नारी डेस्क: जिंदगी कब और किस मोड़ पर बदल जाए, कोई नहीं जानता। कभी-कभी सब कुछ सामान्य चल रहा होता है, लेकिन अचानक कोई ऐसी घटना हो जाती है, जो इंसान को अंदर तक हिला देती है। कुछ ऐसा ही हुआ था सैफ अली खान और सोहा अली खान की बहन सबा पटौदी के साथ। महज 27 साल की उम्र में उन्हें ब्रेन ट्यूमर होने का पता चला था। एक दिन वह अपनी दोस्त के साथ बाहर गई थीं, तभी अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और वह सड़क पर बेहोश होकर गिर पड़ीं। इसके बाद हुई जांच ने उनकी जिंदगी बदल दी। अब कई साल बाद सबा ने अपनी जिंदगी के उस मुश्किल दौर के बारे में खुलकर बात की है। उन्होंने बताया कि ब्रेन ट्यूमर का पता चलना उनके लिए कितना बड़ा झटका था और किस तरह इस खबर ने उन्हें भावनात्मक रूप से तोड़कर रख दिया था।
अचानक बिगड़ी तबीयत और सड़क पर हो गईं बेहोश
सबा पटौदी ने अपनी बहन सोहा अली खान के पॉडकास्ट 'ऑल अबाउट हर' में इस घटना को याद किया। उन्होंने बताया कि उस दिन उन्हें अचानक बेचैनी महसूस होने लगी थी। शुरुआत में उन्हें लगा कि शायद पेट की परेशानी के कारण ऐसा हो रहा है, क्योंकि उनका पेट हमेशा से संवेदनशील रहा है। जब उनकी तबीयत ज्यादा खराब होने लगी, तो उन्होंने अपनी दोस्त से कहा कि उन्हें ठीक नहीं लग रहा और अब घर लौटना चाहिए। लेकिन इसके कुछ ही देर बाद उन्हें कुछ समझ नहीं आया और वह बेहोश हो गईं। जब उन्हें होश आया, तब तक वह एक इमारत के बाहर सड़क पर गिर चुकी थीं। सबा के मुताबिक, उन्हें पूरी तरह होश में आने में करीब 20 से 25 मिनट लग गए। अचानक हुई इस घटना ने उन्हें भी डरा दिया था। इसके बाद उन्होंने अपनी सेहत की जांच कराने का फैसला किया।

MRI रिपोर्ट में दिखा दिमाग में असामान्य निशान
बेहोश होने की घटना के बाद सबा ने MRI जांच कराई। रिपोर्ट में उनके दिमाग के तीसरे वेंट्रिकल में एक असामान्य निशान दिखाई दिया। इसके बाद डॉक्टरों ने आगे की जांच की। शुरुआत में उन्हें कोलॉइड सिस्ट होने का शक था। यह दिमाग में बनने वाली एक दुर्लभ और आमतौर पर गैर-कैंसरयुक्त गांठ होती है। हालांकि, आगे की जांच और सर्जरी के बाद पता चला कि सबा को पाइलोसाइटिक एस्ट्रोसाइटोमा नाम का ब्रेन ट्यूमर था। यह आमतौर पर धीरे-धीरे बढ़ने वाला और कम ग्रेड का ट्यूमर होता है। सबा ने बताया कि MRI के करीब छह महीने बाद उनकी सर्जरी हुई। महज 27 साल की उम्र में दिमाग के ऑपरेशन की बात सुनना उनके लिए आसान नहीं था। इतनी कम उम्र में ऐसी गंभीर बीमारी का सामना करना उनके लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं था।
'जिंदगी अचानक सुन्न पड़ गई थी'
ब्रेन ट्यूमर का पता चलने के बाद सबा की जिंदगी जैसे थम सी गई थी। उन्होंने उस दौर को याद करते हुए बताया कि इस खबर ने उन्हें अंदर तक हिला दिया था। सबा के मुताबिक, जब तक सब कुछ ठीक चल रहा होता है, तब तक इंसान अपनी जिंदगी को सामान्य तरीके से जीता रहता है। लेकिन अचानक जब पता चले कि दिमाग की सर्जरी करानी पड़ेगी, तो कुछ भी पहले जैसा नहीं लगता। उन्होंने बताया कि जिंदगी अचानक सुन्न पड़ जाती है। एक दिन आप खुद को बिल्कुल ठीक समझ रहे होते हैं और अगले ही दिन आपको बताया जाता है कि आपके दिमाग का ऑपरेशन होने वाला है। सबा ने यह भी कहा कि दिमाग की सर्जरी को किसी सामान्य ऑपरेशन की तरह लेना आसान नहीं था। उनके लिए यह एक बेहद डरावना और भावनात्मक रूप से मुश्किल समय था।

बीमारी का पता चलने के बाद बिना वजह रोने लगती थीं
सबा ने बताया कि ब्रेन ट्यूमर की खबर मिलने के बाद वह भावनात्मक रूप से काफी परेशान रहने लगी थीं। कई बार ऐसा होता था कि वह बिना किसी खास वजह के अचानक रोने लगती थीं। इस स्थिति को समझना और स्वीकार करना उनके लिए ही नहीं, बल्कि उनके परिवार के लिए भी मुश्किल था। बीमारी और सर्जरी की चिंता के बीच उनके मन में यह डर भी था कि कहीं आगे चलकर उन्हें दूसरों पर निर्भर न होना पड़े। गंभीर बीमारी का पता चलने पर डर, बेचैनी और भावनात्मक उतार-चढ़ाव महसूस होना किसी के लिए भी मुश्किल हो सकता है। सबा के साथ भी उस दौरान कुछ ऐसा ही हुआ। हालांकि, उन्होंने धीरे-धीरे इस परिस्थिति का सामना किया और अपने परिवार के साथ इस मुश्किल दौर से गुजरती रहीं।
अब कैसी हैं सबा पटौदी?
इस घटना को कई साल बीत चुके हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, सबा अब ठीक हैं। उन्होंने हाल ही में अपने परिवार के साथ अपना 50वां जन्मदिन भी मनाया। सबा पटौदी, दिग्गज अभिनेत्री शर्मिला टैगोर और दिवंगत क्रिकेटर मंसूर अली खान पटौदी की बेटी हैं। वह सैफ अली खान और सोहा अली खान की बहन हैं। फिल्मों से दूर रहने के बावजूद सबा अपनी अलग पहचान रखती हैं और जूलरी डिजाइनिंग के क्षेत्र से जुड़ी हुई हैं।

सबा की यह कहानी बताती है कि गंभीर बीमारी का सामना करना सिर्फ शारीरिक ही नहीं, बल्कि भावनात्मक रूप से भी बड़ी चुनौती होता है। अचानक मिली किसी मेडिकल रिपोर्ट से इंसान की पूरी दुनिया बदल सकती है। ऐसे समय में परिवार का साथ, सही इलाज और मानसिक मजबूती बेहद अहम भूमिका निभाते हैं।