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अब बिना लाइसेंस नहीं बिकेगा दूध, सरकार ने जारी किए सख्त निर्देश

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 15 Mar, 2026 12:28 PM
अब बिना लाइसेंस नहीं बिकेगा दूध, सरकार ने जारी किए सख्त निर्देश

नारी डेस्क: देश में दूध में मिलावट के बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब दूध बेचने वाले सभी उत्पादकों और विक्रेताओं के लिए रजिस्ट्रेशन या लाइसेंस लेना अनिवार्य कर दिया गया है। इस फैसले का उद्देश्य दूध के कारोबार को व्यवस्थित करना और लोगों तक सुरक्षित व शुद्ध दूध पहुंचाना है। इस संबंध में Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एडवाइजरी जारी की है। इसमें कहा गया है कि दूध में मिलावट रोकने के लिए सख्त अभियान चलाया जाए और बिना लाइसेंस दूध बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

सभी दूध विक्रेताओं को लेना होगा लाइसेंस

नई व्यवस्था के तहत अब कोई भी व्यक्ति बिना पंजीकरण या लाइसेंस के दूध का कारोबार नहीं कर सकेगा। चाहे वह दूध का उत्पादन करता हो या बिक्री करता हो, उसे पहले FSSAI से रजिस्ट्रेशन या लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। सरकार का मानना है कि इससे दूध के कारोबार को सही तरीके से नियंत्रित किया जा सकेगा और बाजार में मिलावटी दूध की बिक्री पर काफी हद तक रोक लग सकेगी।

कुछ डेयरी संस्थाओं को मिलेगी छूट

सरकार ने इस नियम में कुछ मामलों में छूट भी दी है। अगर कोई दूध उत्पादक अपना पूरा दूध किसी सहकारी डेयरी संस्था को बेचता है, तो उसे अलग से लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं होगी। उदाहरण के तौर पर अगर कोई किसान अपना पूरा दूध Amul, Mother Dairy या Sudha Dairy जैसी सहकारी डेयरी संस्थाओं को सप्लाई करता है, तो वह इस नियम से बाहर रहेगा। इसका कारण यह है कि ऐसी संस्थाएं पहले से ही खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत काम करती हैं और उनकी गुणवत्ता जांच की प्रक्रिया तय होती है।

हर 15 दिन में देनी होगी रिपोर्ट

FSSAI ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह भी निर्देश दिया है कि वे नियमित रूप से अभियान चलाकर बिना लाइसेंस दूध बेचने वालों की पहचान करें। इसके साथ ही राज्यों को यह सुनिश्चित करना होगा कि हर दूध विक्रेता और उत्पादक के पास वैध FSSAI रजिस्ट्रेशन या लाइसेंस हो।सरकार ने यह भी कहा है कि राज्यों को अपनी कार्रवाई और प्रगति की रिपोर्ट हर 15 दिन में FSSAI को भेजनी होगी। यानी महीने में दो बार इस संबंध में रिपोर्ट देना अनिवार्य होगा।

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मिल्क चिलर और स्टोरेज की होगी नियमित जांच

एडवाइजरी में अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे मिल्क चिलर और दूध के स्टोरेज सिस्टम की नियमित जांच करें। खासकर गर्मियों के मौसम में दूध जल्दी खराब हो सकता है, इसलिए यह जरूरी है कि उसे सही तापमान पर रखा जाए। इससे दूध की गुणवत्ता बनी रहेगी और लोगों की सेहत से खिलवाड़ नहीं होगा।

दूध में मिलावट से स्वास्थ्य को बड़ा खतरा

चिकित्सकों के अनुसार, मिलावटी दूध स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। ऐसे दूध के सेवन से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। मिलावटी दूध पीने से अक्सर पेट दर्द, दस्त, उल्टी और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं हो जाती हैं। अगर लंबे समय तक ऐसे दूध का सेवन किया जाए तो इसका असर शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर भी पड़ सकता है।

गंभीर बीमारियों का भी बढ़ सकता है खतरा

विशेषज्ञों का कहना है कि दूध में मिलावट के लिए कई बार फॉर्मेलिन, यूरिया और डिटर्जेंट जैसे खतरनाक रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है। ये पदार्थ शरीर के लिए बेहद नुकसानदायक होते हैं। इनके लंबे समय तक सेवन से लिवर और किडनी को स्थायी नुकसान, एलर्जी, हृदय रोग और यहां तक कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।

इसी वजह से सरकार दूध में मिलावट रोकने के लिए अब सख्त कदम उठा रही है।

लोगों को मिलेगा शुद्ध और सुरक्षित दूध

सरकार का मानना है कि इस नए नियम से दूध के कारोबार में पारदर्शिता आएगी और बाजार में बिकने वाले दूध की गुणवत्ता बेहतर होगी।  

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