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रिक्शा चलाने वाले बेटे ने कर दिखाया कमाल, NEET में 552 अंक से डॉक्टर बनने का सपना किया साकार

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 09 Jul, 2026 04:27 PM
रिक्शा चलाने वाले बेटे ने कर दिखाया कमाल, NEET में 552 अंक से डॉक्टर बनने का सपना किया साकार

  नारी डेस्क:  सफलता सिर्फ महंगी कोचिंग, बड़े शहरों या बेहतर संसाधनों की मोहताज नहीं होती। कई बार कठिन परिस्थितियों में की गई मेहनत ऐसी मिसाल बन जाती है, जो हजारों लोगों को प्रेरित करती है। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के रहने वाले मोहम्मद सुहेल ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने NEET परीक्षा में 720 में से 552 अंक हासिल किए और डॉक्टर बनने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ा लिया।

परिवार की मदद के लिए संभाला रिक्शे का हैंडल

सुहेल का परिवार लंबे समय से आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रहा था। उनके पिता रिक्शा चलाकर परिवार का गुजारा करते थे। ऐसे में 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद सुहेल ने सिर्फ अपनी पढ़ाई पर ध्यान नहीं दिया, बल्कि घर की जिम्मेदारी भी उठाई। परिवार की आमदनी बढ़ाने के लिए उन्होंने नोएडा और मुजफ्फरनगर में रिक्शा चलाया। इससे रोजाना 300 से 500 रुपये तक की कमाई होती थी, जिससे घर का खर्च चलाने में कुछ राहत मिलती थी।

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मां का सपना बना सबसे बड़ी ताकत

सुहेल की मां हमेशा चाहती थीं कि उनका बेटा पढ़-लिखकर डॉक्टर बने। हालांकि परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं थी कि लाखों रुपये खर्च कर किसी बड़े कोचिंग संस्थान में दाखिला दिला सके। यही सपना सुहेल के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा बना। उन्होंने तय किया कि हालात चाहे जैसे भी हों, वह अपनी मंजिल तक पहुंचने की कोशिश नहीं छोड़ेंगे।

ट्यूशन पढ़ाकर जुटाया पढ़ाई का खर्च

एक दोस्त से सुहेल को जानकारी मिली कि अगर NEET में अच्छे अंक आएं तो सरकारी मेडिकल कॉलेज में कम फीस में दाखिला मिल सकता है। इसके बाद उन्होंने अपनी तैयारी शुरू कर दी। पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए उन्होंने 11वीं के छात्रों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया। इससे एक ओर कुछ आमदनी होने लगी, वहीं दूसरी ओर उनकी अपनी पढ़ाई और रिवीजन भी होता रहा।

300 रुपये के ऑनलाइन कोर्स से शुरू हुई नई तैयारी

महंगी कोचिंग की बजाय सुहेल ने मात्र 300 रुपये का एक ऑनलाइन कोर्स खरीदा। लेकिन यहां भी एक नई चुनौती उनका इंतजार कर रही थी। उन्होंने हिंदी माध्यम से पढ़ाई की थी, जबकि कोर्स की अधिकांश सामग्री अंग्रेजी में थी। शुरुआत में उन्हें काफी परेशानी हुई, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। हर दिन करीब 50 नए अंग्रेजी शब्द याद करने का लक्ष्य बनाया और धीरे-धीरे भाषा की बाधा भी पार कर ली।

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पहली कोशिश में मिली निराशा

सुहेल ने जब पहली बार NEET परीक्षा दी तो उन्हें केवल 109 अंक मिले। इतना कम स्कोर देखकर किसी का भी आत्मविश्वास डगमगा सकता था। आस-पड़ोस के लोगों ने भी उनकी कोशिशों पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। लेकिन इस मुश्किल समय में उनकी मां ने उनका हौसला टूटने नहीं दिया। उन्होंने बेटे को आगे बढ़ने और दोबारा मेहनत करने के लिए लगातार प्रेरित किया।

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गलतियों से सीखा और लगातार सुधार किया

पहली असफलता के बाद सुहेल ने अपनी तैयारी का तरीका बदला। उन्होंने अपनी कमजोरियों पर काम किया और खास तौर पर बायोलॉजी विषय पर अधिक ध्यान देना शुरू किया। दिन में रिक्शा चलाने और रात में पढ़ाई करने का सिलसिला लगातार जारी रहा। मेहनत का असर धीरे-धीरे मॉक टेस्ट में दिखाई देने लगा। उनके अंक पहले 369 तक पहुंचे और फिर लगातार बेहतर होते गए।

आखिरकार 552 अंकों के साथ मिली बड़ी सफलता

कई बार ऐसा भी हुआ जब कम अंक आने पर सुहेल ने वैकल्पिक कोर्स में दाखिला लेने का विचार किया। लेकिन उनके शिक्षकों और मां ने उन्हें हार मानने नहीं दी। लगातार मेहनत और धैर्य का परिणाम आखिरकार तब मिला, जब NEET परीक्षा में उन्होंने 720 में से 552 अंक हासिल किए। यह सिर्फ एक परीक्षा का परिणाम नहीं था, बल्कि वर्षों के संघर्ष, परिवार के त्याग और अटूट विश्वास की जीत थी।

संघर्ष की यह कहानी बनी हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा

मोहम्मद सुहेल की सफलता इस बात का उदाहरण है कि सीमित संसाधन और कठिन परिस्थितियां किसी भी सपने को रोक नहीं सकतीं। सही दिशा में लगातार मेहनत, परिवार का साथ और खुद पर भरोसा हो तो बड़ी से बड़ी मंजिल भी हासिल की जा सकती है। आज उनकी कहानी उन सभी छात्रों के लिए प्रेरणा है, जो आर्थिक चुनौतियों के बावजूद अपने सपनों को सच करने की कोशिश कर रहे हैं।
 
 

 

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