का अकेला उपाय नहीं समझना चाहिए।
क्रैनबेरी: क्रैनबेरी में कुछ ऐसे यौगिक होते हैं, जिन पर मुंह में बैक्टीरिया के व्यवहार और दांतों पर उनकी परत बनने की प्रक्रिया के संदर्भ में शोध हुआ है। लेकिन इस चाय में क्रैनबेरी मिलाने से कैविटी ठीक हो जाएगी, यह साबित नहीं हुआ है। क्रैनबेरी जूस लेते समय ध्यान रखें कि उसमें अतिरिक्त चीनी न हो।
कैविटी से बचाव के लिए हर्बल चाय बनाने की रेसिपी
सामग्री
1 बड़ा चम्मच कोको के छिलके यानी कोको शेल टी
1 छोटा चम्मच सूखी मुलेठी की जड़
1 कप गर्म पानी
2 छोटे चम्मच एरिथ्रिटोल
2 बड़े चम्मच बिना चीनी वाला क्रैनबेरी जूस या आधा छोटा चम्मच क्रैनबेरी पाउडर
बनाने का तरीका
स्टेप 1: सबसे पहले एक कप गर्म पानी में कोको के छिलके और सूखी मुलेठी की जड़ डाल दें।
स्टेप 2: बर्तन को ढककर मिश्रण को करीब 7 मिनट तक रहने दें, ताकि सामग्री का अर्क पानी में आ जाए।
स्टेप 3: अब चाय को छान लें और इसमें एरिथ्रिटोल डालकर अच्छी तरह मिलाएं। इसे तब तक चलाएं, जब तक स्वीटनर घुल न जाए।
स्टेप 4: चाय को थोड़ा ठंडा होने दें। जब यह गुनगुनी हो जाए, तब इसमें बिना चीनी वाला क्रैनबेरी जूस मिलाएं।

स्टेप 5: साझा की गई रेसिपी में चाय के एक घूंट को करीब 30 सेकंड तक मुंह में घुमाने के बाद निगलने का तरीका बताया गया है। हालांकि, इस मिश्रण को रोजाना इस्तेमाल करने की सुरक्षा और कैविटी पर इसके असर को लेकर पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए इसे नियमित उपचार के तौर पर अपनाने से पहले डेंटिस्ट या डॉक्टर से सलाह लें।
हर्बल चाय पीने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
मुलेठी का सेवन हर किसी के लिए सुरक्षित नहीं होता। इसमें मौजूद ग्लाइसिराइजिन ब्लड प्रेशर बढ़ा सकता है और शरीर में पोटैशियम का स्तर कम कर सकता है। इसलिए हाई बीपी, दिल या किडनी की समस्या वाले लोगों को मुलेठी का सेवन डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को भी इसका सेवन करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। एरिथ्रिटोल कुछ लोगों में पेट फूलने या पाचन संबंधी परेशानी का कारण बन सकता है। यदि आपको कोई पुरानी बीमारी है या आप नियमित दवाएं लेते हैं, तो इस तरह के मिश्रण को अपनी दिनचर्या में शामिल करने से पहले डॉक्टर से बात करें। सबसे जरूरी बात यह है कि अगर दांत में गड्ढा बन गया है, लगातार दर्द हो रहा है, ठंडा-गर्म लगने पर तेज संवेदनशीलता होती है या मसूड़ों में सूजन है, तो घरेलू नुस्खों के भरोसे इलाज में देरी न करें। डेंटिस्ट जांच के बाद सही उपचार बता सकते हैं।
दांतों को कैविटी से बचाने के लिए क्या करें
दिन में दो बार फ्लोराइड वाले टूथपेस्ट से ब्रश करें। दांतों के बीच फंसी गंदगी निकालने के लिए नियमित रूप से फ्लॉस या इंटरडेंटल क्लीनर का इस्तेमाल करें। मीठी चीजें और मीठे पेय बार-बार लेने से बचें। पानी पर्याप्त मात्रा में पिएं और नियमित डेंटल चेकअप करवाएं। दांतों में दर्द, काला निशान या लगातार संवेदनशीलता दिखाई देने पर डेंटिस्ट से संपर्क करें।
ध्यान दें: मुलेठी वाली हर्बल चाय को दांतों की सड़न भरने वाला प्रमाणित इलाज नहीं माना जा सकता। दांतों की शुरुआती देखभाल में सही ओरल हाइजीन और फ्लोराइड महत्वपूर्ण हैं, जबकि दांत में छेद बन जाने पर डेंटिस्ट से उपचार करवाना जरूरी हो सकता है।