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'खिलता बचपन' अभियान के तहत बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का काम कर रहे है सचिन भरवाल

  • Edited By Anu Malhotra,
  • Updated: 12 Jun, 2021 04:44 PM
'खिलता बचपन' अभियान के तहत बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का काम कर रहे है सचिन भरवाल

बाल मजदूरी एक ऐसी बीमारी हैं जो दीमक की तरह देश के भविष्य को खोखला कर रही हैं। बच्चे हर देश के सुनहरा भविषय होते हैं लेकिन वहीं बच्चे अगर बचपन में पढ़ाई की बजाय मजदूरी करने लगे तो देश का क्या भविष्य होगा। बाल मजदूरी का मुख्य कारण गरीबी, और अनपढ़ता हैं, जिस वजह से देश में बाल मजदूरी तेजी से बढ़ी हैं।
 

वहीं इसे रोकने और खत्म करने के लिए ही हर 12 जून को बाल श्रम निषेध दिवस के रूप में मनाया जाता हैं। 

वहीं देश में ऐसे कई नौजवान और एनजीओ है जो बाल श्रम पर कड़ी मेहनत कर रहे हैं। बच्चों की मजदूरी को छुड़वा उन्हें पढ़ाई की तरफ प्रेरित कर रहे हैं ऐसी ही देश में एक मिसाल पेश की है दिल्ली में रहने वाले 30 साल के एक लड़के ने, जिसने कई बच्चों के जीवन को संवारने का जिम्मा उठा रखा है। 

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दरअसल, यह कहानी Red Foundation के संस्थापक सचिन भरवाल की है, जो पिछले कई सालों से बच्चों को बाल मज़दूरी से निकाल कर उनको शिक्षा से जोड़ने का काम कर रहे हैं।
 

 खुद झुग्गियों में बिताया बचपन इसलिए बच्चों का दर्द महसूस किया-
सचिन बताते हैं कि पहले अपनी ग्रेजुएशन पूरी की, फिर एमएसडब्लू में मास्टर की डिग्री लेकर कई सामाजिक संस्थाओं के साथ काम किया। सचिन के अनुसार, देश के अलग-अलग राज्यों में काम करने के दौरान उन्होंने महसूस किया कि अस्थाई पलायन एक बड़ी समस्या है, जिसके कारण बच्चों की पढ़ाई बीच में ही छूट जाती है और वो बाल मज़दूरी का शिकार हो रहे हैं। चूंकि, सचिन ने अपना बचपन खुद झुग्गियों में बिताया था, इसलिए उन्होंने बच्चों के दर्द का महसूस किया और  दिल्ली लौटकर अपने दोस्त पवन गुप्ता के साथ बच्चों की ज़िदगी संवारने का काम शुरू किया। मयूर विहार फेस-3 के पास कोंडली गांव पंचायत घर को उन्होंने अपने इस काम के लिए चुना और रेड फाउंडेशन की नींव डाली।


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'Say No To Thumbs' नाम का चलाया अभियान-
इसके साथ ही सचिन 2018 से अपने 'खिलता बचपन' अभियान के तहत बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का भी काम कर रहे हैं।  सचिन के अनुसार उन्होंने महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में भी काम किया है. उनके इलाके में ऐसी कई महिलाएं हैं, जिनको अपना नाम तक लिखना नहीं आता है। अपने हर काम के लिए दूसरों पर निर्भर इन महिलाओं के लिए सचिन ने 'Say No To Thumbs' नाम का एक खास अभियान चलाया. इसके तहत महिलाओं को शिक्षित किया और रोज़गार से जुड़ने में उनकी मदद की, ताकि उनका जीवन सुधर सके।
 

जब लोग पापा से कहते हैं कि तुम्हारा लड़का नेक काम कर रहा है, तब खुशी मिलती है-
इसके अलावा सचिन सर्दियों में ज़रूरतमंद लोगों के बीच गर्म कपड़े भी बांटते,  उनके मुताबिक अगर लोगों के पास जरूरत से ज्यादा कपड़े हैं तो उन्हें सर्दी के मौसम में दूसरों को दे देना चाहिए. सचिन ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें बहुत सुकून मिलता है, जब लोग उनका साथ देने के लिए आगे आते हैं और उनके पापा से कहते हैं कि तुम्हारा लड़का नेक काम कर रहा है।   

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